14 महीने बाद रिहा हुईं महबूबा तो मिलने पहुंचे फारूक और उमर, क्या बनेगा नया गठबंधन

अब्दुल्ला पिता-पुत्र ने इस मुलाकात को गैरराजनीतिक कहा है.
अब्दुल्ला पिता-पुत्र ने इस मुलाकात को गैरराजनीतिक कहा है.

महबूबा मुफ्ती को 14 महीने की हिरासत के बाद बाद मंगलवार को रिहा किया गया था. बीते साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को संघशासित प्रदेश घोषित किए जाने के बाद से ही महबूबा मुफ्ती हिरासत में थीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 6:02 PM IST
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नई दिल्ली. नेशनल कान्फ्रेंस के नेता फारूक (Farooq Abdullah) और उमर अब्दुल्ला
(Omar Abdullah)  ने पीडीपी नेता और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) से मुलाकात की है. महबूबा मुफ्ती को 14 महीने की हिरासत के बाद बाद मंगलवार को रिहा किया गया था. बीते साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को संघशासित प्रदेश घोषित किए जाने के बाद से ही महबूबा मुफ्ती हिरासत में थीं. नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के शीर्ष नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात के बाद तमाम अटकलों ने जोर पकड लिया है. ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि दोनों दल क्या भविष्य में साथ भी आ सकते हैं. हालांकि फिलहाल दोनों ही इस संभावना को नकार रहे हैं.

अब्दुल्ला पिता-पुत्र ने इस मुलाकात को गैरराजनीतिक करार दिया है. मुलाकात के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि ये सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात थी और इसके पीछ कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है. गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को संघशासित प्रदेश घोषित करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी को लेकर बड़ी बवाल हुआ था. तब संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने इस मसले पर जवाब दिया था. उन्होंने कहा था कि फारूक अब्दुल्ला को नजरबंद नहीं रखा गया है वो अपनी इच्छा से बाहर निकल सकते हैं.


जम्मू-कश्मीर को संघशासित प्रदेश घोषित किए एक साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी दोनों ने ही इस निर्णय का तगड़ा विरोध किया है. हाल ही में फारूक अब्दुल्ला के चीन संबंधी एक बयान को लेकर बवाल खड़ा हो गया है. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक अब्दुल्ला ने कहा था, ‘जहां तक चीन का सवाल है मैंने तो कभी चीन के राष्ट्रपति को यहां बुलाया नहीं. हमारे वजीर-ए-आजम (प्रधानमंत्री) ने उन्हें गुजरात में बुलाया...मगर उन्हें वह पंसद नहीं आया और उन्होंने आर्टिकल 370 को लेकर कहा कि हमें यह कबूल नहीं है. और जब तक आप आर्टिकल 370 को बहाल नहीं करेंगे, हम रुकने वाले नहीं हैं. अल्लाह करे कि उनके इस जोर से हमारे लोगों को मदद मिले और अनुच्छेद 370 और 35ए बहाल हो.’



इस पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने जवाब दिया, ‘एक तरह से फारूक अब्दुल्ला अपने इंटरव्यू में चीन की विस्तारवादी मानसिकता को न्यायोचित ठहराते हैं, वहीं दूसरी ओर एक देशद्रोही कमेंट करते हैं कि भविष्य में हमें अगर मौका मिला तो हम चीन के साथ मिलकर अनुच्छेद 370 वापस लाएंगे.’ उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पूर्व में दिए गए बयानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘राहुल गांधी और फारूक अब्दुल्ला में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है. दोनों ही एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.’
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