मोदी Vs ममता: किसकी सोशल वेलफेयर स्कीम बेहतर? रियल्टी चेक

चुनाव प्रचार में दोनों नेता अपनी योजनाओं को बेहतर बता रहे हैं. (फाइल फोटो)

चुनाव प्रचार में दोनों नेता अपनी योजनाओं को बेहतर बता रहे हैं. (फाइल फोटो)

दो योजनाएं ऐसी हैं जिन्हें लेकर पीएम मोदी (PM Narendra Modi) और ममता बनर्जी (Mamata Bnaerjee) के बीच तीखी बयानबाजी भी हुई. ये योजनाएं हैं पीएम किसान (PM Kisan) और आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat). एक योजना सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र की है तो दूसरी किसानों की वित्तीय मदद की. सीएम ममता का कहना है कि पीएम मोदी की योजनाएं सिर्फ दिखावे की हैं. उनका दावा है कि उनकी योजनाएं ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2021, 6:18 AM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान बीजेपी (BJP) और तृणमूल (Trinmool) दोनों की तरफ अपनी योजनाओं का जिक्र किया जा रहा है. चुनावी रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) अपनी उन योजनाओं का जिक्र कर रहे हैं जो उन्होंने अपने शासनकाल में शुरू की हैं. दो योजनाएं ऐसी हैं जिन्हें लेकर दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी भी हुई. ये योजनाएं हैं पीएम किसान और आयुष्मान भारत. एक योजना सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र की है तो दूसरी किसानों की वित्तीय मदद की. सीएम ममता का कहना है कि पीएम मोदी की योजनाएं सिर्फ दिखावे की हैं. उनका दावा है कि उनकी योजनाएं ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर रही हैं.

पीएम किसान बनाम कृषक बंधु

पश्चिम बंगाल इस वक्त देश में इकलौता राज्य है जिसने पीएम किसान योजना अपने यहां लागू नहीं की है. पीएम मोदी ने पीएम किसान योजना 24 फरवरी 2019 को लॉन्च की थी. इस योजना के तहत किसानों को सालभर में 6000 रुपए की मदद 2000 की तीन किश्तों में की जाती है. शुरुआत में योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी लेकिन फिर बाद में इसमें सभी किसानों को शामिल कर लिया गया.

वहीं राज्य में ममता बनर्जी की सरकार कृषक बंधु स्कीम चला रही है. इस योजना के तहत किसानों को पांच हजार रुपए की सालाना मदद की जा रही है. इस साल के बजट में राज्य सरकार ने 1 हजार रुपए की और बढ़ोतरी कर दी है. ममता सरकार ने इस योजना की घोषणा दिसंबर 2018 में की थी और इसमें राज्य के सभी किसान शामिल हैं. माना जा रहा है कि ममता सरकार एक हजार रुपए बढ़ाए जाने का कदम केंद्र सरकार की योजना को देखते हुए उठाया है.
आयुष्मान भारत बनाम स्वास्थ्य साथी योजना

आयुष्मान भारत योजना के तहत राज्य सरकारों को लाभार्थियों के कुल खर्च का 40 प्रतिशत भुगतान करना होता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस योजना का लक्ष्य 50 करोड़ लोगों सुरक्षा कवर देना है. इसके तहत 5 लाख रुपए का हेल्थ कवर मुफ्त दिया जाता है. आयुष्मान भारत योजना को मोदी सरकार की सबसे बेहतरीन योजनाओं में शुमार किया जाता है.

वहीं ममता सरकार का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य साथी योजना केंद्र की आयुष्मान योजना से बेहतर है. इस योजना के तहत भी हर परिवार को 5 लाख का सालाना हेल्थ कवर मुफ्त मिलता है. स्वास्थ्य साथी योजना के तहत सभी लोगों को कवर किया जाता है. हालांकि एक्सपर्ट्स की राय राज्य सरकार की स्कीम को लेकर अलग है. स्वराज्य मैगजीन के असोसिएट एडिटर जयदीप मजूमदार कहते हैं कि राज्य के प्राइवेट अस्पताल स्वास्थ्य साथी योजना कार्ड स्वीकार नहीं कर रहे क्योंकि इसके तहत इलाज का खर्च बेहद कम रखा गया है. आयुष्मान भारत के तहत पैनल में जोड़े गए प्राइवेट अस्पतालों के साथ यह समस्या न के बराबर आ रही है.



एक और समस्या ये भी है कि अगर पश्चिम बंगाल के किसी व्यक्ति को अपने राज्य से बाहर इलाज करना हो तो उसे योजना का लाभ नहीं मिल पाता. जबकि आयुष्मान भारत के तहत ये समस्या नहीं आती.

(SANTOSH CHAUBEY की स्टोरी से इनपुट्स के साथ.)

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