चंद्रयान-2 के बहाने भारत से करोड़ों कमाने की फिराक में था नासा

नासा (Nasa) ने चांद की तरह दिखने वाली मिट्टी देने के लिए भारत (India) से एक हजार रुपये प्रति किलो की मांग की थी. भारतीय वैज्ञानिकों को चांद की सतह का अध्ययन करने के लिए 60 से 70 टन मिट्टी की जरूरत थी.

News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 1:43 AM IST
चंद्रयान-2 के बहाने भारत से करोड़ों कमाने की फिराक में था नासा
चंद्रयान-2 के बहाने भारत से करोड़ों कमाने की फिराक में था नासा
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Updated: September 7, 2019, 1:43 AM IST
इसरो (ISRO) के मून मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) को सफल बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने काफी मेहनत की है. इसरो ने अपने विक्रम लैंडर को सफलतापूर्वक चांद (Mission Moon) की सतह पर उतारने के लिए पहले जमीन पर चांद जैसी सतह तैयार की थी. इस सतह को बनाने के लिए इसरो को चांद जैसी मिट्टी की जरूरत थी. इसरो ने चांद की तरह दिखने वाली मिट्टी के लिए जब नासा से बात की तो उसने मिट्टी देने के बहाने भारत से करोड़ों रुपये की मांग कर डाली. इसके बाद भारत के वैज्ञानिकों ने मात्र 12 लाख रुपये में ऐसा काम कर दिखाया, जिसके बाद चंद्रयान-2 को सफल बनाने में मदद मिली.

इसरो के वैज्ञानिकों को चांद की सतह के बारे में अध्ययन करने के लिए चंद्रमा के जैसी मिट्टी की जरूरत थी. इस तरह की मिट्टी नासा के पास मौजूद थी. नासा ने चांद की तरह दिखने वाली मिट्टी देने के लिए भारत से एक हजार रुपये प्रति किलो की मांग की थी. भारतीय वैज्ञानिकों को चांद की सतह का अध्ययन करने के लिए 60 से 70 टन मिट्टी की जरूरत थी. नासा इस मिट्टी को देने के बदले भारत से करोड़ों रुपये कमाना चाहता था लेकिन इसरो ने इसका सस्ता रास्ता निकाल लिया.

भारतीय वैज्ञानिकों को पता चला कि तमिलनाडु के सीतमपोंडी और कुन्नामलाई गांव में एरोथोसाइट की चट्टानें हैं. इन चट्टानों की मिट्टी काफी हद तक चांद की मिट्टी से मिलती जुलती है. वैज्ञानिकों ने इस मिट्टी में थोड़ा बदलाव किया और उसे चांद की मिट्टी की तरह बना दिया. वैज्ञानिकों ने चांद के साउथ पोल के अध्ययन के लिए यहां की मिट्टी का बंगलूरू की प्रयोगशाला में परीक्षण किया था.

नकली चांद की सतह पर दौड़ा था लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान

इसरो ने लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को चांद पर सफलतापूर्वक उतारने के लिए मिट्टी से एक डिजाइन तैयार किया था जो काफी हद तक चांद की सतह जैसा दिखाई देता था. इस सतह पर लैंडर विक्रम को उतारा गया और रोबर प्रज्ञान को चलाया गया. इस मिट्टी को तैयार करने में इसरो के वैज्ञानिकों के लगभग 12 लाख रुपये खर्च हुए थे.

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First published: September 7, 2019, 1:43 AM IST
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