मिसाल: मुंबई पुलिस की कांस्टेबल रिहाना शेख ने 50 बच्चों को लिया गोद, 10वीं तक की पढ़ाई का देंगी खर्चा

बच्चों के साथ मुंबई पुलिस की कांस्टेबर रिहाना शेख. (एएनआई/12 जून, 2021)

Mumbai Police constable Rehana Shaikh: मुंबई पुलिस में बतौर कांस्टेबल कार्यरत रिहाना शेख ने कहा, 'मैं दसवीं कक्षा तक इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च वहन करूंगी.'

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    मुंबई. महाराष्ट्र में मुंबई पुलिस की कांस्टेबल रिहाना शेख ने 50 जरूरतमंद बच्चों को गोद लेने का फैसला किया है. उन्होंने कहा, 'मेरे दोस्त ने मुझे एक स्कूल की कुछ तस्वीरें दिखाई थीं. उसके बाद, मैंने महसूस किया कि इन बच्चों को मेरी मदद की जरूरत है और मैंने 50 बच्चों को गोद ले लिया. मैं दसवीं कक्षा तक के लिए इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च वहन करूंगी.'


    इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड-19 महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों को अवैध तौर पर गोद लिए जाने में संलिप्त गैर सरकारी संगठनों और लोगों के खिलाफ ‘कड़ी कार्रवाई’ करने का निर्देश दिया है.


    राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने शीर्ष अदालत को बीते सात जून को सूचित किया कि पांच जून तक विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा सौंपे गए आंकड़ों के मुताबिक 30,071 बच्चे अनाथ हो गए. इनमें से से ज्यादातर बच्चे महामारी के कारण अभिभावकों के गुजरने या छोड़ दिए जाने के कारण बेसहारा हुए.


    न्यायालय ने अभिभावक को खोने वाले या बेसहारा, अनाथ हुए बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि अनाथ बच्चों को गोद लिए जाने का आमंत्रण देना कानून के प्रतिकूल है क्योंकि केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (​कारा) की भागीदारी के बिना गोद लेने की अनुमति नहीं है.


    (इनपुट भाषा से भी)

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