20वें वर्ष में प्रवेश करते हुए लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेता के रूप में नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi)

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात पूरे देश के सामने एक उदाहरण बन कर सामने आया. राज्य के कायापलट ने देश और दुनिया के कोने कोने में मौजुद भारतीय समुदाय के मन मे उम्मीद की एक किरण जगा गया. खासकर तब जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर पॉलिसी पैरालिसिस का आरोप लगने लगा था. गुजरात के विकास का मॉडल अब लोगों की उम्मीदें बढाने लगा था.

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  • Last Updated: October 8, 2020, 12:13 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की एक चुने हुए सरकार के मुखिया के रूप में यात्रा ठीक 20 वर्ष पूर्व आज ही के दिन यानि 7 अकटूबर को शुरू हुई थी. वो दौर गुजरात के लिए एक बहुत ही कठिन दौर था, जब भुज में आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी और पूरे गुजरात को झकझोर कर रख दिया था. ऐसे मुश्किल हालात में नरेन्द्र मोदी ने गुजरात की कमान संभाली थी. पार्टी का एक बड़ा गुट उनके समर्थन में नहीं था. नौकरशाहों को काबू में करना खासा मुश्किल काम हुआ करता था. लेकिन एक ही नारे के साथ उन्होने गुजरात की सत्ता संभाल ली. वो नारा था- 5 करोड  गुजरात की जनता का हित और राज्य का विकास. बाधाएं आयीं, लेकिन जनहित के लिए जो संकल्प उन्होने लिया उसके बाद अब तक पीछे मुड़कर नहीं देखा.

गुजरात में विकास का एक ऐसा दौर शुरू हुआ, जो सपना बनकर बाद में देश के एक सौ तीस करोड़ लोगों की आंखों में भी बस गया. अपने और अपनी सरकार के खिलाफ की जाती रही साजिशों और बेबुनियाद विवादों से वे कभी हतोत्साहित नहीं हुए. उनके कार्य और उनकी उपलब्धियों हमेशा उनके पक्ष में बोलती रहीं. एक और जहां नरेन्द्र मोदी ने मुश्किल से मुश्किल दौर में आगे बढ कर राहत कार्यों में नेतृत्व दिया जिसे फ्रंट से लीड करना कहते हैं तो दूसरी तरफ गुजरात में मैन्यूफैक्चरिंग बेस बढ़ाना, कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक अभियान की शुरुआत करनी हो या फिर विश्वस्तरीय शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की पहल- विकास का कोई भी पक्ष सुशासन के उनके मंत्र और उनकी पैनी नजर से अछूता नहीं रहा.

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात पूरे देश के सामने एक उदाहरण बन कर सामने आया. राज्य के कायापलट ने देश और दुनिया के कोने कोने में मौजुद भारतीय समुदाय के मन मे उम्मीद की एक किरण जगा दी. खासकर तब जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर पॉलिसी पैरालिसिस का आरोप लगने लगा था. गुजरात के विकास का मॉडल अब लोगों की उम्मीदें बढाने लगा था. साथ ही मोदी के नेतृत्व में गुजरात न्यू इंडिया की आकांक्षाओं को भी प्रतिबिंबित करने लगा. नरेन्द्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व की मांग देश भर से उठने लगी. वे एक ऐसे नेता के रुप में उभरने लगे थे जिनपर देश की युवाओं के सपने टिके थे. देश वासियों और बीजेपी कार्यकर्ताओं की इन्ही उम्मीदों को देखते हुए 2013 में प्रयागराज के महाकुंभ में पहुंचे संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को भी स्थिति साफ करना पड़ी. भागवत ने कहा कि जो देश के जन जन की भावना है वो उनकी भी भावना है.



इसके बाद ही उनके पीएम पद के उम्मीदवार बनने का रास्ता साफ हो गया था. रुकावटें फिर भी आयीं. आडवाणी समेत शईर्ष नेताओं ने रोकने की कोशिश भी की. लेकिन जनभावना के आगे किसी की नहीं चली. आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें 2013 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया. गुजरात के विकास मॉडल से होते हुए 21वीं सदी के नए भारत के विकास मॉडल को लेकर नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना को मिला अपार जन समर्थन 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के रूप में सामने आया. 2014 में एक नए भारत का उदय हुआ, पहली बार पूर्ण बहुमत की गैर कांग्रेसी सरकार सत्ता में आयी.
सत्ता में आते ही एक प्रधान सेवक के रूप में श्री नरेन्द्र मोदी ने गरीबों, पीड़ितों, वंचितों और शोषितों के प्रति अपने समर्पण भाव को प्राथमिकता दी. जन धन योजना, मुद्रा योजना, जन सुरक्षा योजना, उज्वला योजना, उजाला योजना, प्रधान मंत्री आवास योजना, सौभाग्य योजना, BHIM-UPI योजना, आयुष्मान भारत एवं पीएम-किसान जैसे जन कल्याण कार्यक्रमों ने भारत की तस्वीर बादल दी | गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करते हुए वे भारतीय संविधान के आदर्शों के प्रति समर्पित रहे. कोरोना काल में भी प्रवासी मजदूरों के रोजगार, उनके खाने पीने, उनके खातों में पैसा पहुंचाना, स्ट्रीट वेंडरों के लिए योजना, जन धन में महिलाओं के खातों में पैसा जाना यानि कुल मिला कर गरीबों की मुश्किल दूर करने की चिंता में पीएम मोदी 24/7 लगे रहे.
भारतीय संस्कृति और अनेकता में एकता के मंत्र को समाहित करते हुए वे हमेशा ही राष्ट्रहित के प्रति कटिबद्ध रहे. किसी भी चुनौती के लिए हमेशा तैयार रहने वाले श्री मोदी ने भारत की छवि को बेहतर बनाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी. अपने कुशल नेतृत्व क्षमता से वे एक वैश्विक नेता के रूप में सामने आए ही, भारत को भी विश्व गुरु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया. भारत में जारी आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़े जन आंदोलनों की वजह से आज देश सभी मोर्चों पर खुद को समर्थ और सुरक्षित महसूस करता है. ये पीएम मोदी की ही खासियत है कि स्वच्छता अभियान, हर घर - नल, जैसी योजनाओं को जनआंदोलनों में बदल देते हैं.

सरकारी सूत्रों की मानना है कि आज भी नरेन्द्र मोदी लोगों के लिए भरोसे का दूसरा नाम है. जब-जब कोई मुसीबत सामने आती है, गरीबों के साथ उनकी बॉन्डिंग और बढ़ जाती है. और वो उनसे सीधा संवाद करने से नहीं चूकते. कौन जानता था की रेडियो का इतना जबरदस्त इस्तेमाल कर कोई नेता जन जन तक पहुंच जाएगा. पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम इस सफलता का ही एक उदाहरण है. बीजेपी और सरकार के आत्मविश्वास की यही वजह है कि उनके पास एक ऐसा नेतृत्व है जो बिना रुके और बिना थके, आम आदमी की भलाई में लगा है. गरीबों तक सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने में पीएम मोदी मोदी ने जो कुछ किया है, वो शायद ही कोई दूसरा प्रधानमंत्री अब तक कर पाया है.

यही वो जन-भावना और भरोसा है जिसकी वजह से पीएम मोदी को 2019 में पहले से कहीं ज्यादा बहुमत प्राप्त हुआ है. अब पीएम मोदी लगे हैं अपने न्यू इंडिया के सपने को साकार करने मैं. हालांकि, मंजिल अभी दूर है लेकिन सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के साथ पीएम मोदी को भरोसा है कि न्यू इंडिया के निर्माण की यात्रा पूरी कर लेंगे.
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