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स्वदेशी विमान वाहत पोत IAC पर लगाया पैसा बर्बाद नहीं हो रहा, अब भारत को एयर पावर की जरूरत है : नौसेना प्रमुख

नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह ने कहा कि समुद्र में एयर पावर बहुत अधिक महत्वपूर्ण होती है. (फाइल फोटो)

नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह ने कहा कि समुद्र में एयर पावर बहुत अधिक महत्वपूर्ण होती है. (फाइल फोटो)

आईएसी विक्रांत (IAC Vikrant) की कीमत की बात करें तो इस पर करीब 23,000 करोड़ की लागत आई है और यह विमान वाहक 2022 के मध्य ...अधिक पढ़ें

    नई दिल्ली: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह (Admiral Karambir Singh) ने शुक्रवार को उन लोगों को करारा जवाब दिया जिन्होंने स्वदेशी विमान वाहक आईएसी ( Indigenous Aircraft Carrier IAC) का विरोध इस आधार पर किया कि यह पोत काफी मंहगा है. CNN-News18 के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि आईएसी पर लगाया गया पैसा बर्बाद नहीं हो रहा है. आईएसी विक्रांत भारतीय स्टील से बना हुआ है. यह अभी समुद्री परीक्षणों से गुजर रहा है और यह 76 प्रतिशत स्वदेशी है.

    उन्होंने कहा कि स्वदेशी विमान वाहक जैसी परियोजनाएं आधुनिक समय की मांग हैं और ऐसी परियोजनाओं से अर्थव्यवस्था में पैसा वापस आता है और इससे नए नए रोजगार के अवसर भी बनते हैं. उन्होंने कहा कि इसमें लगाया गया पैसा नाली में नहीं बह रहा है.

    भारतीय नौसेना में इस समय एक विमान वाहक पोत, आईएनएस विक्रमादित्य है. विक्रमादित्य इस समय मेंटीनेंस पर है. भारतीय नौसेना का यह पोत 40 साल का हो गया है. पोत जब मेंटिनेंस में होता है तब भारतीय सेना के पास एक भी विमानवाहक पोत नहीं होता. ऐसे में आईएसी विक्रांत के आने तक अगर एक पोत मेंटिनेंस में हुआ तो एक समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए हर समय मौजूद रहेगा.

    नौसेना तीसरे विमान वाहक की तैयारी में
    आईएसी विक्रांत की की कीमत की बात करें तो इसमें करीब 23,000 करोड़ की लागत आई है और यह विमान वाहक 2022 के मध्य तक चालू हो जाएगा. खबरों की मानें तो नौसेना अब तीसरे विमानवाहक आईएसी 2 की तैयारी में भी लगी हुई है, ताकि पूर्वी और पश्चिमी तट के लिए हर समय एक विमान वाहक पोत मौजूद रहे. बताया जा रहा है कि आईएसी 2 की अनुमानित लागत 80,0000-90,000 करोड़ रुपये होगी.

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    चीन की महत्वाकांक्षी योजना बड़ी चिंता
    नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह ने कहा कि समुद्र में एयर पावर बहुत अधिक महत्वपूर्ण होती है और यहां आज के हालात में एयर पावर को बढ़ाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि समुद्री लड़ाई में विमान वाहक पोत काफी महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में 13 नौसेनाओं द्वारा कुल 41 विमानवाहक पोत संचालित किए जाते हैं. इनमें से सबसे ज्यादा संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा 11, चीन के पास वर्तमान में 2 विमानवाहक पोत हैं, लेकिन उसकी विस्तारवादी महत्वाकांक्षी योजना एक बड़ी चिंता है. उन्होंने बताया कि चीन ने 2028 तक 4 और 2050 तक 10 विमानवाहक पोत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
    क्षमता के आधार पर बनानी होगी योजना
    जब नौसेना प्रमुख से यह पूछा गया कि क्या भारतीय नौसेना की विस्तारवादी सोच चीन के खतरे पर आधारित है तो उन्होंने कहा कि नौसेना में आपको हमेशा दूर की सोचनी पड़ती है. हमारा विस्तार समुद्री क्षमताओं के परिप्रेक्ष्य पर आधारित होता है. एडमिरल ने कहा कि हम उन क्षमताओं के लिए योजना बनाते हैं जो हमारे समुद्री हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं. उन्होंने कहा कि चुनौतियां हमेशा बदलती रहती हैं इसलिए आपको खतरों के बजाय क्षमता के आधार पर योजना बनानी होगी.

    Tags: India Navy, Malabar Exercise

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