ये है मदरसे से पढ़े मौलाना के आईएएस अफसर बनने की कहानी

सियासी बयानबाजी में अक्सर मदरसों पर उंगली उठती रही हैंं. कभी उन्हें आतंक की फैक्ट्री कहा जाता है तो कभी राष्ट्र विरोधी शिक्षा का अड्डा. यहां तक की पिछले कुछ समय से मदरसों को लव जिहाद की पाठशाला भी कहा जाने लगा है.

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: April 21, 2019, 11:33 AM IST
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: April 21, 2019, 11:33 AM IST
सियासी बयानबाजी में अक्सर मदरसों पर उंगली उठती रही हैंं. कभी उन्हें आतंक की फैक्ट्री कहा जाता है तो कभी राष्ट्र विरोधी शिक्षा का अड्डा. यहां तक की पिछले कुछ समय से मदरसों को लव जिहाद की पाठशाला भी कहा जाने लगा है. और फिर मदरसा आज़मगढ़ का हो तो ये बयान और भी तीखे हो जाते हैं.

लेकिन हाल ही में जारी हुए यूपीएससी के नतीजों ने मदरसों पर उंगली उठाने वालों को करारा जवाब दिया है. मदरसे से पढ़े एक मौलाना ने भी देश के सबसे बड़े इम्तिहान को पास कर आईएएस अफसर बनने का रास्ता साफ किया है. मौलाना शाहिद रज़ा खान अब जल्द ही अफसर बन जाएंगे.



मौलाना शाहिद ने बताया,  “मैंने मदरसे की पढ़ाई आज़मगढ़ से पूरी की है. अब फिलहाल जेएनयू से अपनी पीएचडी पूरी कर रहा हूं. अरबी और पश्चिम एशिया विषय में पीएचडी चल रही है. मैं गया, बिहार के रहने वाला हूं. मेरे एक बड़े भाई डॉ. जावेद अली दिल्ली में रहते हैं और तीन भाई अरब देश में नौकरी करते हैं. पिता मुमताज अली सीसीएल, बोकारो में सुपरवाइजर रहे हैं. मैंने ये इम्तिहान दूसरी बार में पास किया है.”

ये कोई पहला मौका नहीं है जब मौलाना शाहिद मीडिया की सुर्खियां बने हों. इससे पहले वर्ष 2016 में वो तब सुर्खियों में आए थे जब जेएनयू छात्र नजीब गायब हुआ था. इस बारे में मौलाना शाहिद बताते हैं, “नजीब केस का गवाह मैं पहले भी था और आज भी हूं और रहूंगा. मैं सीबीआई को दो-तीन बार अपने बयान दर्ज करा चुका हूं. आगे भी हमेशा जांच एजेंसियों की मदद के लिए तैयार रहूंगा. जब भी जांच एजेंसी दिल्ली पुलिस, एसआईटी और सीबीआई गवाही के लिए बुलाएंगे तो मैं जरूर आऊंगा.”

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