मोदी लहर में हारा विपक्ष का वंशवाद, लालू, हुड्डा और चौटाला परिवार की बेटा-बेटी पॉलिटिक्स खारिज!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 29, 2019, 10:51 AM IST
मोदी लहर में हारा विपक्ष का वंशवाद, लालू, हुड्डा और चौटाला परिवार की बेटा-बेटी पॉलिटिक्स खारिज!
वंशवाद पर नरेंद्र मोदी के प्रहार से राजनीति के ‘नामदारों’ को जनता ने कर दिया खारिज, बेटा-बेटी पॉलिटिक्स और सियासी परिवारों को क्यों नकार रहे वोटर!

वंशवाद पर नरेंद्र मोदी के प्रहार से राजनीति के ‘नामदारों’ को जनता ने कर दिया खारिज, बेटा-बेटी पॉलिटिक्स और सियासी परिवारों को क्यों नकार रहे वोटर!

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लंबे समय से वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस, सपा और आरजेडी वाले यादव परिवार पर हमलावर रही है. नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दौर में बीजेपी ने परिवारवाद के खिलाफ अपने तेवर पहले से ज्यादा तल्ख किए हैं. 2019 के  लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस और मोदी  विरोधी पार्टियों के वंशवाद पर बीजेपी नेताओं ने जमकर प्रहार किए. खासतौर पर राहुल गांधी पर. दूसरी ओर, इससे बेपरवाह विपक्षी नेता अपने बेटे-बेटियों को टिकट देते या दिलाते रहे. कार्यकर्ता हाशिए पर रहे. ऐसे में वंशवादी सियासत के खिलाफ बीजेपी नकारात्मक माहौल बनाने में सफल रही और परिणाम आया तो बड़े-बड़े नाम भी धराशायी हो चुके थे.

अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पार्टी के बड़े नेताओं के बेटों को लेकर खफा हैं. क्योंकि ये नेता पूरे प्रदेश में ध्यान देने की बजाय सिर्फ अपने बेटों को जितवाने में जुटे रहे. इससे पार्टी की दुर्गति हुई. दरअसल, विपक्ष में वंशवाद का सबसे बड़े उदाहरण खुद राहुल गांधी हैं, जिन पर 'नामदार' के नाम से पीएम नरेंद्र मोदी पूरे चुनाव में प्रहार करते रहे और राहुल खुद अपने सबसे बड़े गढ़ अमेठी से चुनाव हार गए. (ये भी पढ़ें: इन योजनाओं ने जीता वोटर्स का दिल, इसलिए हुई बीजेपी की इतनी बड़ी जीत! )

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राजनीतिक विश्लेषक टीपी शाही कहते हैं, राजनीतिक राजवाड़ों से नई पीढ़ी के वोटर का मोहभंग हो गया है. वो किसी का साम्राज्य देखकर वोट नहीं करता. कुछ राजनीतिक परिवार लोकतंत्र में खास तरह का ‘राजतंत्र’ चला रहे थे. जो आज के वोटर को स्वीकार नहीं है. चुनाव आने पर नए जमाने के ये राजा पहले अपने परिवार को टिकट देते थे, उनसे बचता तब कार्यकर्ता का नंबर आता था. जब वे सत्ता में होते तो सारे बड़े पद अपने परिवार को देते थे, जो बचता था वो कार्यकर्ता को मिलता था. इसलिए ऐसे दलों को जनता भी नकार रही है और उनके कोर वोटर भी. जिन जातियों के नाम पर ये ‘राजनीतिक रजवाड़े’ खड़े हुए उन जातियों ने भी उन्हें खारिज कर दिया. अब इन दलों के अंदर भी परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठने लगी है.

गहलौत का पुत्र मोह!

कहा जा रहा है कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलौत ने पूरा ध्यान जोधपुर में अपने बेटे वैभव गहलौत को जिताने में लगाया. बेटे के चक्कर में वो प्रदेश के दूसरे हिस्सों में ध्यान नहीं दे पाए. फिर भी वो बीजेपी के गजेंद्र सिंह शेखावत से बुरी तरह हार गए. अब इस बात पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गुस्से में हैं.

Narendra Modi Factor Washed Out Many Political Dynasty Family Hudda Mulayam Lalu Devilal Bansilal Bhajanlal-Lok Sabha Election 2019-dlop        वैभव गहलौत (File Photo)
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हुड्डा से छूटा जाटलैंड का गढ़

जाटलैंड रोहतक कांग्रेस और उसके वंशवाद दोनों का बड़ा गढ़ है. पहले यहां से स्वतंत्रता सेनानी रहे रणवीर सिंह हुड्डा दो बार सांसद बने. फिर उनके पुत्र भूपेंद्र हुड्डा ने भी चार बार यहां का प्रतिनिधित्व किया. भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा भी यहां से तीन बार सांसद रहे हैं. लेकिन आखिर जनता इस परिवार को ही कब तक चुनती. इस बार दीपेंद्र हुड्डा को बीजेपी के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा.

लगातार 10 साल तक हरियाणा के सीएम रहे भूपेंद्र हुड्डा ने सोनीपत से चुनाव लड़ा. लेकिन वहां बीजेपी के मौजूदा सांसद रमेश कौशिक के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा. कुल मिलाकर हरियाणा के सबसे बड़े कांग्रेसी परिवार को मोदी लहर में शून्य पर आउट होना पड़ा.

Narendra Modi Factor Washed Out Many Political Dynasty Family Hudda Mulayam Lalu Devilal Bansilal Bhajanlal-Lok Sabha Election 2019-dlop          भूपेंद्र हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा (File Photo)

भजनलाल, बंसीलाल के वंशज हारे

हरियाणा के सीएम रहे बंसीलाल की पौत्री और कांग्रेस नेत्री किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी को भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से हार मिली है. वो 2009 में यहां से कांग्रेस की सांसद रह चुकी हैं. लेकिन इस बार जनता ने नकार दिया.

हिसार सीट से पूर्व सीएम भजनलाल के पौत्र भव्य विश्नोई (कांग्रेस) को जनता ने नकारते हुए बीजेपी नेता के वंशवाद को स्वीकार कर लिया. यहां जाट नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे बिजेंद्र सिंह ने चुनाव जीता है.

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चौटाला परिवार के बुरे दिन!

अब आते हैं चौटाला परिवार पर. राजनीति में इस परिवार के बुरे दिन चल रहे हैं. यह परिवार पहले आपस में लड़ा. जिससे इनेलो से टूटकर जन नायक जनता पार्टी (जेजेपी) बनी. दोनों ने अपने परिवार के सदस्यों को मैदान में उतारा. लेकिन जीत किसी को नहीं मिली.

जेजेपी बनाने वाले दुष्यंत चौटाला हिसार से चुनाव हार गए, उनके छोटे भाई दिग्विजय चौटाला सोनीपत में हारे. जबकि अभय चौटाला के छोटे बेटे अर्जुन चौटाला इनेलो की टिकट पर कुरुक्षेत्र से हार गए.

Narendra Modi Factor Washed Out Many Political Dynasty Family Hudda Mulayam Lalu Devilal Bansilal Bhajanlal-Lok Sabha Election 2019-dlop        देवीलाल को नमन करते दुष्यंत चौटाला (File Photo)

मुलायम परिवार: कमजोर हुई पकड़!

यूपी पर नजर डालें तो सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद मुलायम सिंह यादव परिवार के कई दिग्गज हार गए. अखिलेश यादव ने अपनी आजमगढ़ सीट बचा ली लेकिन कन्नौज में उनकी पत्नी डिंपल यादव हार गईं. राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को हार का मुंह देखना पड़ा.

मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से जीते लेकिन मार्जिन कम हो गया. सपा से बगावत करके प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाने वाले अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव तो अपने सबसे बड़े गढ़ फिरोजाबाद से चुनाव हार गए.

अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को बदायूं से हारना पड़ा. हालांकि, यहां भी हिसार की तरह बीजेपी नेता का वंशवाद जीत गया. यहां यूपी के श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य ने चुनाव जीता. उधर, बिहार में लालू यादव की बेटी मीसा भारती चुनाव हार गईं.

Narendra Modi Factor Washed Out Many Political Dynasty Family Hudda Mulayam Lalu Devilal Bansilal Bhajanlal-Lok Sabha Election 2019-dlop       अखिलेश यादव जीते लेकिन डिंपल हार गईं (File Photo)

देवगौड़ा परिवार: दादा-पौत्र दोनों हारे

कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जेडीएस अध्यक्ष एचडी देवेगौड़ा को तुमकुर लोकसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा. देवगौड़ा के पौत्र निखिल को मांड्या सीट पर शिकस्त मिली. हालांकि, देवेगौड़ा के दूसरे पौत्र प्रवल रेवन्ना दादा की परंपरागत सीट हासन से जीतने में सफल रहे.

ऐसे हार गईं सीएम की बेटी

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी कलवकुंतला कविता को निजामाबाद लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी ने हराया. निजामाबाद सीट पर 178 किसानों सहित 185 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था. 2019 के लोकसभा चुनाव में किसी एक सीट पर यह सर्वाधिक है. यह रिकॉर्ड तेलंगाना सरकार के खिलाफ किसानों की नाराजगी से बना.

पास नहीं हुए पवार के पौत्र

दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के पौत्र पार्थ पवार महाराष्ट्र की मावल लोकसभा सीट से चुनाव हारे. पार्थ पवार पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे हैं. हालांकि, शरद पवार की पुत्री सुप्रिया सुले बारामती से जीतने में कामयाब रहीं. यह सीट इस परिवार का गढ़ मानी जाती है.

Narendra Modi Factor Washed Out Many Political Dynasty Family Hudda Mulayam Lalu Devilal Bansilal Bhajanlal-Lok Sabha Election 2019-dlop       मीसा भारती हारीं, आरजेडी जीरो पर (File Photo)

बड़े बीजेपी नेताओं के कांग्रेसी पुत्रों का हाल

राजस्थान की बाड़मेर सीट से पूर्व विदेश एवं रक्षा मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह को कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़कर हार का सामना करना पड़ा.  उधर, उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल सीट से पूर्व मुख्यमंत्री और इसी सीट से सांसद रहे भुवन चंद्र खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी भी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव हार गए.

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First published: May 29, 2019, 10:22 AM IST
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