अपना शहर चुनें

States

बॉम्बे HC से शापूरजी पलोनजी समूह को राहत, मुंबई झुग्गी विकास प्रोजेक्ट का रास्ता साफ

हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने वाली याचिका डायना एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर नगर सहकारी गृह निर्माण संस्था ने दायर की थी. फाइल फोटो
हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने वाली याचिका डायना एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर नगर सहकारी गृह निर्माण संस्था ने दायर की थी. फाइल फोटो

शापूरजी पलोनजी समूह (Shapoorji Pallonji group) की कंपनी प्रिकॉशन (Precaution Properties Pvt Ltd) ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं का दावा जमीन के सिर्फ 6 प्रतिशत हिस्से पर है और याचिकाकर्ताओं के पास प्रिकॉशन की योजना का कोई विश्वसनीय विकल्प भी नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2020, 7:52 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. शापूरजी पलोनजी समूह (Shapoorji Pallonji Group) की कंपनी को राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने दक्षिण मुंबई में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के पास कफ परेड इलाके के 113,321.54 स्क्वॉयर मीटर क्षेत्र में झुग्गी पुर्नविकास कार्यक्रम (Slum Rehabilitation Project) पर काम बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है. कोर्ट ने कहा, 'झुग्गीवासी दो दशकों से पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं और झुग्गीवासियों की कठिनाई को कम करने के लिए ऐसी योजनाएं लागू की जाती हैं और उन्हें केवल तकनीकी आधार पर अदालतों द्वारा आकस्मिक रूप से निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि अनियमितता और असफलता का बड़ा मामला सामने नहीं आता है.' झुग्गी पुर्नवास प्राधिकरण के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस नितिन जाधव और जस्टिस मिलिंद जाधव ने सुनवाई की.

प्राधिकरण ने अपने फैसले में झुग्गियों के पुर्नविकास प्रोजेक्ट को प्रिकॉशन प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (Precaution Properties Pvt Ltd) को सौंपने का फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने वाली याचिका डायना एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर नगर सहकारी गृह निर्माण संस्था ने दायर की थी, जिनकी ओर से वरिष्ठ वकील बीरेंद्र सर्राफ ने दलील पेश की. सर्राफ ने कोर्ट से आगे कहा कि याचिका में फरवरी 2020 में शीर्ष शिकायत निवारण समिति (Apex Grievance Redressal Committee) के उस फैसले को भी चुनौती दी गई है, जिसमें समिति ने प्रोजेक्ट के ग्रांट को चुनौती देने को खारिज कर दिया था. याचिकाकर्ताओं ने 2017 के उस सर्कुलर को भी चुनौती दी थी, जिसके तहत ये अनुमति दी गई थी कि प्रोजेक्ट प्रिकॉशन समूह को, होल्डिंग कंपनी का नेटवर्थ देखने के बाद दिया जा सकता है.

शापूरजी पलोनजी समूह की कंपनी प्रिकॉशन ने इस याचिका का विरोध किया था और कहा था कि याचिकाकर्ताओं का दावा जमीन के सिर्फ 6 प्रतिशत हिस्से पर है और याचिकाकर्ताओं के पास प्रिकॉशन की योजना का कोई विश्वसनीय विकल्प भी नहीं है.




प्रिकॉशन की ओर से कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए अस्पी चिनॉय ने कोर्ट से लेटर ऑफ इंटेट की कानूनी वैधता की न्यायिक समीक्षा को सीमित करने की मांग करते हुए अपनी दलील पेश की. साथ ही उन्होंने मामले में अप्रासंगिक मुद्दों पर किसी भी तरह की जांच का विरोध किया.

कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने केवल 7252 स्क्वॉयर मीटर पर अपना प्रस्ताव दिया है, जोकि प्रिकॉशन द्वारा पुर्नविकास के लिए चिह्नित जमीन का 6.4 फीसद हिस्सा है. कोर्ट ने कहा कि पूरी जमीन के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से कोई विकल्प नहीं पेश किया गया.

कोर्ट ने आगे कहा कि प्रिकॉशन कंपनी की आर्थिक सेहत को लेकर याचिकाकर्ताओं की दलीलों में कोई दम नहीं है. कोर्ट ने कहा, “सर्कुलर में केवल उस स्थिति को स्पष्ट किया गया है जिसे कभी बैन नहीं किया गया था. यह नहीं कहा जा सकता है कि सर्कुलर की तारीख, यानी 2 जनवरी, 2017 को अनुबंध लागू किया गया था और होल्डिंग कंपनी की वित्तीय क्षमता पर विचार करने पर प्रतिबंध था. लिहाजा इस आधार पर इसे चैलेंज नहीं किया जा सकता और इसे लंबित आवेदनों पर लागू भी नहीं किया जा सकता."

पीठ ने कहा कि स्कीम को टुकड़ों में नहीं लागू किया जा सकता और कंपनी के तकरीबन 85 प्रतिशत प्रोजेक्ट को झुग्गीवासियों की सहमति है. कोर्ट ने कहा, "23 को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटीज के 84 प्रतिशत झुग्गीवासियों ने प्रिकॉशन के प्रस्ताव का समर्थन किया है. प्रिकॉशन और उसकी होल्डिंग कंपनी की आर्थिक स्थिति पर्याप्त मजबूत है और झुग्गीवासियों के घर को विकसित करने में कंपनी पूरी तरह समर्थ है."
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज