महिलाओं की एंट्री पर विवाद, मस्जिदों में नमाज़ भी पढ़ा रही हैं महिलाएं

ये कहना गलत है कि महिलाओं के पीछे पुरुषों की नमाज नहीं हो सकती है. या महिलाएं मस्जिद में नमाज़ नहीं पढ़ सकती हैं.

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: April 16, 2019, 11:17 AM IST
महिलाओं की एंट्री पर विवाद, मस्जिदों में नमाज़ भी पढ़ा रही हैं महिलाएं
प्रतीकात्मक फाइल फोटो.
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: April 16, 2019, 11:17 AM IST
मुस्लिम महिला इमामत (नमाज़ पढ़ाना) कर सकती है या नहीं. महिला के पीछे पुरुष नमाज पढ़ सकते हैं या नहीं. ये मुद्दा पहले भी बहस का विषय बन चुका है. ये मुद्दा तब उठा था जब केरल से सामने आए एक वीडियो में एक महिला कुछ पुरुषों को जुमा की नमाज़ पढ़ाते हुए दिखाई गई थी.

ताजा मामला मस्जिद में महिलाओं को नमाज़ पढ़ाने की इजाजत देने को लेकर है. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है. इस्लामिक पीस एंड डवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहम्मद इकबाल का कहना है, “महिलाओं के नमाज पढ़ने के लिए देश में कई मस्जिदें हैं. कुछ जगहों पर एक महिला दूसरी महिलाओं की इमामत भी कर रही है. मालेगांव, महाराष्ट्र के मदरसे जामिया मोहम्मदिया के परिसर में बनी एक मस्जिद में लड़कियां नमाज पढ़ती हैं. उनकी नमाज महिला इमाम ही पढ़ाती हैं.”

वहीं इस बारे में मुफ्ती इमरान का कहना है, “ये कहना गलत है कि महिलाओं के पीछे पुरुषों की नमाज नहीं हो सकती है. या महिलाएं मस्जिद में नमाज़ नहीं पढ़ सकती हैं. महिलाएं तरावीह (रमजान के दौरान पढ़ी जाने वाली एक खास नमाज) पुरुषों को पढ़ा सकती हैं. लेकिन उसके साथ कुछ शर्तें हैं. जैसे उस नमाज के दौरान पुरुष और महिलाएं दोनो ही लोग शामिल रहें. सही बात तो ये है कि ये कोई मद्दे नहीं हैं. लेकिन लोकसभा चुनावों को देखते हुए इन्हें मुद्दा बनाया जा रहा है.”

वहीं महिलाओं के लिए आवाज उठाने वालीं भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की कार्यकर्ता जकिया सोमन का कहना है कि “हम कुरान को मानते हैं और कुरान का कहना है कि समय के साथ चलो. विकास के लिए समय के हिसाब से बदलाव लाओ. कुरान महिला और पुरुष दोनों को ही संबोधित करता है. हमारे एक इंटरनेशनल ग्रुप की एक सदस्य अमीना वुदुद अमेरिका में कई साल पहले इमामत कर चुकी हैं.”

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वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम वीमेंस पर्सनल लॉ बोर्ड की राष्ट्रीय अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर का कहना है कि “महिलाएं मस्जिद में नमाज पढ़ सकती हैं. महिलाएं इमामत करते हुए दूसरी महिलाओं को नमाज पढ़ा भी सकती हैं. लेकिन एक महिला पुरुषों की इमामत कर सकती है या नहीं, पुरुष महिला के पीछे नमाज पढ़ सकते हैं या नहीं इस मामले में हमे शरियत का पालन करना चाहिए. कुरान की रोशनी में मुफ्ती हजरात क्या कहते हैं उसी को मानना चाहिए.”

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