Mucormycosis: कोरोना संक्रमितों में ब्लैक फंगस के मामलों को लेकर AIIMS डायरेक्टर ने दी चेतावनी

डॉ. रणदीप गुलेरिया  (File pic)

डॉ. रणदीप गुलेरिया (File pic)

Mucormycosis: एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया (Randeep Guleria) के मुताबिक देशभर में आने वाले दिनों में ब्लैक फंगस (Black Fungus) के केस बढ़ सकते हैं. लिहाजा डॉक्टर गुलेरिया ने देश के डॉक्टरों को इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा है.

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नई दिल्ली. देश इन दिनों कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है. इस बीच कोरोना के मरीजों में एक और नई बीमारी ने डॉक्टरों की टेंशन बढ़ा दी है. ये है ब्लैक फंगस (Black Fungus) यानी म्यूकरमाइकोसिस (Mukermycosis). एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया (Randeep Guleria) के मुताबिक आने वाले दिनों में ब्लैक फंगस के केस देशभर में बढ़ सकते हैं. लिहाजा डॉक्टर गुलेरिया ने देश के डॉक्टरों को इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक डॉक्टर गुलेरिया ने एक कार्यक्रम में कहा कि कोरोना के ऐसे मरीजों पर ध्यान देने की जरूरत है जिन्हें शुगर है. उनके मुताबिक देश भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि ब्लैक फंगस कोरोना के ऐसे मरीजों को अपना शिकार बना रहा है, जिन्हें शुगर है. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि कोरोना के मरीजों का शुगर लेवल लगातार चेक किया जाए. उन्होंने कहा कि गुजरात के सिर्फ सरकारी अस्पताल से ब्लैक फंगस के 500 से ज्यादा केस सामने आए हैं.

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डायबिटीज के हैं ज्यादा मरीज़
गुलेरिया ने आगे कहा, 'गुजरात के हॉस्पिटल में ब्लैक फंगस केस को देखने के लिए कई स्पेशल वॉर्ड बनाए गए हैं. यहां अलग-अलग डॉक्टरों की टीम है. जांच में पता चल रहा है कि सारे मरीजों को कोरोना के इलाज के दौरान स्टेरॉयड दी गई थी. इसमें से 90-95 फीसदी वो मरीज़ है जिन्हें डायबिटीज हैं. कोविड खुद मरीजों को लिम्फोपेनिया की ओर ले जाता है. इसके अलावा स्टेरॉयड के इस्तेमाल से शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है.'





AIIMS में बढ़ रहे हैं मामले

डॉक्टर गुलेरिया ने आगे बताया कि दिल्ली के AIIMS में भी ब्लैक फंगस के 18-20 मरीजों का इलाज चल रहा है. उनके मुताबिक पिछले साल कोरोना की पहली लहर के दौरान इस तरह के केस नहीं दिखे थे. कई लोगों को कोरोना नेगेटिव होने के बाद भी ब्लैक फंगस बॉडी में बनी रहती है. उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस के सबसे ज्यादा केस गुजरात से आ रहे हैं. ब्लैक फंगस वाले 5-10 फीसदी ऐसे मरीज भी हैं जिन्हें कोरोना के इलाज के दौरान हॉस्पिटल में भर्ती नहीं कराया गया था.

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