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तत्काल AFSPA हटाने के लिए केंद्र को चिट्ठी लिखेगी नगालैंड सरकार, 1 महीने में जांच की मांग

तत्काल AFSPA हटाने के लिए केंद्र को चिट्ठी लिखेगी नगालैंड सरकार, 1 महीने में जांच की मांग

नागालैंड सरकार अब केंद्र को चिट्ठी लिखेगी. (File pic)

नागालैंड सरकार अब केंद्र को चिट्ठी लिखेगी. (File pic)

Nagaland Government on AFSPA: राज्य कैबिनेट की बैठक में यह तय किया गया है कि केंद्र को चिट्ठी लिखकर तत्काल AFSPA हटाने को कहा जाएगा. साथ ही कैबिनेट बैठक में यह भी तय हुआ कि केंद्र द्वारा बनाई गई SIT पूरे मामले की जांच एक महीने के भीतर पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करे.

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    कोहिमा. नगालैंड सरकार (Nagaland Government) अब केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देने वाले कानून AFSPA को हटाने की मांग करेगी. सोमवार को राज्य कैबिनेट (State Cabinet) की बैठक में यह तय किया गया है कि केंद्र को चिट्ठी लिखकर तत्काल AFSPA हटाने को कहा जाएगा. साथ ही कैबिनेट बैठक में यह भी तय हुआ कि केंद्र द्वारा बनाई गई SIT पूरे मामले की जांच एक महीने के भीतर पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करे. दरअसल राज्य में सुरक्षाबलों द्वारा की गई फायरिंग में 14 नागरिकों की मौत के बाद एक बार फिर से सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून, 1958 को वापस लेने की मांग ने जोर पकड़ लिया है.

    इससे पहले सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने नगालैंड में हुई गोलीबारी के मामले पर लोकसभा में बयान दिया था. गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की ओर से इस घटना पर खेद जताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की.

    गृह मंत्री ने कहा, ‘सेना को ओटिंग, सोम में चरमपंथियों की गतिविधि की सूचना मिली थी. इसी आधार पर 21 कमांडो ने संदिग्ध इलाके में घात लगाकर हमला किया.’ उन्होंने बताया कि वहां एक वाहन पहुंचा, उसे रुकने का इशारा किया लेकिन उसने भागने की कोशिश की. ऐसे में चरमपंथियों को ले जा रहे वाहन के संदेह में, उस पर गोली चलाई गई.

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    नाराज जनजाति ने रखी पांच मांगें
    वहीं घटना से नाराज मोन जिले के कोनयाक नगा जनजाति (NAGA Tribe) के शीर्ष कोनयाक यूनियन ने सरकार को 5 सूत्रीय ज्ञापन दिया है. इनमें समूह ने घटना में शामिल जवानों के खिलाफ कार्रवाई और सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम या AFSPA को निरस्त करने की मांग की है. शनिवार को हुई घटना में 14 आम नागरिकों की मौत में सबसे ज्यादा संख्या नगा जनजाति की थी.

    कई दशक से लागू है AFSPA
    खास बात है कि नगालैंड और उत्तरपूर्व के हिस्सों में AFSPA कई दशकों से लागू है. इस कानून के तहत सुरक्षाबल बगैर किसी वॉरंट के किसी भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर AFSPA को लेकर उपलब्ध नोट में यह बताया गया कि, इस कानून को सन 1958 में बनाया गया था. दरअसल देश के पूर्वोत्तर राज्यों में राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन प्रदेश में होने वाली हिंसा और अस्थिरता से निपटने में असमर्थ पाए गए थे.

    Tags: AFSPA, Amit shah

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