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OPINION: पॉलिटिकल बॉयोपिक्स: लोकसभा चुनाव 2019 की हथियार बनेंगी ये फिल्में...!

OPINION: पॉलिटिकल बॉयोपिक्स: लोकसभा चुनाव 2019 की हथियार बनेंगी ये फिल्में...!

'एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर' फिल्म की स्टार कास्ट

'एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर' फिल्म की स्टार कास्ट

चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक बॉयोपिक्स की लगी होड़ को देखते हुए मन में एक सवाल का उठना लाज़मी है कि क्या कोई फिल्म किसी नेता की छवि को बना या बिगाड़ सकती है ?

देश में लोकसभा चुनाव 2019 की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है. इस दौरान देश में एक नया ट्रेंड दिखाई दे रहा है, राजनेताओं के जीवनी पर बनी फिल्मों की. बुधवार को फिल्म ठाकरे, गुरुवार को फिल्म ‘एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का ट्रेलर रिलीज हुआ. लोकसभा चुनाव के ठीक पहले दक्षिण भारत से भी कुछ इसी तरह की राजनीतिक बॉयोपिक्स पर बनी फिल्मों के आने का अनुमान है. जिनमें पहली फिल्म एनटीआर, दूसरी केसीआर और तीसरी ‘यात्रा’ जिसे वॉय एस राजशेखर रेड्डी के जीवनी पर बनाया गया है. इस तरह की फिल्मों की चर्चा को ध्यान में रखते हुए तो यही कहा जा सकता है कि मीडिया और सोशल मीडिया के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार का एक माध्यम ये फिल्में भी होने वाली हैं.

फिल्म अगर राजनेताओं की बॉयोपिक पर आधारित हो और उसको लेकर विवाद न हो ऐसा कहां संभव है. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आधारित फिल्म 'द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर' को लेकर राजनीति अभी से गरमाने भी लगी है. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारु की किताब ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ के प्रकाशित होने के बाद इस शीर्षक का इस्तेमाल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पर हमला करने के लिए बीजेपी द्वारा किया गया था. जिसको लेकर समय-समय पर बीजेपी-कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाती रही हैं.

फिल्म के जारी किए गए पहली झलक को देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि फिल्म की कहानी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के इर्द-गिर्द रची गई है. फिल्म के प्रोमो को बीजेपी द्वारा हाथों-हाथ लेना और अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करना फिल्म की  मंशा पर सवालिया निशान खड़े करती है. यही कारण है कि कांग्रेस ने फिल्म रिलीज होने से पहले फिल्म को कुछ वरिष्ठ नेताओं को दिखाए जाने की मांग की है. साथ ही ऐसा नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की भी बात कांग्रेस ने कही है.

बाला साहब ठाकरे के जीवन पर बनी फिल्म 'ठाकरे' की बात करे तो इस फिल्म भी हाल कुछ इसी तरह का लगता है. पहली नजर में कहा जा सकता है कि इसे मनोरंजन से ज्यादा राजनीतिक लाभ के लिए बनाया गया है. इस फिल्म को भी लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी है.

चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक बॉयोपिक्स की लगी होड़ को देखते हुए मन में एक सवाल का उठना लाज़मी है कि क्या कोई फिल्म किसी नेता की छवि को बना या बिगाड़ सकती है ? आने वाले चुनाव के परिणामों पर असर डाल सकती है ? हालांकि इन सवालों के जवाब के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा और देखना होगा कि इन फिल्मों से किसको फायदा होता है और किसको  नुकसान.

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Tags: Bal thackeray, Congress, Dr. manmohan singh, Manmohan singh, The Accidental Prime Minister

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