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कैप्टन अमरिंदर के साथ कैसे शुरू हुआ था विवाद, जो आज राहुल-प्रियंका के द्वार आ पहुंचे सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू और अमरिंदर सिंह के बीच चल रहा है विवाद. (File pic)

नवजोत सिंह सिद्धू और अमरिंदर सिंह के बीच चल रहा है विवाद. (File pic)

Punjab Congress: कांग्रेस में सिद्धू और मख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर (Captain Amarinder Singh) के बीच विवाद इतना गहरा गया है कि कुछ कांग्रेस विधायक तो राहुल गांधी को मुलाकात के दौरान यह कह चुके हैं कि अब दोनों का एक नाव पर सवार होना आसान नहीं है.

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    चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान को लेकर नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) को कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली बुला लिया है. सिद्धू मंगलवार को राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) से मुलाकात करेंगे. कांग्रेस में सिद्धू और मख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर (Captain Amarinder Singh) के बीच विवाद इतना गहरा गया है कि कुछ कांग्रेस विधायक तो राहुल गांधी को मुलाकात के दौरान यह कह चुके हैं कि अब दोनों का एक नाव पर सवार होना आसान नहीं है. इस बीच हम आपको बताते हैं कि पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू में विवाद कैसे शुरू हुआ...

    2017 में ही कैप्टन के साथ हो गया था विवाद
    बात पंजाब में 2017 मार्च में हुए विधानसभा चुनाव (Assembly elections 2017) की है. इस दौरान भाजपा छोड़ चुके नवजोत सिंह सिद्धू राजनीति में नए विकल्प तलाश कर रहे थे. ऐसा कहा जाता है कि आम आदमी पार्टी से लेकर कई अन्य मोर्चों में शामिल होने के उनके पास कई विकल्प थे. कांग्रेस हाईकमान से भी इनकी बात चल रही थी. इसके बाद सिद्धू की चुनाव से करीब दो माह पहले जनवरी 2020 में कांग्रेस में धमाकेदार एंट्री हुई थी. चुनाव प्रचार के दौरान से ही यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अगर कांग्रेस सरकार बनती है तो उनका डिप्टी सीएम बनना तय है. ऐसा माना जा रहा था कि वे डिप्टी सीएम बनने की शर्त पर ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं. हालांकि कांग्रेस हाईकमान ने इस बात को कभी सार्वजनिक नहीं किया था.

    जब सिद्धू की डिप्टी सीएम बनने की उम्मीदों पर फिरा पानी
    चुनाव में कांग्रेस ने 117 में से 77 सीटें अप्रत्याशित रूप से जीतीं. कैप्टन अमरिंदर का सीएम बनना पहले से तय था और सिद्धू को डिप्टी सीएम बनाया जाना भी लगभग तय ही माना जा रहा था. सिद्धू भी इस बात को लेकर आश्वस्त थे. शपथ ग्रहण समारोह से पहले सिद्धू की उम्मीदों पर तब पानी फिर गया जब कैप्टन ने यह कहा कि पंजाब को डिप्टी सीएम की जरूरत ही क्या है. अलबत्ता सिद्धू को स्थानीय निकाय और पर्यटन मंत्रालय दे दिया गया. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिद्धू और कैप्टन के बीच टकराव की पहली सीढ़ी थी.

    पाक सेना प्रमुख कमर बाजवा के गले मिलने पर विवाद
    सरकार बनने के बाद करीब एक साल तक तो सब ठीक था. अगस्त 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जब सिद्धू को शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया तो कैप्टन इस बात के बिलकुल खिलाफ थे कि सिद्धू पाकिस्तान जाएं. वह इसके बावजूद पाकिस्तान चले गए और पाक सेना प्रमुख कमर बाजवा के गले मिलने के बाद वह विवादों से घिर गए उनकी पूरे देश में आलोचना हुई. इसके बाद कैप्टन ने यह भी कहा कि सिद्धू को अभी बातों की समझ नहीं है. इस घटनाक्रम के बाद सिद्धू और कैप्टन में मतभेद सामने आने लगे थे. इसके बाद नवंबर 2018 में तेलंगाना में चुनाव प्रचार के दौरान सिद्धू ने यह तक कह डाला "कौन कैप्टन" कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ही उनके कैप्टन हैं और अमरिंदर सिंह तो सेना के कैप्टन रहे हैं.

    2019 में पत्नी को टिकट न मिलने पर कैप्टन पर आरोप
    चुनाव में टिकट आवंटन को लेकर सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने आरोप लगाया कि कैप्टन और पंजाब मामलों की तत्कालीन पार्टी प्रभारी आशा कुमारी के कहने पर उनका टिकट काटा गया. बात यहीं नहीं थमी सिद्धू ने बेअदबी के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरा और कहा कि घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होती है तो वे इस्तीफा दे देंगे. कैप्टन ने आरोपों के जवाब में कहा कि सिद्धू महत्वाकांक्षी हैं और मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखते हैं. उन्हें पार्टी से बाहर किया जाना चाहिए. यह पहली बार था कि सिद्धू ने 2019 चुनाव प्रचार के दौरान ही बेअदबी के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया था.

    लोकसभा चुनाव में सिद्धू के सिर फोड़ा हार का ठीकरा
    2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पंजाब में 13 सीटों में से आठ सीटें जीती. बाकी सीटें हारने का ठीकरा सिद्धू के सिर पर फोड़ दिया. कैप्टन ने इस बहाने कई मंत्रियों सहित नवजोत सिंह सिद्धू के विभाग भी बदल दिए. उन्होंने सिद्धू को पावर मंत्रालय दिया नतीजतन जुलाई 2019 में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे.

    इस दौरान उन्होंने ‘जीतेगा पंजाब’ के नाम से एक यूट्यूब चैनल खोला जिसमें वह पंजाब से जुड़े हुए मुद्दों को उठाते रहे. बीते साल कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुए किसान आंदोलन के बाद वह सक्रिय राजनीति में वापस लौट आए और उन्होंने एक साथ कई मुद्दों को लेकर कैप्टन अमरिंदर के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.

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