मुंबई के पूर्व कमिश्नर का दावा-पुलिस अफसर शीना बोरा मामले में आरोपियों को अच्छे से जानते थे

मुंबई के पूर्व कमिश्नर का दावा-पुलिस अफसर शीना बोरा मामले में आरोपियों को अच्छे से जानते थे
राकेश मारिया ने अपनी किताब ‘लेट मी से इट नाउ’ में यह खुलासा किया है. फोटो. पीटीआई

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया (Rakesh Maria) ने दावा किया है कि उनके बाद इस पद पर रहने वाले अहमद जावेद (Ahmed Javed), शीना बोरा हत्या मामले (Sheena Bora Murder case) में आरोपी इंद्राणी (Indrani Mukherjee) और पीटर मुखर्जी (Peter Mukherjee) को सामाजिक रूप से जानते थे.

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मुंबई. मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया (Rakesh Maria) ने दावा किया है कि उनके बाद इस पद पर रहने वाले अहमद जावेद (Ahmed Javed), शीना बोरा हत्या मामले (Sheena Bora Murder case) में आरोपी इंद्राणी (Indrani Mukherjee) और पीटर मुखर्जी (Peter Mukherjee) को सामाजिक रूप से जानते थे. मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों जैसे हाईप्रोफाइल मामले की जांच करने वाले और 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमले की जांच का नेतृत्व करने वाले मारिया ने सोमवार को जारी अपनी किताब ‘लेट मी से इट नाउ’ में यह खुलासा किया है.

एक अफसर जिनका नाम मारिया ने लिया है उन्होंने मारिया के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यह पुस्तक के लिए प्रचार की रणनीति प्रतीत होती है.

पीटर मुखर्जी को शीना बोरा हत्या मामले में 19 नवंबर 2015 को गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में उनकी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी मुख्य आरोपी है. इंद्राणी मुखर्जी की बेटी शीना बोरा (24) की हत्या का मामला 2015 में उस समय प्रकाश में आया था जब मुखर्जी के चालक श्यामवर राय को एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया था.



ड्राइवर की गिरफ्तारी के कारण खुला था केस



श्यामवर राय ने शीना के शव को ठिकाने लगाने में मदद की थी. बाद में इस मामले में राय सरकारी गवाह बन गया था. मारिया ने पुस्तक में लिखा है कि जावेद भी मुखर्जी को सामाजिक रूप से जानते थे और उन्हें बाद में ईद की पार्टी में आमंत्रित किया गया था. किताब के अनुसार हत्या मामले की जांच के दौरान पीटर मुखर्जी ने मारिया को बताया था कि वह शीना बोरा के लापता होने की शिकायत को लेकर 2012 में एक अधिकारी के पास गए थे. किताब के अनुसार जब शीना के अचानक गायब होने के बारे में पता चलने पर मारिया ने पीटर मुखर्जी से ‘कुछ नहीं करने’ के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘सर, मैंने अधिकारी को बताया था.’

रात भर सो नहीं सके थे मारिया
पीटर मुखर्जी से पूछताछ के बारे में याद करते हुए मारिया ने कहा, ‘उस रात मैं एक झपकी भी नहीं ले सका था. मेरे दिमाग में यही चलता रहा कि पीटर ने मुझे शाम को जो बताया था, उसका सही मतलब पता लगाना है.’ उन्होंने किताब में कहा, ‘इसका मतलब था कि पीटर मुखर्जी, उस अधिकारी को अच्छी तरह से जानते थे और पहला नाम लेकर बात कर रहे थे. और मैं इन दिनों यह सब नहीं जानता था. इसके अलावा, अधिकारी ने मुझे एक बार भी यह बताना उचित नहीं समझा कि मुखर्जी उनके करीबी हैं.’

मारिया ने किताब में लिखा है कि जावेद, पीटर मुखर्जी को ‘सामाजिक रूप’ से जानते थे. उन्होंने लिखा, ‘जानबूझकर गलत ढंग से जांच को बदनाम करने का प्रयास किया गया कि मैं मुखर्जी को सामाजिक रूप से जानता था. मैंने स्पष्ट रूप से इसका खंडन किया था, लेकिन संदेह का माहौल बना रहा.’

भारती ने किया मारिया के दावे को खारिज
बाद में मरिया को महानिदेशक (होमगार्ड) नियुक्त किया गया और जावेद ने मुंबई पुलिस के प्रमुख का पदभार संभाल लिया. मारिया ने लिखा, ‘मुझे हटाये जाने के एक सप्ताह बाद यह पता चला कि पिछले सीपी नहीं बल्कि नए सीपी (जावेद) मुखर्जी को सामाजिक रूप से जानते थे और उन्होंने अपनी ईद की पार्टी में उन्हें आमंत्रित किया था.’ जिनका नाम मारिया ने लिया है, उन अधिकारियों ने कहा है कि पुस्तक के लिए यह एक विपणन रणनीति प्रतीत होती है. अधिकारियों ने कहा कि इसके अलावा, एक पुलिसकर्मी को, ‘काल्पनिक कथा’ के बजाय आरोप पत्र और केस डायरी पढ़ने की सलाह दी जाती है.

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