NFAI को मिला 162 फिल्मों का भंडार, 'बापू' की 6 घंटे की ऑरिजिनल डॉक्यूमेंट्री भी शामिल

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: September 13, 2017, 8:36 PM IST
NFAI को मिला 162 फिल्मों का भंडार, 'बापू' की 6 घंटे की ऑरिजिनल डॉक्यूमेंट्री भी शामिल
सितारा फिल्म का एक सीन.
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: September 13, 2017, 8:36 PM IST
नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया, पुणे को उसकी झोली में एक साथ 162 फिल्मों का भंडार मिला है. ये पिछले दिनों में फिल्म आर्काइव्स को मिला सबसे बड़ा खजाना है. इस खजाने की खास बात ये है कि इसमें विट्ठल भाई झवेरी की महात्मा गांधी पर बनायी गयी 6 घंटे की डॉक्यूमेंट्री फिल्म महात्मा भी शामिल है.

झवेरी महात्मा गांधी के सहयोगी होने के साथ-साथ एक फोटोग्राफर और फिल्ममेकर भी रहे हैं. इसलिए 6 घंटे की महात्मा नाम की इस डॉक्यूमेंट्री की ऑरिजिनल निगेटिव एक ऐसी अमूल्य धरोहर है जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में लोगों को और जानकारी देगी. इसे डिजिटलाईज करने और हमेशा के लिए सुरक्षित रखने का जिम्मा उठाया है एनएफएआई ने.

ये पूरा कलेक्शन आया है मुंबई की मशहूर सीने लैब से. एनएफआई के लिए खास बात ये है कि कुल 162 में से 125 फिल्में ऑरिजिनल या फिर ड्यूप निगेटिव के फॉर्म में मौजूद हैं यानि उस फॉर्मेट में नहीं जिसमें ये रिलीज हुईं. 44 फिल्में ब्लैक एंड व्हाइट हैं.

मजे की बात ये है कि एनएफएआई को बचाने के लिए 15 ऐसी फिल्में भी मिली हैं, जो कभी रिलीज ही नहीं हो पायीं. हिंदी फिल्मों के भंडार के साथ-साथ 34 गुजराती और 6 भोजपुरी फिल्में और कुछ नेपाली फिल्में भी फिल्म आर्काइव्स को मिली हैं. एनएफएआई इन फिल्मों को डिजिटलाईज कर इन्हें हमेशा के लिए सुरक्षित करने की मुहिम में लगा है.

इस कलेक्शन में एनएफएआई को कुछ ऐसी फिल्में हाथ लगी हैं जिनके प्रिंट उनके पास भी नहीं थे. इनमें से एक तो माला सिन्हा की 1960 की नेपाली फिल्म 'मैती घर' भी है. फिल्म को वीएस थापा ने बनाया था और इसका संगीत जयदेव ने दिया था. 1976 की हिंदी फिल्म 'फासला', 1957 की 'अमर सिंह राठौर' और 1973 की मराठी फिल्म 'आले तूफान दरियाला' के प्रिंट मिले हैं जो अब तक एनएफएआई के पास नहीं था.

इस कलेक्शन में 1939 की इजरा मीर की फिल्म 'सितारा', मणी कौल की 1969 की फिल्म 'उसकी रोटी', के ए अब्बास की 'सात हिंदुस्तानी' 1969, जो सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म थी, दिलीप कुमार की 1960 की फिल्म 'कोहिनूर', नर्गिस और राज कपूर की 1952 की फिल्म 'अंबर', 1959 की फिल्म 'पृथ्वीराज चौहान' शामिल हैं.

कोन इशीकावा की 1965 की मशहूर फिल्म 'टोक्यो ओलंपियाड' भी एनएफएआई को मिले कलेक्शन में शामिल है. इस फिल्म में 1964 में टोक्यो में हुए ओलंपिक खेलों को डॉक्यूमेंट किया गया था. मुंबई के सीने लैब को इस दान के लिए धन्य़वाद देते हुए एनएफएआई के डायरेक्टर प्रकाश मगदम ने कहा कि कुछ ऐसा ही भरोसा जताते हुए और भी फिल्ममेकर आगे आएं ताकि देश की फिल्मी विरासत को जिंदा रखने में ज्यादा से ज्यादा मदद मिले.

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First published: September 13, 2017
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