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लैंगिक न्याय की हत्या: एक्टिविस्ट बोले- 'मूल अधिकारों का हनन करता है ट्रांसजेंडर बिल'

News18Hindi
Updated: November 27, 2019, 5:00 PM IST
लैंगिक न्याय की हत्या: एक्टिविस्ट बोले- 'मूल अधिकारों का हनन करता है ट्रांसजेंडर बिल'
ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट कह रहे हैं कि उन्हें यह बिल नहीं चाहिए (सांकेतिक फोटो, Reuters)

एक्टिविस्ट (Activist) का कहना है कि 'असंवैधानिक' ट्रांसजेंडर बिल 2019 (Transgender Persons Bill, 2019) को संविधान दिवस (Constitution Day) और ट्रांसजेंडर स्मरण दिवस (Transgender Remembrance Day) के दिन पास करना, संविधान और लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है.

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  • Last Updated: November 27, 2019, 5:00 PM IST
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(राखी बोस)

नई दिल्ली. ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट 26 नवंबर को 'लैंगिक न्याय की हत्या का दिन' (Gender Justice Murder Day) कह रहे हैं. ऐसा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2019 (Transgender Persons Protection of Rights Bill, 2019) के राज्यसभा में पास होने के बाद कहा जा रहा है. इस बिल को कई ट्रांसजेंडर (Transgender) और एक्टिविस्ट (Activist) के विरोध के बावजूद पास कर दिया गया है.

जब 11 महीने पहले यह बिल अचानक से लोकसभा (Lok Sabha) में पास कराया गया था, तबसे लगातार कई वकील, लैंगिक न्याय (Gender Justice) के लिए काम करने वाले एक्टिविस्ट, सांसद और विपक्ष और इसके लिए सबसे ज्यादा महत्व रखने वाले ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों द्वारा इसकी आलोचना कर चुके हैं.

'हम नहीं चाहते हैं यह बिल'

इस बिल को राज्यसभा में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत (Thawar Chand Gehlot) ने 20 नवंबर को देश भर के कई ट्रांसजेंडर समुदायर के लोगों के विरोध और इसे गैर संवैधानिक और मूल अधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताए जाने के बावजूद पेश किया था.

चेन्नई (Chennai) में रहने वाली ट्रांस राइटस एक्टिविस्ट ग्रेस बानु ने न्यूज18 को बताया कि जो भी हुआ भयानक था, हम इस बिल को नहीं चाहते. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इस बिल को पास करके भारत में लैंगिक न्याय की हत्या की है.

जिन लोगों ने लिया बिल पर फैसला, उन्हें 'ट्रांस लोगों की अस्मिता की समझ और जानकारी नहीं'एक्टिविस्ट के मुताबिक, यह बिल ट्रांसजेंडर (Transgender) लोगों से अपने लिंग को निर्धारित करने के अधिकार को छीन लेता है और उन्हें लिंग की बाइनरी से बांध देता है. ग्रेस के मुताबिक सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तो यह है कि यह फैसला उन लोगों ने लिया है जिन्हें न तो ट्रांस लोगों की अस्मिता की समझ है और न ही जानकारी है.

ग्रेस, जो कि शुरुआत से ही एंटी-ट्रांस बिल मूवमेंट का हिस्सा रही हैं, वे बताती हैं कि उन्हें पार्लियामेंट्री स्टैडिंग कमेटी (Parliamentary Standing Committee) के साथ अपनी पहली मुलाकात याद है, जिसे लोकसभा में पास किए जाने से पहले ट्रांसबिल को देखने और सुझाव देने के लिए बनाया गया था. उन्होंने बताया, ज्यादातर MP ट्रांसजेंडर लोगों के शरीर के बारे में या उनके अनुभवों के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे. कई केवल यह जानने के लिए उत्सुक थे कि हमारे 'नीचे वहां' क्या है?

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First published: November 27, 2019, 5:00 PM IST
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