सस्पेंड सांसदों को लेकर एकजुट विपक्ष, MSP पर तीन शर्तें मानी जाने तक करेगा राज्यसभा का बहिष्कार

कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने सभी निलंबित सांसदों की का निलंबन रद्द होने तक सदन की कार्यवाही का बहिष्कार की बात कही है.
कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने सभी निलंबित सांसदों की का निलंबन रद्द होने तक सदन की कार्यवाही का बहिष्कार की बात कही है.

मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्रवाई का विपक्ष ने बहिष्कार कर दिया है. कांग्रेस (Congress) के मुख्य सचेतक जयराम ने सात वजहे बताई हैं जिनके चलते कांग्रेस इस कार्रवाई में हिस्सा नहीं ले रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 2:52 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कोरोना काल में चल रहे संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session 2020) में कांग्रेस  (Congress) समेत समूचे विपक्ष ने राज्यसभा की कार्रवाई (Rajya Sabha) का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों का कहना है कि जब तक 8 निलंबित सांसदों का निलंबन वापस नहीं होता और कृषि बिल पर वोटिंग नहीं होती, वे कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेंगे. बता दें रविवार को सदन की कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर राज्यसभा सदस्यों ने उपसभापति हरिवंश से आपत्तिजनक व्यवहार कर दिया था जिसके बाद सोमवार को सभापित एम. वैंकेया नायडू ने 8 सांसदों को निलंबित कर दिया. इसे लेकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने जहां एक दिन के उपवास की घोषणा की है, वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने भी पूरे सत्र के बहिष्कार की बात कही है.

उधर सदन में लीडर ऑफ अपोजीशन और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने मंगलवार को कहा कि कोई भी सांसद 2-3 मिनट में अपनी बात नहीं रख सकता है. अगर ऐसा होने लगा तो 90 फीसदी सांसद बाहर रहेंगे. इसके बाद एकजुट विपक्ष ने निर्णय लिया कि जब तक सभी सांसदों का निलंबन वापस नहीं हो जाता वे कार्रवाई का बहिष्कार करेंगे.

आजाद ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, 'राज्यसभा की हमेशा से परंपरा रही है कि कोई भी विधेयक शोर-शराबे में पारित नहीं कराया जाता. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि करोड़ों किसानों से संबंधित विधेयकों को मतदान के बगैर पारित किया गया. विपक्ष की ओर से दिए गए संशोधनों पर भी कोई मतदान नहीं हुआ.'



राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, 'हमने कल राष्ट्रपति जी को लिखा है कि जो विधेयक पारित हुए हैं उनमें प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. ऐसे में वह इनको स्वीकृति नहीं दें.' उन्होंने कहा, 'एमएसपी को लेकर हमारी तीन शर्तें हैं. पहली यह कि सदन में एक और विधेयक लाया जाए या फिर प्रधानमंत्री अथवा कृषि मंत्री सदन में बयान दें कि एमएसपी से कम खरीद को गैर कानूनी बनाया जाएगा. दूसरी बात यह है कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर एमएसपी का सी 2 फॉर्मूला लागू हो.'
कांग्रेस नेता ने कहा कि तीसरी शर्त यह है कि राज्यों की एजेंसियों या एफसीआई भी खरीद करें तथा एमएसपी के हिसाब से खरीद हो.' आजाद ने इस बात पर जोर दिया, 'जब तक ये तीन शर्तें लागू नहीं होंगी तब तक हम कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे.'

यह भी  पढ़ें: हरिवंश के बाद अब विपक्ष के समर्थन में शरद पवार रखेंगे उपवास, कहा- एक दिन नहीं ग्रहण करूंगा अन्न



वहीं विपक्ष को सरकार द्वारा चर्चा में शामिल नहीं किया गया- जयराम
इन सबके बाद कांग्रेस नेता और राज्यसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने उन वजहों के बारे में जानकारी दी जिसके चलते कांग्रेस ने राज्यसभा की कार्रवाई का बहिष्कार किया है. रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार बिलों को सदन पर थोप रही है. हालिया घटनाक्रम का जिक्र करेत हुए रमेश ने कहा कि 8 सांसदों को बिना उनकी बात सुने सस्पेंड कर दिया गया और उनके खिलाफ सस्पेंशन प्रस्ताव पर भी डिविज़न तथा वोटिंग नहीं की गई जो नियमों के खिलाफ है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष एवं अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है और विपक्ष को सरकार द्वारा चर्चा में शामिल नहीं किया गया.

कांग्रेस सचेतक ने कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों को स्थायी समिति एवं तदर्थ समिति में चर्चा के लिए नहीं भेजा जा रहा गै और 2 महत्वपूर्ण कृषि विक्रय बिलों पर डिवीजन और वोटिंग नहीं होने दी गई. इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य को कृषि विक्रय कानून का हिस्सा नहीं बनाया गया और निजी व्यापार पर भी नहीं लागू किया गया.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज