देश में रहने के लिहाज से सबसे बढ़िया शहर बेंगलुरु, टॉप 5 में भी जगह नहीं पाई दिल्ली- सर्वे

रहने योग्य शहरों की सूची में दिल्‍ली कई राज्‍यों की राजधानी से पीछे.

ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स 2020 (Ease of Living Index 2020) पर किसी भी राज्‍य की राजधानी को नंबर देने के लिए चार मापदंडों का उपयोग किया गया था. इसमें जिंदगी जीने के तरीका, कमाने की क्षमता, स्थिरता और नागरिकों की धारणा को मापदंड बनाया गया था.

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    नई दिल्ली. भारत की राजधानियां (Capital) उस राज्‍य के विकास को बताने के लिए एक संकेत की तरह हैं. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि किसी भी राज्‍य की राजधानी भारत (India) में रहने के लिए सबसे योग्‍य शहरों में से हैं. हालांकि इस रिपोर्ट में राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली (Delhi) कई राज्‍यों की राजधानी से पीछे नजर आती है. ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स 2020 (Ease of Living Index 2020) के अनुसार, दिल्ली इस लिस्‍ट में बेंगलुरु, चेन्नई, शिमला, भुवनेश्वर और मुंबई के बाद छठे स्थान पर है. हालांकि, इस सर्वे के दौरान जब वहां के नागरिकों से जानकारी ली गई तो उन्‍होंने दिल्‍ली को भारत की सबसे खराब राजधानी के रूप में स्‍थान दिया.

    सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स पर किसी भी राज्‍य की राजधानी को नंबर देने के लिए चार मापदंडों का उपयोग किया गया था. इसमें जिंदगी जीने के तरीका, कमाने की क्षमता, स्थिरता और नागरिकों की धारणा को मापदंड बनाया गया था. शहरों को 100 में से सभी चार मापदंडों पर स्कोर दिया गया था. दिल्ली को पहले तीन मापदंडों पर 50 और 60 के बीच और नागरिकों की धारणा सर्वेक्षण पर 69.4 के बीच अंक हासिल हुए. इसकी तुलना में भुवनेश्वर को नागरिकों की धारणा स्कोर 94.8 और जयपुर को 87.1 अंक हासिल हुए.

    बेंगलुरु को समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ शहर के रूप में स्थान दिया गया, उसके बाद चेन्नई का स्थान रहा. सीएसई की रिपोर्ट में कहा गया है, केवल बेंगलुरु को कमाने की क्षमता के लिहाज से बेहतर माना जा सकता. सर्वे में बेंगलुरु को 100 में से 78.8 अंक दिए गए हैं. इसके अलावा चार अन्य राज्य की राजधानियां (चेन्नई, मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद) कमाने के लिहाज से मध्‍यम वर्ग में रखा गया है. बाकी सभी को 100 में से 30 से भी कम अंक हासिल हुए हैं.

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    सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि भारतीय शहरों के मामले में आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि उनमें विकास की दिशा अस्थिर है. सभी राज्‍यों और उनके शहरों को विकसित और स्‍मार्ट बनने के लिए अभी लंबा सफर तय करने की जरूरत है. राज्यों की राजधानियों की तुलना में देश की राजधानी दिल्ली को अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है.

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