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Money Laundering Case: अनिल देशमुख की जमानत अर्जी पर बॉम्बे हाईकोर्ट आज सुना सकती है फैसला

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की जमानत पर कोर्ट फैसला सुना सकती है. (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की जमानत पर कोर्ट फैसला सुना सकती है. (फाइल फोटो)

Anil Deshmukh Case: मनी लॉन्ड्रिंग मामले (Money Laundering Case) में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की जमान ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की जमानत पर शुक्रवार को आ सकता है फैसला
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट सुना सकती है अहम फैसला
ईडी ने देशमुख की जमानत अर्जी का किया है विरोध

मुंबई. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की जमानत पर शुक्रवार को कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है. इसके बाद साफ हो जाएगा कि अनिल देशमुख को बेल मिलेगी या वो जेल की कस्टडी में ही रहेंगे. हालांकि, ईडी ने अनिल देशमुख की बेल का विरोध किया है. सुप्रीम कोर्ट ने अनिल देशमुख की बेल पर बॉम्बे हाइकोर्ट में सुनवाई में 7 महीने की देरी की याचिका पर आर्डर करते हुए निर्देश दिए थे कि वो 1 हफ्ते के अंदर अनिल देशमुख की बेल पर सुनवाई करे और आर्डर दे. इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट में अनिल देशमुख की बेल पर दो दिनों तक मैराथन सुनवाई के बाद बुधवार को अपने फैसले को रिजर्व रख दिया था. अब शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट प्रोनाउंस कर सकती है जिससे ये तय होगा कि अनिल देशमुख को बेल मिलेगी या उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा.

दो दिनों की सुनवाई में ईडी की तरफ से अनिल देशमुख की बेल का विरोध किया गया. ईडी की तरफ से पैरवी कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल देशमुख ने कोर्ट में दलील रखते हुए देशमुख के खिलाफ दो मुख्य आरोपों की ओर इशारा किया- एक मुंबई के बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वेज को पूरे मुंबई में बार और रेस्तरां से पैसे एक्सटॉर्शन के लिए कहा गया था और दूसरा अपने कार्यालय का दुरुपयोग करने के लिए जिसके द्वारा अनिल देशमुख बड़ी रकम के बदले में उनकी पसंद के पुलिसकर्मियों को स्थानान्तरण पोस्टिंग दी गई थी. अनिल सिंह ने दलील रखते हुए कहा कि अनिल देशमुख के निजी सचिव संजीव पलांडे, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्य सचिव सीताराम कुंठे और उस समय देशमुख के स्वयं के ओएसडी रवि वटकर ने पुष्टि की थी कि पैसों के बदले अधिकारियों के तबादले किए जा रहे थे.

अनिल देशमुख के वकील ने खड़े किए सवाल

बहस के दौरान अनिल देशमुख के वकील विक्रम चौधरी ने सचिन वजे के बयान को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि नंबर 1 नाम से जो मोबाइल नंबर सचिन वजे के मोबाइल फोन में मौजूद था वो किस बिना पर कहा जा सकता है कि अनिल देशमुख का था. डिपार्टमेंट में नंबर 1 की पोजिशन पर परमबीर सिंह थे. इस पर ईडी ने पुष्टि की उनके पास इस सवाल के जवाब में कई सबूत है कि वो नंबर 1 कोई और नही बल्कि अनिल देशमुख ही थे. इस पर अनिल देशमुख के वकील विक्रम चौधरी का कहना था कि ये सारी चीजें ट्रायल शुरू होने पर ही साफ हो पाएंगी. चौधरी ने कहा कि ईडी बहुत दिलचस्प विभाग है. उनकी जांच अंतहीन है. जब भी कोई अपने मामले में कमियों की ओर इशारा करता है तो वे बयान दर्ज करके उस गैप को भर देते हैं.

अनिल देशमुख की जमानत का विरोध करते हुए ईडी की तरफ से पैरवी कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कोर्ट में कहा कि जेल में बद अनिल देशमुख को अगर जमानत दी जाती है तो इसका मतलब होगा कि वो PMLA के तहत मुख्य आरोपी ही नही है. आर्थिक अपराध गंभीर है और यह देश की वित्तीय ताकत को प्रभावित करता है. ऐसे में जमानत देते वक्त अदालत को यह मानना होगा कि आरोपी बिल्कुल भी शामिल नहीं है.

विक्रम चौधरी ने किया बड़ा दावा

देशमुख की ओर से पेश विक्रम चौधरी, अनिकेत निकम और इंद्रपाल सिंह ने तर्क दिया कि प्रवर्तन निदेशालय ने देशमुख को बिना पक्के सबूत के गिरफ्तार किया है. मामले का ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है. जो केस देशमुख पर दर्ज है, इस मामले में अधिकतम सात साल और न्यूनतम तीन महीने की सजा हो सकती है, जबकि देशमुख इससे भी ज्यादा का समय जेल में गुजार चुके हैं. कोर्ट में अनिल देशमुख के वकील चौधरी ने तर्क दिया कि देशमुख को कंधे की सर्जरी की जरूरत है और बीमार व्यक्ति के लिए ये सर्ज़री जरुरी है. कुछ दिन पहले उनकी तबियत बिगड़ी थी और सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें केईएम अस्पताल ले जाया गया था.

ये भी पढ़ें:  अनिल देशमुख की जमानत याचिका की सुनवाई में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी, हफ्ते भर में फैसले का निर्देश

जवाब में ईडी की तरफ से पैरवी कर रहे अनिल सिंह ने कोर्ट से कहा उन्हें ऐसी कोई बीमारी नहीं है जिसका इलाज जेल से जुड़े अस्पताल से नहीं किया जा सकता है. उनका यह मामला नहीं है कि जब भी जरूरत पड़ी हम उन्हें अस्पताल नहीं ले गए. आजकल, हर किसी को उम्र संबंधी समस्याएं हैं और जेल में ऐसे कई कैदी हैं, लेकिन अदालत को इस पर विचार करना होगा कि क्या यह जमानत का आधार हो सकता है.

Tags: Anil deshmukh

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