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नंदीग्राम: जिसे ममता बनर्जी मानती हैं भाग्यशाली, यहीं से शुरू हुआ था वाम सत्ता का पतन

नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर जिले में आता है. नंदीग्राम में मुस्लिम वोटर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर जिले में आता है. नंदीग्राम में मुस्लिम वोटर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

West Bengal Election: कहा जाता है कि नंदीग्राम (Nandigram) ने ममता को बंगाल की सत्ता दिलाने में नंदीग्राम का अहम रोल है. लेकिन यहां हुए भूमि अधिग्रहण आंदोलन में शुभेंदु अधिकारी ने बड़ी भूमिका निभाई थी.

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) के सियासी रण में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के योद्धाओं के नामों की घोषणा हो चुकी है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने हॉटसीट बनी नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला किया है. टीएमसी ने शुक्रवार को एक साथ 291 नामों का ऐलान कर दिया है. खास बात है कि चुनावी चर्चा की शुरुआत से ही कयास लगाए जा रहे थे कि बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ सकती हैं. उन्होंने खुद भी एक रैली के दौरान यह ऐलान कर दिया था. अब यह जानना भी जरूरी है कि आखिर भवानीपुर सीट से लड़ने वाली बनर्जी ने नंदीग्राम सीट का रुख क्यों किया?

वाम सत्ता को नंदीग्राम के सहारे खत्म किया
साल 2007 में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन जारी था. उस समय राज्य में वाम दल का शासन था. इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद ममता ने नंदीग्राम के जरिए ही बंगाल की सत्ता संभालने की तैयारी की थी. इस आंदोलन में पुलिस फायरिंग के चलते 14 प्रदर्शनकारी मारे गए थे. बड़ी संख्या में मौतों के बाद यह गांव मीडिया की सुर्खियां बन गया था.

कुछ समय पहले इस इलाके में रैली करने पहुंची ममता ने पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों के परिवारवालों के लिए पेंशन की घोषणा की थी. उन्होंने रैली के दौरान कहा था कि वे अपना नाम भूल सकती हैं, लेकिन नंदीग्राम का नाम नहीं भूल सकतीं. उन्होंने दावा किया था कि यह क्षेत्र टीएमसी के लिए भाग्यशाली है. वहीं, सीएम ने यहा जानकारी भी दी थी कि साल 2016 में उन्होंने यहीं से पहले टीएमसी उम्मीदवार का ऐलान किया था.
सीट क्यों है चर्चा में


बीते लोकसभा चुनावों में राज्य में भारतीय जनता पार्टी ने ठीक प्रदर्शन किया था, लेकिन दक्षिण बंगाल और झारखंड से सटे इलाकों में पार्टी खास कमाल नहीं कर सकी थी. हालांकि, जानकारी इसकी वजह बताते हैं कि बीजेपी के पास बड़ा नेता नहीं था. अब जब टीएमसी के दिग्गज शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के साथ आ चुके हैं, तो बीजेपी को कुछ उम्मीद बंधी है, लेकिन ममता के चुनावी मैदान में उतरने से नंदीग्राम की सीट पर जीत पाना भगवा दल के लिए भी मेहनत का काम होगा.

सीट का जाति एंगल
नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर जिले में आता है. नंदीग्राम में मुस्लिम वोटर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. 2011 का सेंसस बताता है कि नंदीग्राम कस्बे के ब्लॉक-1 में 34, ब्लॉक-2 में 12.1 और ब्लॉक-3 में 40.3 प्रतिशत थे. हालांकि, 10 साल में इन आंकड़ों में इजाफा हुआ होगा. वहीं, पिछले चुनाव भी क्षेत्र में मुस्लिम भूमिका को काफी बड़ा बताते हैं. 2011 विधानसभा चुनावों में टीएमसी के मुस्लिम उम्मीदवार की जीत हुई थी. जबकि 2016 में टीएमसी का वोट प्रतिशत बढ़ गया था. उस समय शुभेंदु अधिकारी यहां से चुनाव लड़ रहे थे.

नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी की भूमिका
कहा जाता है कि नंदीग्राम ने ममता को बंगाल की सत्ता दिलाने में नंदीग्राम का अहम रोल है. लेकिन यहां हुए भूमि अधिग्रहण आंदोलन में शुभेंदु अधिकारी ने बड़ी भूमिका निभाई थी. बीजेपी में शामिल होने के बाद हो सकता है कि अधिकारी नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ें. हालांकि, तमाम तथ्यों के अलावा सीएम ममता की पारंपरिक भवानीपुर सीट पर भी बीजेपी की नजरें हैं. भगवा दल के कई दिग्गज यहां अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं.
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