चीन से तनाव के बीच आज होगा SCO सम्‍मेलन, PM मोदी-शी जिनपिंग होंगे आमने-सामने

बैठक में आमने सामने होंगे पीएम मोदी और शी जिनपिंग. (Pic- Reuters file)
बैठक में आमने सामने होंगे पीएम मोदी और शी जिनपिंग. (Pic- Reuters file)

इस एससीओ सम्मेलन (SCO Summit) में आतंकवाद के बढ़ते खतरे तथा कोरोना वायरस (Coronavirus) के अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव से निपटने के तरीकों जैसे कई विषयों पर चर्चा होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 10, 2020, 9:51 AM IST
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नई दिल्‍ली. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का डिजिटल सम्मेलन मंगलवार को होगा. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi jinping), रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और एससीओ सदस्य देशों के अन्य शीर्ष अधिकारी अनेक समसामयिक विषयों पर चर्चा करेंगे. इस सम्‍मेलन में पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी शामिल होंगे.

इस सम्मेलन में आतंकवाद के बढ़ते खतरे तथा कोरोना वायरस के अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव से निपटने के तरीकों जैसे कई विषयों पर चर्चा होगी. इस ऑनलाइन सम्मेलन के जरिए यह पहला मौका होगा जब पूर्वी लद्दाख पर गतिरोध के हालात बनने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग पहली बार आमने सामने होंगे.

वहीं, भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में लंबे समय से सैनिकों की वापसी को लेकर चल रही बातचीत में कामयाबी हासिल करने के लिये विशिष्ट प्रस्तावों पर चर्चा के वास्ते इस हफ्ते एक और दौर की सैन्य वार्ता कर सकते हैं. पूर्वी लद्दाख में करीब छह महीने से भी ज्यादा समय से दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं.



उन्होंने कहा कि शुक्रवार को कोर कमांडर स्तर की आठवें दौर की बातचीत में गतिरोध वाले विशिष्ट बिंदुओं से वापसी पर व्यापक चर्चा हुई और दोनों पक्ष इस सकारात्मक बातचीत को विस्तृत चर्चा के लिये अगले दौर में ले जाना चाहेंगे. एक सूत्र ने कहा, 'एक और दौर की बातचीत में इस हफ्ते प्रस्तावों पर चर्चा होने की उम्मीद है.' अगले दौर की वार्ता भी कोर कमांडर स्तर की होगी.



भारत और चीन की सेनाओं ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वार्ता स्पष्ट, गहन और सकारात्मक रही. बयान में कहा गया कि दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को गंभीरता से लागू करने और यह सुनिश्चित करने पर रजामंदी हुई कि सीमा पर तैनात बल संयम बरतें एवं गलतफहमी से बचें. पूर्वी लद्दाख के विभिन्न पहाड़ी इलाकों में करीब 50 हजार भारतीय सैनिक शून्य से भी नीचे तापमान में युद्ध की उच्चस्तरीय तैयारी के साथ तैनात हैं. दोनों पक्षों के बीच गतिरोध को खत्म करने के लिए हुई कई दौर की बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.
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