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इलाज में कमी से मरीज की मौत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने श्रम मंत्रालय को भेजा नोटिस

इलाज में कमी से मरीज की मौत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने श्रम मंत्रालय को भेजा नोटिस

मरीज की मौत पर मानवाधिकार आयोग ने श्रम मंत्रालय को नोटिस जारी किया है.  (फाइल फोटो)

मरीज की मौत पर मानवाधिकार आयोग ने श्रम मंत्रालय को नोटिस जारी किया है. (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक बयान में कहा कि उसने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है कि वह ईएसआई सुविधा के तहत चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मारे गये व्यक्ति के परिजनों के लिए दो लाख रुपये की मौद्रिक राहत की सिफारिश क्यों न करे? लापरवाही के कारण मरीज की जान चली गयी थी. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. एनएचआरसी ने कहा कि नोटिस मंत्रालय के सचिव को भेजा गया है और उन्हें मामले की जांच करने तथा पूर्ण ब्योरे के साथ एक रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है.

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    नयी दिल्ली. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक स्थानीय ईएसआई अस्पताल में कोरोना के एक संदिग्ध मरीज के इलाज में कथित चिकित्सकीय लापरवाही को लेकर केंद्रीय श्रम मंत्रालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. लापरवाही के कारण मरीज की जान चली गयी थी. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. एनएचआरसी ने कहा कि नोटिस मंत्रालय के सचिव को भेजा गया है और उन्हें मामले की जांच करने तथा पूर्ण ब्योरे के साथ एक रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है.

    आयोग ने एक बयान में कहा कि उसने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है कि वह ईएसआई सुविधा के तहत चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मारे गये व्यक्ति के परिजनों के लिए दो लाख रुपये की मौद्रिक राहत की सिफारिश क्यों न करे? शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल ने मरीज को समय पर ईएसआई से जुड़े निजी अस्पताल में भेजने की जहमत भी नहीं उठाई, जहां उन्हें बिस्तर और समय पर इलाज मिल पाता.

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    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके पिता गंभीर रूप से बीमार थे और उन्हें कोविड-19 संक्रमण का संदेह था. दिल्ली के झिलमिल इलाके में स्थित ईएसआई अस्पताल उन्हें आपातकालीन वार्ड में भर्ती किए बिना, या उपचार प्रदान किए बिना एक सरकारी अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर करता रहा. ईएसआई अस्‍पताल चाहता तो उन्‍हें संबंधित प्रायवेट अस्‍पताल में तत्‍काल भर्ती करा सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. यदि ऐसा होता तो प्रायवेट अस्‍पताल में उनकी देखभाल हो जाती और वे बच जाते.

    आयोग ने यह माना है कि समय पर इलाज न मिलने और बाद में मिले इलाज में हुई लापरवाही के इस काम ने भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 21 के तहत पीडि़त के स्‍वास्‍थ्‍य के अधिकार और जीवन के अधिकार का उल्‍लंघन किया. आयोग ने पाया कि लापरवाही के इस कृत्य ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत पीड़ित के स्वास्थ्य के अधिकार और जीवन के अधिकार का उल्लंघन किया है.  एनएचआरसी की वेबसाइट पर उपलब्ध मामले की कार्यवाही के अनुसार, मौत पिछले साल मई में प्रकाश अस्पताल में हुई थी.

    Tags: Ministry of Labor, National Human Rights Commission

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