सौ साल से पुराने हो चुके हैं देश के 220 बड़े बांध, मचा सकते हैं तबाही!

अंग्रेजों के जमाने के बांधों का अगर ठीक से रखरखाव नहीं किया गया तो वो तबाही मचा सकते हैं. ऐसे सबसे ज्यादा डैम मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में हैं

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: July 7, 2019, 11:49 AM IST
सौ साल से पुराने हो चुके हैं देश के 220 बड़े बांध, मचा सकते हैं तबाही!
सौ साल से पुराने सबसे ज्यादा बांध मध्य प्रदेश में हैं (File Photo)
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: July 7, 2019, 11:49 AM IST
महाराष्ट्र, रत्नागिरी के तिवरे बांध को टूटने से 19 बेगुनाहों की जान चली गई. बारिश का मौसम है, ऐसे और कई बांधों पर खतरा मंडरा रहा है. देश के 220 बड़े बांध सौ साल से पुराने हो चुके हैं. मतलब वो अंग्रेजों के जमाने के हैं. जिनका ठीक से रखरखाव नहीं किया गया तो वो तबाही मचा सकते हैं. ऐसे में अधिकारियों पर अपने क्षेत्र के बांधों की मरम्मत का दबाव बनाईए. पुराने बांधों की मरम्मत के लिए सरकार ने पैसा जारी किया हुआ है.

साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स रीवर्स एंड पीपल (SANDRP) के कोर्डिनेटर हिमांशु ठक्कर का कहना है कि जरूरी नहीं कि सभी पुराने बांध खतरनाक हों. यदि उनका प्रबंधन और ऑपरेशन ठीक नहीं है तो नए बांध भी खतरनाक हो सकते हैं. रत्नागिरी का तिवरे बांध तो बीस साल भी पुराना नहीं था. वह 2004 में पूरा हुआ था.

ठक्कर कहते हैं “यदि ठीक से प्रबंधन न किया जाए तो हर बांध एक डिजास्टर सोर्स है. जैसे अगस्त 2018 में जो केरल में बाढ़ आई थी उसमें बहुत बड़ा हाथ डैम का ठीक ऑपरेशन न होना था. हर डैम का एक प्लान होना चाहिए और उसमें सिर्फ सरकारी लोग नहीं होने चाहिए. बल्कि जो प्रभावित लोग हैं उनकी भागीदारी बहुत जरूरी है.”

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इन राज्यों में हैं अंग्रेजों के जमाने के बांध

केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक मध्य प्रदेश में ऐसे 59 बांध हैं. महाराष्ट्र में 41, गुजरात में 30, राजस्थान में 25, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में 17-17, कर्नाटक में 15, छत्तीसगढ़ में 6, आंध्र प्रदेश में 4, ओडिशा में 3 और बिहार, केरल, तमिलनाडु में एक-एक ऐसे बांध हैं.

डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान बनाने का दावा
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केंद्र सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति ने बांधों का डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान (DMP) और इमरजेंसी एक्शन प्लान (EAP) बनाने के लिए संबंधित राज्य सरकारों से कहा था. इसके मुताबिक नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन (एनएचपीसी), दामोदर घाटी कारपोरेशन, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के प्रबंधन और बिहार, हिमाचल, केरल, एमपी, महाराष्ट्र और यूपी आदि की सरकारों ने बांधों का डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार किया है.

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बांधों के लिए पैसा और समय दोनों बढ़ा

केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री रतनलाल कटारिया के मुताबिक सरकार ने विश्व बैंक की सहायता से अप्रैल 2012 में बांध पुनरुद्धार एवं सुधार योजना शुरू की थी. इसके तहत मध्य प्रदेश, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तराखंड और झारखंड में स्थित बांधों का 20 जून 2018 तक पुनरुद्धार करने का प्लान था. इसके लिए शुरुआत में 21 सौ करोड़ रुपये का बजट रखा गया था. लेकिन अब इसका बजट 3466 करोड़ रुपये करके इसकी समय सीमा 2 साल और बढ़ा दी गई है.

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First published: July 7, 2019, 11:49 AM IST
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