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Ayodhya Verdict: मुस्लिम नेताओं ने अयोध्या फैसले को किया स्वीकार, शांति का किया आह्वान

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 3:21 PM IST
Ayodhya Verdict: मुस्लिम नेताओं ने अयोध्या फैसले को किया स्वीकार, शांति का किया आह्वान
मुस्लिम समुदाय ने स्वीकार करते हुए सदस्यों से शांति बनाए रखने को कहा

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इस फैसले को मुस्लिम समुदाय (Muslim Community) ने स्वीकार करते हुए सदस्यों से शांति एवं सौहार्द बनाये रखने की अपील की है.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 3:21 PM IST
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मुंबई. अयोध्या मामले में कई दिनों से चले आ रहे इंतजार के बाद आखिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) ने अपना फैसला सुना ही दिया. शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर सभी ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम समुदाय ने स्वीकार करते हुए सदस्यों से शांति एवं सौहार्द बनाये रखने की अपील की है. कुछ धार्मिक विद्वान ने कहा कि पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला है, लेकिन वह समाज की बेहतरी के लिए फैसले को स्वीकार कर रहे हैं.

मस्जिद के लिए आवंटित की 5 एकड़ की जमीन
सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सर्वसम्मति से लिये गये फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ किया और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही किसी प्रमुख स्थान पर नई मस्जिद के निर्माण के लिए वैकल्पिक पांच एकड़ की जमीन आवंटित की जाए. मुस्लिम समुदाय ने कहा फैसला सभी समुदायों को कबूल होना चाहिए. हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे जो देश के हित में है.

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने 5 एकड़ जमीन स्वीकार की

ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल के महासचिव मौलाना महबूब दरयादी ने कहा कि हम खुश हैं कि कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गयी. हम कहते आ रहे हैं कि जो भी फैसला आएगा, हम स्वीकार करेंगे. हम सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय को स्वीकार करते हैं. हम इस बात से भी खुश हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड तथा निर्मोही अखाड़े की अपील को खारिज कर दिया. हम सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने की बात स्वीकार करते हैं. खोजा शिया जमात के वरिष्ठ सदस्य शब्बीर सोमजी ने कहा कि उन्होंने देश के हित में फैसला स्वीकार किया है.

मौलाना सैयद अथरली ने कहा  
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना सैयद अथरली ने कहा कि हमें देश में कानून व्यवस्था बनाकर रखनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि शांति बनी रहे. हमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश को स्वीकार करना चाहिए. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उनके लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला है. हम इस बारे में विचार करेंगे.
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हाजी अली दरगाह के ट्रस्टी सुहैल खंडवानी
माहिम दरगाह के प्रबंध ट्रस्टी तथा हाजी अली दरगाह के ट्रस्टी सुहैल खंडवानी ने कहा, गर्व की बात है कि भारतीयों ने शीर्ष अदालत के अंतिम आदेश को स्वीकार कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित फैसला सुनाया है, यह फैसला किसी धर्म विशेष के पक्ष में नहीं है. फैसले से संदेश गया है कि भारत जाति और वर्ण से ऊपर है.

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First published: November 9, 2019, 3:21 PM IST
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