कश्मीर घाटी में आतंक फैलाने लौट आया है मसूद अज़हर का पुराना साथी, गृहमंत्री की बेटी का किया था अपहरण

मुश्ताक अहमद जरगार का नाम 12 अगस्त, 1989 को तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण में भी सामने आया था.

News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 9:20 PM IST
कश्मीर घाटी में आतंक फैलाने लौट आया है मसूद अज़हर का पुराना साथी, गृहमंत्री की बेटी का किया था अपहरण
मुश्ताक अहमद जरगार का नाम 12 अगस्त, 1989 को तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण में भी सामने आया था.
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Updated: June 12, 2019, 9:20 PM IST
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में हुए एक आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 5 जवान शहीद हो गए. इस दौरान सुरक्षाबलों ने एक आतंकवादी को भी मार गिराया है. CRPF अधिकारियों के मुताबिक यह हमला केपी जनरल बस स्टैंड के पास हुआ. वाहन में बैठे आतंकवादी ने सुरक्षाबलों पर अचानक गोली चलानी शुरू कर दी. सीआरपीएफ के जवानों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात किया गया था. घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती किया गया है.

इस हमले में सीआरपीएफ के एएसआई नेहरू शर्मा, कॉन्सटेबल सतेन्द्र शर्मा, कॉन्सटेबल एमके कुशवाहा शहीद हो गए हैं. घायलों में एसएचओ अनंतनाग अरशद अहमद की हालत गंभीर बताई जा रही है. उन्हें उपचार के लिए श्रीनगर ले जाया गया है.



जबकि केदार नाथ, राजेंद्र सिंह का अनंतनाग के जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है. हमले में 18 वर्षीय एक स्थानीय  महिला भी घायल हुई है, जिसकी पहचान सनोबर जैन के तौर पर हुई है. इस हमले की जिम्मेदारी अल-उमर-मुजाहिदीन आतंकी गुट ने ली है.

20 साल बाद मजबूत हुआ है अल-उमर-मुजाहिदीन का सरगना मुश्ताक अहमद जरगार

संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का ब्रेक अवे फैक्शन है जो कि 1989 में उससे अलग हुआ था. पिछले कई सालों से यह संगठन लगभग निष्क्रिय था और इस हमले का अब वह दावा कर रहा है. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक इस तरीके के हमले कर आतंकी अमरनाथ यात्रा से पहले घाटी में अपनी सशक्त मौजूदगी का दर्ज कराने की फिराक में है.

कश्मीर न्यूज एजेंसी GNS के मुताबिक, अल उमर मुजाहिदीन आतंकी गुट का मुखिया मुश्ताक अहमद जरगार है. जरगार का आतंकी संगठन पाकिस्तान से रन करता है. छूटने के बाद से जरगार शांत था लेकिन 20 सालों बाद वह फिर से सक्रिय हो चुका है.

मसूद अज़हर का पुराना साथी है मुश्ताक
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जिन आतंकियों को कंधार कांड के बाद भारत को रिहा करना पड़ा था, उनमें जरगार भी शामिल था. जरगार को भी मसूद अज़हर के साथ रिहा किया गया था. 1999 में एक भारतीय फ्लाइट IC 814 को हाईजैक करके अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था और फ्लाइट के यात्रियों की रिहाई के बदले कई आतंकियों को रिहा करने की मांग की गई थी. 1999 में हुई इसी घटना को कंधार कांड के नाम से जाना जाता है.

इसमें छोड़े गए तीन आतंकियों में मसूद अज़हर और शेख उमर के अलावा मुश्ताक अहमद जरगार तीसरा था. इसके पहले जरगार के संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन ने कश्मीर घाटी के जकूरा इलाके में एसएसबी के काफिले पर हमला किया था, जिसमें एक जवान की मौत हुई थी. लेकिन अब उसका संगठन बड़े हमलों में शामिल हो रहा है.

जरगार का नाम सुनते ही कश्मीरियों को 90 के दशक की हिंसा की आ जाती है याद
कश्मीर में जरगार का नाम सुनते ही लोगों को वहां 90 के दशक में हुई बर्बर हिंसा की यादें ताजा हो जाती हैं. इस हिंसा के पीछे इसी मुश्ताक अहमद जरगार का नाम था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जरगार को घाटी में फिर से एक्टिवेट किया गया है और उसे यहां आतंक फैलाने के लिए पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी आईएसआई का पूरा संरक्षण मिला हुआ है.

केंद्रीय गृहमंत्री की बेटी का कर लिया था अपहरण
मुश्ताक अहमद जरगार को सुरक्षाबलों ने 1992 में गिरफ्तार किया था. दरअसल 12 अगस्त, 1989 को हुए तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण में भी उसका नाम सामने आया था.

रूबिया के अपहरण के बाद उसे छोड़ने के बदले जरगार ने पांच आतंकवादियों की रिहाई की मांग की थी. तत्कालीन सरकार को यह मांग माननी पड़ी थी. इसके बाद मुश्ताक ने श्रीनगर में कई हत्या की वारदातों को अंजाम दिया था. इसमें कश्मीरी पंडितों की नृशंस हत्या भी शामिल थी.

15 मई, 1992 को जरगार को सुरक्षाबलों ने पकड़ा था. इसी गिरफ्तारी के बाद से उसका संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन खत्म हो गया था, जो अब फिर से शक्तिशाली हो रहा है.

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