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Exclusive: मुंबई एयरपोर्ट पर क्राउड मैनेजमेंट के लिए बना 'वर्चुअल स्‍पेस', जानें क्‍या है खास

Exclusive Interview: मुंबई एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ की कोशिश है कि मुसाफिरों को कम से कम समय कतारों में बिताना पड़े. ...अधिक पढ़ें

नई दिल्‍ली. मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की गिनती देश के दूसरे सबसे व्‍यस्‍त एयरपोर्ट के तौर पर होती है. आंकड़ों की बात करें तो इस एयरपोर्ट से रोजाना 83 गंतव्‍यों के बीच आवागमन करने वाली 980 उड़ानों से करीब 60 हजार मुसाफिर अपनी यात्रा पर रवाना होते हैं. ऐसे में, देश के दूसरे व्‍यस्‍त एयरपोर्ट की तरह मुंबई एयरपोर्ट पर भी सुरक्षा जांच के लिए लगने वाली लंबी कतारें एक बड़ी समस्‍या थी.

इस समस्‍या से निपटने के लिए मुंबई एयरपोर्ट की सुरक्षा संभाल रहे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने एक ‘वर्चुअल स्‍पेस’ तैयार कर ‘वर्चुअल क्‍यूइंग सिस्‍टम’ की व्‍यवस्‍था लागू की है. इस सिस्‍टम की मदद से सीआईएसएफ को न केवल पीक ऑवर्स के दौरान पैसेंजर क्राउड को संभालने में खासी मदद मिल रही है, बल्कि पैसेंजर्स को भी बेवजह लाइनों में लंबा इंतजार करने की समस्‍या से मुक्ति मिल गई है.

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मुंबई के ट्रैफिक जाम की समस्‍या को देखते हुए करीब 85 फीसदी मुसाफिर समय से पहले एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं.

क्‍या है वर्चुअल स्‍पेस और वर्चुअल क्‍यूइंग सिस्‍टम
News 18 हिंदी से बातचीत में मुंबई एयरपोर्ट के उपम‍हानिरीक्षक श्रीकांत किशोर
ने बताया कि वर्चुअल क्यूइंग सिस्टम यानी काल्‍पनिक पंक्ति प्रबंधन. यह एक ऐसी व्‍यवस्‍था है, जहां पर न ही कोई वास्‍तविक प्रतीक्षालय होता है और न ही प्रतीक्षारत मुसाफिरों के लिए कोई वास्‍तविक लाइन होती है. निर्देशों की मदद से मुसाफिरों को प्रतीक्षालय और पंक्तियों की एक परिकल्‍पना दी जाती है. यह परिकल्‍पना एक निर्धारित समय के बाद स्वत: खत्‍म हो जाती है और यात्री एयरपोर्ट पर अगली प्रकिया के लिए बढ़ जाते हैं.

मुंबई एयरपोर्ट पर तैयार वर्चुअल स्‍पेस और वर्चुअल क्‍यू‍इंग सिस्‍टम की बात करे तो डिपार्टर टर्मिनल में चेक-इन एरिया और प्री-इंबार्केशन सिक्‍योरिटी चेक के बीच की जगह को वुर्चअल स्‍पेस का नाम दिया गया है, जहां मौजूद यात्री वर्चुअल क्‍यूइंग सिस्‍टम के तहत अपनी बारी का इंतजार करते हैं. सीआईएसएफ की तरफ से संकेत मिलने पर वर्चुअल क्‍यू‍इंग सिस्‍टम में मौजूद मुसाफिर सुरक्षा जांच के लिए आगे बढ़ जाते हैं.

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मुंबई एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए चेक-इन एरिया और प्री-इंबार्केशन सिक्‍योरिटी चेक के बीच बैठने की विशेष व्‍यवस्‍था की गई है.

क्‍यों पड़ी वर्चुअल स्‍पेस और क्‍यूइंग सिस्‍टम की जरूरत
मुंबई एयरपोर्ट के उपम‍हानिरीक्षक श्रीकांत किशोर ने बताया कि पीक ऑवर्स यानी सुबह के 5:30 बजे से 8 बजे के बीच मुंबई एयरपोर्ट से प्रस्‍थान करने वाले मुसाफिरों की संख्‍या 10 हजार तक पहुंच जाती है. कुछ इतने ही मुसाफिर शाम को 6 बजे से 8 के बीच अपने गंतव्‍यों के लिए रवाना होते हैं. सीआईएसएफ के अंदरूनी अध्‍ययन में हमने पाया कि पीक ऑवर्स के दौरान 85 फीसदी मुसाफिर ऐसे होते हैं, जो एयरलाइंस द्वारा निर्धारित समय से काफी पहले एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं.

ऐसे में, पहले ही पीक ऑवर्स के दौरान एयरपोर्ट से प्रस्‍थान करने वाले मुसाफिरों की संख्‍या सामान्‍य समय से करीब 70 से 75 फीसदी अधिक होती है. वहीं, निर्धारित समय से पहले आने वाले मुसाफिर सुरक्षा जांच के लिए लगने वाली लाइनों को अनावश्‍यक रूप से काफी लंबा कर देते हैं. इस परिस्थिति से निपटने के लिए मुंबई एयरपोर्ट पर हमने वर्चुअल स्‍पेस तैयार कर वर्चुअल क्‍यूइंग सिस्‍टम को लागू किया, जिसका सीधा फायदा मुसाफिरों को मिल रहा है.

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कैसे काम करता है वर्चुअल स्‍पेस और क्‍यूइंग सिस्‍टम
भले ही, सीआईएसएफ का वर्चुअल स्‍पेस और क्‍यूइंग सिस्‍टम पीक ऑवर्स के दौरान टर्मिनल के चेकइन और प्री-इंबार्केशन सिक्‍योरिटी चेक एरिया के बीच काम करता हो, पर मुसाफिरों को कम से कम कतारों में इंतजार करना पड़े, इसके लिए कवायद एयरपोर्ट के गेट से ही शुरू हो जाती है. आइए, आपको लेकर चलते हैं मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल गेट से बोर्डिंग गेट तक के सफर पर…

टर्मिनल गेट पर न लगने पाए मुसाफिरों की कतारें
सीआईएसएफ की यही कोशिश होती है कि टर्मिनल गेट पर मुसाफिरों की लंबी कतारे न लगने पाएं. दरअसल, पूर्व में यह देखा गया था कि ज्‍यादातर मुसाफिर टर्मिनल के पहले गेट पर ही कतार में खड़े हो जाते थे, जबकि टर्मिनल के दूसरे गेट अपेक्षाकृत खाली पड़े रहते थे. इस स्थिति को खत्‍म करने के लिए इंस्‍पेक्‍टर रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्‍व में एक टीम को तैनात किया गया है, जो लगातार यात्रियों को खाली पड़े गेटों की तरफ डाइवर्ट करती है. सीआईएसएफ का लक्ष्‍य है कि किसी भी मुसाफिर को टर्मिनल गेट पर 2 से 3 मिनट ही रुकना पड़े.
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मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट देश का दूसरा सबसे व्‍यस्‍त एयरपोर्ट है.

समय से पहले आने वाले मुसाफिरों की पहचान
मुंबई के ट्रैफिक जाम की समस्‍या को देखते हुए करीब 85 फीसदी मुसाफिर अपने समय से बहुत पहले एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं. ऐसी स्थिति में,  अपने समय पर सुरक्षा जांच की लाइन पर खड़े मुसाफिरों के साथ इन मुसाफिरों की मौजूदगी न केवल कतारों को बहुत लंबा बना देती है, बल्कि कई यात्रियों की फ्लाइट छुड़वाने के लिए जिम्‍मेदार भी बनती है. इस स्थिति को सुधारने के लिए सीआईएसएफ ने ऐसे मुसाफिरों की पहचान शुरू की, जिनकी फ्लाइट में अभी काफी समय है. इन मुसाफिरों को प्री-इंबार्केशन सिक्‍योरिटी चेक से पहले ही रोक लिया जाता है.

‘वर्चुअल स्‍पेस’ की तरफ मुसाफिरों का डाइवर्जन
चेक-इन एरिया के ठीक बाद तैनात सीआईएसएफ के पुरुष या महिला कॉन्‍स्‍टेबल यात्रियों के बोर्डिंग पास के आधार पर यह पहचान करते हैं कि किन्‍हें प्री-इंबार्केशन सिक्‍योरिटी चेक के लिए भेजना है और किन्‍हें रोकना है. रोके गए मुसाफिरों को बताया जाता है कि आपकी फ्लाइट का डिपार्चर टाइम यह है, बोर्डिंग इतने बजे शुरू होगी, लिहाजा आपको सिक्‍योरिटी चेक के लिए इतने बजे जाना चाहिए. यात्रियों के लिए चेक-इन एरिया और प्री-इंबार्केशन सिक्‍योरिटी चेक के बीच बैठने की व्‍यवस्‍था की गई है, इसी एरिया को वर्चुअल स्‍पेस का नाम दिया गया है.
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मुंबई एयरपोर्ट से रोजाना करीब 60 हजार मुसाफिर अपने गंतव्‍यों के लिए रवाना होते हैं.

वर्चुअल क्‍विइंग सिस्‍टम के जरिए सुरक्षा जांच
सीआईएसएसएफ के वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि वर्चुअल स्‍पेस की तरफ डाइवर्ट करते ही मुसाफिर मानसिक तौर पर वर्चुअल क्‍यूइंग सिस्‍टम में आ जाते हैं. उनके दिगाम में एक वर्चुअल क्‍यू (काल्‍पनिक पंक्ति) बन जाती है और उन्‍हें पता होता है कि इस वर्चुअल क्‍यू में उसका नंबर सीआईएसएफ प्रतिनिधि द्वारा बताए गए समय पर आएगा. मुसाफिर अपने समय का इंतजार करते हैं और समय पूरा होते ही वे सुरक्षा जांच के लिए आगे बढ़ जाते हैं. इस तरह, वर्चुअल क्‍यूइंग सिस्‍टम की मदद से सिक्‍योरिटी चेक के लिए लगने वाली कतारों पर बड़ी आसानी से नियंत्रण पाया जा रहा है.

और एक्‍स-रे मशीन के पहले पैसेंजर मैनेजमेंट
यह बात वर्चुअल स्‍पेस या वर्चुअल क्‍यूइंग सिस्‍टम पर खत्‍म नहीं होती है. सुरक्षा जांच से पहले देखा जाता है कि हैंड बैग में मौजूद सामान के एक्‍स-रे को लेकर मुसाफिरों में बड़ा कंफ्यूजन रहता है. इसके अलावा, हैंड बैग से सामान निकालने और रखने में भी खासा समय लगता है. जिसके चलते, सिक्‍योरिटी एरिया में हमेशा भीडभाड़ नजर आती है. इस समस्‍या से निजात पाने के लिए सीआईएसएफ ने मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेटर मायल की मदद से कुछ स्‍ट्रक्‍चरल बदलाव किए हैं. साथ ही, अनाउंसमेंट के जरिए भी मुसाफिरों को पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है.

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मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारियां   

मुंबई एयरपोर्ट से रोजाना औसतन 60 हजार मुसाफिर आवागमन करते हैं.
मुंबई एयरपोर्ट से रोजाना औसतन 50 हजार यात्री घरेलू यात्रा पर और 5 हजार अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर अपने गंतव्‍य को रवाना होते हैं.
मुंबई एयरपोर्ट से करीब 28 अंतरराष्ट्रीय और 55 गंतव्‍यों के लिए उड़ानें पर‍िचालित की जाती हैं.
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 पर रात्रि 10 बजे से रात्रि 11 बजे के बीच और देर रात्रि 1:30 बजे से रात्रि 2:30 के बीच अंतरराष्ट्रीय मुसाफिरों की सबसे अधिक भीड़ होती है.
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 पर सुबह 5:30 बजे से सुबह 7:30 बजे तक और शाम 3 बजे से शाम 4 बजे के बीच घरेलू मुसाफिरों की सर्वाधिक भीड़ होती है.
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 पर सुबह 6 बजे से सुबह 8 बजे तक और शाम 6 बजे से रात्रि 8 बजे के बीच घरेलू मुसाफिरों की सर्वाधिक भीड़ होती है.
मुंबई एयरपोर्ट से सुबह 5 बजे से 8 बजे के बीच करीब 10 हजार मुसाफिर अपने गंतव्‍यों के लिए रवाना होते हैं.
मुंबई एयरपोर्ट से हवाई यात्रा पर रवाना होने वाले करीब 85 फीसदी मुसाफिर निर्धारित समय से बहुत पहले टर्मिनल पहुंच जाते हैं.
मुंबई एयरपोर्ट में पीक आवर्स के दौरान सामान्‍य समय से करीब 85 फीसदी मुसाफिर अधिक होते हैं.
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल गेट पर सुरक्षा जांच प्रक्रिया में करीब 3 मिनट का समय लगता है.
प्री-इंबार्केशन सिक्‍योरिटी चेक की प्रकिया में मुसाफिरों को औसतन 5.3 मिनट का समय लगता है.
वेब-चेकइन वाले मुसाफिरों को टर्मिनल गेट से बोर्डिंग गेट तक पहुंचने में कुल 20 मिनट का समय लगता है.
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 से पीक ऑवर्स के दौरान सुबह करीब 14.40 और शाम को करीब 785 मुसाफिर अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर रवाना होते हैं.
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 से पीक ऑवर्स के दौरान सुबह करीब 3588 और शाम करीब 1220 मुसाफिर अपनी घरेलू यात्रा पर रवाना होते हैं.
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 से पीक ऑवर्स के दौरान सुबह करीब 2072 और शाम करीब 2338 मुसाफिर अपनी घरेलू यात्रा पर रवाना होते हैं.
मुंबई एयरपोर्ट से कुल 83 गंतव्‍यों के लिए उड़ानों का पर‍िचालन किया जाता है.

Tags: Airport, Airport Diaries, Airport Security, CISF, Mumbai airport

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