Assembly Banner 2021

मुस्लिमों में पहली पत्नी के लिए क्रूरता का कारण बनता है बहुविवाहः कर्नाटक हाईकोर्ट

पीठ ने टिप्पणी की, 'हालांकि, मुस्लिमों में दूसरा विवाह कानूनी है, लेकिन अकसर यह पहली पत्नी के खिलाफ भारी क्रूरता का कारण बनता है

पीठ ने टिप्पणी की, 'हालांकि, मुस्लिमों में दूसरा विवाह कानूनी है, लेकिन अकसर यह पहली पत्नी के खिलाफ भारी क्रूरता का कारण बनता है

More than one marriage causes heavy cruelty to first wife: मुस्लिमों में दूसरा विवाह कानूनी है, लेकिन अकसर यह पहली पत्नी के खिलाफ भारी क्रूरता का कारण बनता है और इसलिए उसके द्वारा तलाक का दावा न्यायोचित है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 12, 2020, 11:11 PM IST
  • Share this:
बेंगलुरु. कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने कहा कि मुस्लिम पुरुष (Muslim men) द्वारा दूसरी शादी (Second Marriage) करना भले ही कानूनी हो लेकिन यह पहली पत्नी के प्रति भारी क्रूरता का कारण बनता है. उच्च न्यायालय की कलबुर्गी खंडपीठ में न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित और न्यायमूर्ति पी कृष्ण भट की पीठ ने हाल में निचली अदालत के फैसले को निरस्त करने की मांग वाली अपील को खारिज कर दिया था जिसमें याचिकाकर्ता युसूफ पाटिल की पहली पत्नी रमजान बी द्वारा शादी को खत्म की याचिका को न्यायोचित करार दिया गया था.

पीठ ने टिप्पणी की, 'हालांकि, मुस्लिमों में दूसरा विवाह कानूनी है, लेकिन अकसर यह पहली पत्नी के खिलाफ भारी क्रूरता का कारण बनता है और इसलिए उसके द्वारा तलाक का दावा न्यायोचित है.' उल्लेखनीय है कि उत्तरी कर्नाटक के विजयपुरा जिला के मुख्यालय के रहने वाले पाटिल ने जुलाई 2014 में शरिया कानून के तहत बेंगलुरु में रमजान बी से निकाह किया था. इस शादी के बाद पाटिल ने दूसरी शादी कर ली.

पति के माता-पिता पर लगाए गंभीर आरोप
इसके बाद रमजान बी ने निचली अदालत में याचिका दायर कर क्रूरता और परित्याग करने के आधार पर शादी को खत्म करने का अनुरोध किया. रमजान बी ने याचिकाकर्ता और उसके माता-पिता पर उससे एवं अपने माता-पिता से दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया.
इसके खिलाफ पाटिल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि वह पहली पत्नी से प्यार करता है जो इस मामले में प्रतिवादी है. पाटिल ने अदालत से कहा कि उसने माता-पिता के भारी दबाव की वजह से दूसरी शादी की जो शाक्तिशाली और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं.



शरीया कानून में बहुविवाह की अनुमति
उसने दूसरे विवाह को न्यायोचित ठहराते हुए कहा कि शरीया कानून में मुस्लिमों को बहुविवाह की अनुमति है और इसलिए यह कृत्य क्रूरता के बराबर नहीं है और न ही सयुंग्म (विवाह) के अधिकारों का विरोध करने का आधार है. पीठ ने पाटिल के इस तर्क को खारिज कर दिया है कि शरीया कानून बहुविवाह के साथ पहले विवाह को पुन: स्थापित करने की अनुमति देता है.

पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘अगर बताई गई परिस्थितियों को न्यायोचित माना जाए तो पति दो और शादियां कर सकता है और शरीया का सहारा ले सकता है.’’ (इनपुटः भाषा से)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज