दिल्‍ली से गांव लौटे मां-बेटे को कोरोना के डर से अपने ही घर जाने से रोका, श्‍मशान में बितानी पड़ी रात

श्‍मशान में बितानी पड़ी रात.
श्‍मशान में बितानी पड़ी रात.

मां-बेटे दिल्‍ली में रहते हैं. बेटे का जूलरी का बिजनेस कोविड 19 महामारी (Coronavirus) के कारण ठप हो गया है. ऐसे में दोनों ने गांव वापस लौटने की योजना बनाई थी, लेकिन गांव वालों ने उन्हें अपने ही घर में घुसने से रोक दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 12, 2020, 11:48 AM IST
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हावड़ा. कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के कारण देश के कई राज्‍यों में हालात खराब हैं. इसके प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) के वक्‍त बड़ी संख्‍या में प्रवासी मजदूर (Migrants) अपने-अपने गांव लौट रहे थे. रेलवे ने भी कई श्रमिक ट्रेनें चलाईं. लोग अब भी दूसरे शहरों से अपने गांव लौट रहे हैं और उन्‍हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसी एक घटना पश्चिम बंगाल (West Bengal) के हावड़ा में सामने आई है. यहां के रहने वाले महुआ मुखर्जी और उनका बेटा रोहित शुक्रवार को दिल्‍ली से गांव लौटे. लेकिन उन्‍हें उनके घर पर जाने से वहां के लोगों ने रोक दिया. इसके चलत उन्‍हें अपनी रात श्‍मशान घाट पर बितानी पड़ी. लोगों का कहना था कि वे लोग दिल्‍ली से आए हैं तो उनमें कोरोना वायरस संक्रमण हो सकता है.

दरअसल महुआ मुखर्जी के पति की मौत कई साल पहले हुई थी. अब वह और उनका बेटा रोहित दिल्‍ली में रहते हैं. रोहित का दिल्‍ली में ज्‍वैलरी का बिजनेस है. लेकिन कोविड 19 महामारी के कारण उसका बिजनेस ठप हो गया है. ऐसे में दोनों ने गांव वापस लौटने की योजना बनाई थी. दोनों शुक्रवार को राजधानी एक्‍सप्रेस से हावड़ा जिले के राजपुर पुलिस थाना क्षेत्र के रघुदेबपुर डाक बंगला स्थित अपने घर पहुंचे.

लेकिन उस इलाके में उनके पहुंचते ही वहां के लोगों ने उन्‍हें अपने ही घर जाने से रोक दिया. उनका कहना था कि वे लोग दिल्‍ली से लौटे हैं इसलिए उनमें कोरोना वायरस संक्रमण हो सकता है. महुआ ने कहा कि उन्‍होंने पंचायत सदस्‍य से अपने आने की सूचना दे दी थी. लेकिन लोगों को समझाने में विफल रहने पर महुआ और उनका बेटा रोहित साहापुर में स्थित अपने दूसरे मकान गए. वहां भी लोगों ने उन्‍हें घर जाने से रोक दिया था.

रोके जाने के बाद महुआ, उनका बेटा, उनके पिता और भाई पास में स्थित बासुदेव अगुनखली श्‍मशान घाट पर पहुंचे. वहां इन चारों ने उस कमरे में रात गुजारी, जहां खराब मौसम के दौरान लाशों को रखा जाता है. शनिवार सुबह जब पुलिस को इसके बारे में पता चला तो उसने सभी का उनके घर पहुंचाया.
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