Narada Sting Case : TMC नेताओं की गिरफ्तारी पर भड़के अभिषेक सिंघवी, कहा-'जो BJP में गए वो हो गए निर्दोष?'

बंगाल में मंत्रियों की गिरफ्तारी पर कांग्रेस नेता ने BJP पर निशाना साधा.

नारदा स्टिंग केस को लेकर बंगाल के दो मंत्रियों की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस के नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी लगातार ट्वीट कर रहे हैं. उन्होंने CBI के इस कदम को बीजेपी की ओर से हो रही है बदले की राजनीति करार दिया है.

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    नई दिल्ली. नारदा स्टिंग मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने जब से ममता बनर्जी सरकार के 2 बड़े मंत्रियों समेत टीएमसी के 3 नेताओं की गिरफ्तारी की है, तब से पश्चिम बंगाल में सियासी माहौल गरमा गया है. पश्चिम बंगाल के मंत्री फ़िरहाद हाकिम और सुब्रत मुखर्जी की गिरफ़्तारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सीबीआई दफ्तर पहुंच गईं और खुद को गिरफ्तार करने की चुनौती दे डाली. अब बंगाल के इस सियासी बवाल पर कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने CBI की मंशा पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा है कि यह स्पीकर के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है.

    ट्विटर पर BJP को आड़े हाथों ले रहे हैं सिंघवी
    गिरफ्तारियों को लेकर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि आखिर अचानक गिरफ्तारी करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? उन्होंने इसे बीजेपी का सियासत से प्रेरित कदम बताते हुए कहा कि नारदा रिश्वत कांड के स्टिंग में - मुकुल रॉय, सुब्रत मुखर्जी, शुभेंदु अधिकारी, फिरहद हाकिम, शंकुदेब पांडा और मदन मित्रा शामिल थे. फिर भी मामले में गिरफ्तारी उनकी हुई है जो टीएमसी में हैं. जिन्होंने बीजेपी ज्वाइन की उनका इतिहास इतनी तेजी से साफ हुआ है, जितनी तेजी से अफरोज शाह (वकील और सामाजिक कार्यकर्ता) समुद्र के किनारे की गंदगी भी नहीं साफ कर पाते.







    राज्यपाल के रवैये पर भी उठाए सवाल
    अभिषेक सिंघवी ने लिखा है कि नारदा रिश्वत केस के स्टिंग का मामला सुप्रीम कोर्ट में है, ऐसे में दो गिरफ्तारियों की क्या जरूरत थी? सिंघवी ने राज्यपाल के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए लिखा है - 'इस पर गंभीर संदेह है कि राज्यपाल, जिनका पक्षपातपूर्ण रवैया साफ है, उनके पास जांच को मंजूरी देने की शक्ति है. 2016 में टेप आने के पांच साल बाद क्यों सैंक्शन करना और फिर अचानक 2021 में गिरफ्तारी क्यों? चुनावों में हारने की वजह से? बदला लेने के लिए? चुनाव का नतीजा बदलने के लिए?'





    क्या है नारदा स्टिंग केस?
    बंगाल में साल 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप सार्वजनिक हुए थे. इन स्टिंग्स में टीएमसी के मंत्री, सांसद और विधायक की तरह दिखने वाले व्यक्तियों को कंपनी के प्रतिनिधियों से रुपये लेते दिखाया गया था. स्टिंग ऑपरेशन कथित तौर पर नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था. स्टिंग्स सामने आने के बाद राज्य में खूब बवाल मचा. मामला हाई कोर्ट पहुंचा. जिसके बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई. तभी स्टिंग में ही फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी का नाम सामने आया था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी इसे राजनीतिक साज़िश करार देती रही है. उनका आरोप है कि इस स्टिंग वीडियो को बीजेपी के दफ्तर से जारी किया गया था.