ICMR से राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अपील, कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज से जुड़े दिशानिर्देश शेयर करें

बाल आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि आपसे आग्रह किया जाता कि आप कोरोना संक्रमित बच्चों के उपचार एवं क्लीनिकल प्रबंधन से जुड़े प्रोटोकॉल/दिशानिर्देश आयोग के साथ साझा करें.
(सांकेतिक तस्वीर)

बाल आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि आपसे आग्रह किया जाता कि आप कोरोना संक्रमित बच्चों के उपचार एवं क्लीनिकल प्रबंधन से जुड़े प्रोटोकॉल/दिशानिर्देश आयोग के साथ साझा करें. (सांकेतिक तस्वीर)

Coronavirus Third Wave: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कोरोना महामारी को लेकर के डीजी आईसीएमआर को एक चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में आईसीएमआर से बच्चों में कोरोना महामारी और इसके इलाज व आईसीएमआर द्वारा तय की गई गाइडलाइन और क्लीनिकल मैनेजमेंट के बारे में जानकारी मांगी गई है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस की दूसरी लहर (Coronavirus Second Wave) के बीच कई तरह की स्वास्थ्य किल्लतों का सामना करना पड़ रहा है. दूसरी लहर का कहर अभी समाप्त भी नहीं हुआ है कि विशेषज्ञों ने तीसरी लहर की चेतावनी दे दी है. विशेषज्ञों द्वारा लगातार कोरोना महामारी की तीसरी लहर के भारत में आने और इससे सबसे अधिक बच्चों (Coronavirus Affected kids) के प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग अपनी तैयारियों में जुट गया है. इसको लेकर के राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न मंत्रालयों को चिट्ठी भी लिखी है.

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कोरोना महामारी को लेकर के डीजी आईसीएमआर को एक चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में आईसीएमआर से बच्चों में कोरोना महामारी और इसके इलाज व आईसीएमआर द्वारा तय की गई गाइडलाइन और क्लीनिकल मैनेजमेंट के बारे में जानकारी मांगी गई है. आयोग का मानना है कि इससे बच्चों में कोरोना महामारी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा.

केंद्र और राज्य के स्वास्थ्य सचिव को भी लिखी चिट्ठी

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों को भी चिट्ठी लिखकर के राज्य में बच्चों के बारे में जानकारी मांगी है. आयोग ने अपनी चिट्ठी का जवाब देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को 7 दिन का समय दिया है.

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गौरतलब है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग संवैधानिक संस्था है जिसका गठन कमीशन फॉर प्रोटक्शन आफ चाइल्ड राइट्स एक्ट 2005 के तहत किया गया है. प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ओफ्फेन्स (POCSO Act) जूविनाइल जस्टिस एंड केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन एक्ट 2015 और राइट टू फ्री एंड कंपल्सरी एडुकेशन (RTE) ऐक्ट 2005 के तहत भी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को विभिन्न जिम्मेदारियां दी गई हैं.

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