द्विपक्षीय दौरों में दोनों देशों को नरम कूटनीतिक माहौल के बीच समझौतों के लिए बातचीत का मिलता है ज्‍यादा मौका

द्विपक्षीय दौरों में दोनों देशों को नरम कूटनीतिक माहौल के बीच समझौतों के लिए बातचीत का मिलता है ज्‍यादा मौका
बहुराष्‍ट्रीय और वैश्विक सम्‍मेलनों के इतर बैठकों के बाद भी द्विपक्षीय यात्रा क्‍यों जरूरी है.

Namaste Trump: किसी भी राष्‍ट्राध्‍यक्ष की यात्रा की तारीख तय करना दौरे का एक हिस्‍सा भर है. इसके साथ ही शुरू होता है सुरक्षा (Security), प्रोटोकॉल (Protocol), यात्रा के स्‍थान (Visiting Places), बैठक के दौरान चर्चा के मुद्दों व बिंदुओं को तय करना अहम होता है. प्रतिनिधिमंडल स्‍तर के साथ नेताओं के बीच बातचीत से लेकर संयुक्‍त बयान (Joint Statement) तक की तैयारी पहले से कर ली जाती है. हालांकि, संयुक्‍त बयान के लिए आखिरी समय तक काम किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2020, 6:32 PM IST
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महा सिद्दिकी

नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) के बीच आज शाम कई मुद्दों पर बातचीत होगी. यह दोनों शीर्ष नेताओं के बीच 8 महीने में 5वीं मुलाकात है. अब तक हुई चारों बैठकें दुनिया के अलग-अलग हिस्‍सों में हुए बहुराष्‍ट्रीय कार्यक्रमों (Multilateral Events) के दौरान हुई थीं. इनमें एक मुलाकात सितंबर, 2019 में न्‍यूयॉर्क (New York) में हुई संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा (UNGA) के इतर हुई थी. ट्रंप अपनी पहली यात्रा पर भारत आए हैं. फिर भी उम्‍मीद की जा रही है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच कुछ बड़े समझौते हो सकते हैं. हालांकि, एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि हर यात्रा में कुछ बड़े समझौते होना जरूरी नहीं है.

डोनाल्‍ड ट्रंप की यात्रा के लिए भारत को करना पड़ा दो साल इंतजार
फिर ऐसी उच्‍चस्‍तरीय यात्राओं का उद्देश्‍य क्‍या होता है और इनकी पृष्‍ठभूमि में क्‍या रहता है? ट्रंप की यात्रा का ही उदाहरण लें तो भारत को उनके दौरे का दो साल से इंतजार था. भारत ने 2018 में राष्‍ट्रपति ट्रंप को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि के तौर पर शामिल होने का न्‍योता भेजा था. इससे पहले 2015 में अमेरिका के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति बराक ओबामा गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि थे. वह पहले अमेरिकी राष्‍ट्रपति थे, जिन्‍होंने भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शिकरत की थी. इसी सफलता से उत्‍साहित भारत ने 2018 में ट्रंप को 2019 के गणतंत्र दिवस समारोह के लिए बुलाने की कोशिशें की गईं, लेकिन व्‍हाइट हाउस की ओर से कोई जवाब नहीं मिला.



विदेश मंत्रालय ने कहा, जब चाहें भारत आने का भेजा था न्‍योता


विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि उनको भेजे गए न्‍योते के मुताबिक वह जब चाहें भारत यात्रा पर आ सकते हैं. किसी भी राष्‍ट्राध्‍यक्ष की यात्रा की तारीख तय करना दौरे का एक हिस्‍सा भर है. इसके बाद सुरक्षा (Security), प्रोटोकॉल (Protocol), यात्रा के स्‍थान (Visiting Places), बैठक के दौरान चर्चा के मुद्दों व बिंदुओं (Talking Points) को तय करना अहम होता है. प्रतिनिधिमंडल स्‍तर के साथ नेताओं के बीच बातचीत से लेकर संयुक्‍त बयान (Joint Statement) तक की तैयारी पहले ही करनी होती है. ये पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है. इसमें दोनों पक्षों को लगातार एकदूसरे के संपर्क में भी रहना होगा.

अमेरिका की सीक्रेट सर्विस ने दौरा कर दौरों की जगह तय कीं
अमेरिकी राष्‍ट्रपति जैसे ताकतवर नेता की यात्रा से पहले अमेरिकी सीक्रेट सर्विस (Secret Service) ने हर जगह का दौरा कर तय किया कि वह कहां जा सकते हैं और उन्‍हें कहां नहीं जाना है. अमेरिकी सिक्‍योरिटी ने अहमदाबाद के रोडशो (Road Show) को 22 किमी से घटाकर 9 किमी कर दिया. इसका एक कारण रूट पर पड़ने वाले तीव्र मोड़ों (Sharp Turns) को भी बताया गया. इन मोड़ों पर ट्रंप के काफिले की कारों की रफ्तार कम करनी पड़ती और उन्‍हें न्‍यू मोटेरा स्‍टेडियम (New motera Stadium) पहुंचने में वक्‍त भी ज्‍यादा लगता. यही नहीं, भारतीय पक्ष को ट्रंप को साबरमती आश्रम (Sabarmati Ashram) ले जाने के लिए भी अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों को काफी समझाना पड़ा. उन्‍हें यह भी बताया गया कि अहमदाबाद आने वाला हर राष्‍ट्राध्‍यक्ष गांधी आश्रम जरूर जाता है.

भारत को आतंकवाद के खिलाफ सख्‍त संयुक्‍त बयान की उम्‍मीद
संयुक्‍त बयान जैसे कुछ मामलों पर आखिरी समय तक काम किया जाता है. संयुक्‍त बयान न सिर्फ यात्रा और बातचीत का उद्देश्‍य स्‍पष्‍ट करता है बल्कि दोनों देशों के बीच रिश्‍तों की गहराई बताता है. इसे दो देशों के बीच कूटनीति (Diplomacy) का अहम पहलू माना जाता है. पूर्व राजनयिक विष्‍णु प्रकाश ने कहा कि यात्रा जितनी ज्‍यादा अहम होती है, बातचीत उतनी ही ज्‍यादा जटिल हो जाती है. संयुक्‍त बयान में कुछ मुद्दों को ब्रेकेट में बंद कर दिया जाता है ताकि विदेश मंत्री उस पर एक नजर डाल लें. ट्रंप की यात्रा के दौरान भारतीय पक्ष आतंकवाद (Terrorism), भविष्‍य में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) जैसे मुद्दों समेत एक मजबूत संयुक्‍त बयान की उम्‍मीद कर रहा है.

वैश्विक सम्‍मेलनों के इतर बैठक के बाद भी क्‍यों जरूरी है ऐसी यात्रा
अब ये सवाल उठता है कि जब शीर्ष नेता बहुराष्‍ट्रीय या वैश्विक सम्‍मेलनों के इतर मुलाकात कर ही लेते हैं तो ऐसी द्विपक्षीय यात्राओं की जरूरत क्‍यों पड़ती है? पूर्व राजनयिक प्रकाश कहते हैं कि दोनों में बस इतना ही फर्क है, जैसे एक व्‍यक्ति को आपने किसी होटल या रेस्‍टोरेंट में बुलाया हो और एक को अपने घर बुलाया हो. घर पर बुलाकर की गई आवभगत हमेशा याद रह जाती है. वहीं, द्विपक्षीय यात्रा में दोनों नेताओं को एकदूसरे के साथ ज्‍यादा से ज्‍यादा समय मिल जाता है. चीन (China) के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) की महाबलीपुरम यात्रा के दौरान पीएम मोदी उनके साथ 10 घंटे तक रहे थे. वहीं, दूसरे देशों या वैश्विक सम्‍मेलनों के इतर मुलाकात में 30-45 मिनट ही मिल पाते हैं.

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