एन राम, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने कहा- कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के कुछ प्रावधान रद्द करे अदालत, दायर की याचिका

एन राम, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने कहा- कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के कुछ प्रावधान रद्द करे अदालत, दायर की याचिका
कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट (contempt of court act) के कुछ प्रावधान रद्द करने की मांग की है.

अरुण शौरी (Arun Shourie ) , पत्रकार एन. रा (N Ram) और वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने सुप्रीम कोर्ट में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट (contempt of court act) के कुछ प्रावधान रद्द करने की मांग की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 12:29 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्व बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी (Arun Shourie ) , पत्रकार एन. रा (N Ram) और वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने सुप्रीम कोर्ट में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के कुछ प्रावधान रद्द करने की मांग की है. एक याचिका के जरिए इन्होंने कहा है कि 'यह अधिनियम संवैधानिक नहीं है और संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध है.' याचिका में कहा गया है 'यह अधिनियम संविधान द्वारा दी गई अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन करता है.सर्वोच्च न्यायालय कंटेम्पट ऑफ कोर्ट के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दे.  लागू की गई उपधारा असंवैधानिक है क्योंकि यह संविधान के प्रस्तावना की सोच से मेल नहीं खाता.'

याचिका में कहा गया है कि  'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का अधिनियम आर्टिकल 19 (1) (ए) का उल्लंघन करता है. साथ ही असंवैधानिक अस्पष्ट और मनमाना है. अदालत को चाहिए कि वह अधिनियम की धारा 2 (C) (i)  को कॉन्स्टिट्यूशन के आर्कटिकल 19 और 14 का उल्लंघन करने वाला घोषित किया जाए.'

इनके खिलाफ चल चुके हैं कंटेम्पट ऑफ कोर्ट के मामले
तीनों की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि 'हम ऐसी स्थिति का सामना नहीं कर सकते जहां नागरिक  कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के डर से न्यायाधीशों के आचरण पर या अदालत के बाहर आलोचना के लिए दंडित किया जाए.'
बता दें एन राम, प्रशांत भूषण और अरुण शौरी पर अवमानना के मामले चल चुके हैं. पत्रकार एन राम पर कोल्लम शराब मामले में अदालती कार्यवाही के प्रकाशन पर केरल हाईकोर्ट में कंटेम्प्ट का सामना करना पड़ा तो वहीं अरुण शौरी  न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह आयोग के बारे में एक लेख को लेकर शौरी को एक अवमानना मामले का सामना करना पड़ा था हालांकि  अदालत ने अंत में फैसला दिया कि लेख में अदालत की अवमानना नहीं है. वहीं हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने न्यायपालिका के प्रति कथित रूप से अपमानजनक ट्वीट करने के मामले में अधिवक्ता और कार्यकर्ता प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के खिलाफ बुधवार को स्वत: अवमानना के मामले की सुनवाई की थी.
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