मोदी-शाह के चहेते रहे हैं नड्डा, इन खूबियों की वजह से बने BJP के कार्यकारी अध्यक्ष

हिमाचल प्रदेश के लो-प्रोफाइल नेता माने जाने वाले जेपी नड्डा को साल 2014 के चुनाव के बाद केंद्र की मोदी सरकार में पहली बार बड़ा पद मिला. 58 साल के नड्डा पीएम मोदी और अमित शाह दोनों के काफी करीबी हैं. उन्हें आरएसएस का समर्थन भी हासिल है.

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Updated: June 18, 2019, 1:27 PM IST
मोदी-शाह के चहेते रहे हैं नड्डा, इन खूबियों की वजह से बने BJP के कार्यकारी अध्यक्ष
अमित शाह के साथ जेपी नड्डा (Twitter)
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Updated: June 18, 2019, 1:27 PM IST
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सीनियर नेता जेपी नड्डा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद इस बात को लेकर कयासों का दौर चल रहा था कि किसे अध्यक्ष कि जिम्मेदारी मिलनी चाहिए. पिछले मोदी सरकार में नड्डा को मंत्री पद मिला था, लेकिन इस बार 57 नेताओं वाली मंत्रिपरिषद की लिस्ट में उनका नाम नहीं था. ऐसे में चर्चाएं जोरों पर थी कि बीजेपी नड्डा को लेकर कुछ बड़ा प्लान कर रही है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार देर शाम जेपी नड्डा को बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की घोषणा की. नड्डा अगले छह महीने तक पार्टी अध्यक्ष की कमान संभालेंगे. इस दौरान दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. अमित शाह के साथ मिलकर ही जेपी नड्डा पार्टी का कामकाज देखेंगे.



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बीजेपी संसदीय बोर्ड में सोमवार को नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का फैसला हुआ. इस मीटिंग में राजनाथ ने कहा कि मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने कई चुनाव जीते हैं. लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत भी हासिल किया. लेकिन अब जबकि अमित शाह को मोदी कैबिनेट में गृह मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है, ऐसे में उनपर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाना चाहिए. पार्टी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी और को मिलनी चाहिए. राजनाथ सिंह ने ऐलान किया कि बीजेपी संसदीय बोर्ड ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष चुना है.



नड्डा क्यों बनाए गए बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष?
हिमाचल प्रदेश के लो-प्रोफाइल नेता माने जाने वाले जेपी नड्डा को साल 2014 के चुनाव के बाद केंद्र की मोदी सरकार में पहली बार बड़ा पद मिला. 58 साल के नड्डा पीएम मोदी और अमित शाह दोनों के काफी करीबी हैं. नड्डा के बारे में ऐसा कहा जाता है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का समर्थन भी हासिल है.
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राष्ट्रीय टीम में लाने का गडकरी को क्रेडिट
बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में नड्डा को लाने का श्रेय नितिन गडकरी को जाता है. 2010 में बतौर अध्यक्ष गडकरी ने नड्डा को राष्ट्रीय टीम में अहम जिम्मेदारी दी थी. उन्हें बीजेपी संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया गया, जो कि पार्टी में फैसले लेने वाली सबसे बड़ा संगठन है. 2019 के चुनाव के लिए नड्डा को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था. उनके प्रभारी रहते हुए बीजेपी ने राज्य में 62 सीटें जीती और प्रचंड बहुमत हासिल किया.

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गज़ब की नेतृत्व क्षमता
आरएसएस मैन कहे जाने वाले जेपी नड्डा में बेहतरीन तरीके से संगठन चलाना जानते हैं. उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के पीछे ये भी एक वजह रही. 2014 में नड्डा तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को रिप्लेस करने वाले थे, राजनाथ सिंह की भी यही इच्छा थी. लेकिन बाद में बीजेपी संसदीय बोर्ड ने नड्डा की जगह अमित शाह को पार्टी की कमान सौंप दी. हालांकि, नड्डा को इसका कोई नुकसान नहीं हुआ. 2014 के मोदी कैबिनेट में उन्हें जगह मिली.

जेपी नड्डा को काफी हद तक अमित शाह की तरह ही चुनाव प्रबंधन की रणनीति में माहिर माना जाता है. अमित शाह ने 2019 में पार्टी के लिए हर सीट पर 50 फीसदी वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा था. नड्डा ने यूपी में पार्टी को 49.6 फीसदी वोट दिलाने का कारनामा कर दिखाया.

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जेपी नड्डा के सामने ये चुनौतियां
कार्यकारी अध्यक्ष बनने के साथ ही जेपी नड्डा के सामने कई चुनौतियां हैं. अगले तीन महीनों के बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने है. इन राज्यों में बीजेपी की सरकार है. इसके अलावा साल के आखिर तक जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा चुनाव है. बीजेपी इन राज्यों में अपने अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष के नेतृत्व में चुनावी रण में उतरेगी. इसके साथ ही 7 महीने बाद दिल्ली का विधानसभा चुनाव है, जिसमें जीत हासिल कर नड्डा खुद को साबित करना जरूर चाहेंगे.

कौन हैं नड्डा?
हिमाचल प्रदेश के एक ब्राह्मण परिवार से आने वाले जेपी नड्डा पार्टी के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. नड्डा भाजपा की पितृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विश्वसनीय चेहरा माने जाते हैं. नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री रहे 58 साल के नड्डा अपनी लो-प्रोफाइल को बनाए रखने की वजह से कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर चुने गए हैं. अब पार्टी और सरकार के बीच सामंजस्य बनाकर काम करेंगे और अमित शाह के एजेंडा को आगे लेकर जाएंगे.

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