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रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने इजराइली शहर में भारतीय नौसेना के पोत ने डाला लंगर

भाषा
Updated: September 29, 2018, 8:35 PM IST
रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने इजराइली शहर में भारतीय नौसेना के पोत ने डाला लंगर
प्रतीकात्मक फोटो

साल 1918 में मित्र राष्ट्रों की सेना का हिस्सा रही दो बहादुर भारतीय घुड़सवार रेजीमेंटों ने शहर को मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई थी. इसे इतिहास में घुड़सवार सैनिकों के अंतिम महत्वपूर्ण सफल अभियान के तौर पर याद किया जाता है.

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  • Last Updated: September 29, 2018, 8:35 PM IST
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भारत और इजराइल के बीच रक्षा संबंधों को और गहराई देने के उद्देश्य से भारतीय नौसेना का एक जहाज वहां के उत्तरी तटीय शहर हाइफा में चार दिन के लिए ठहरा है. हाल ही में ओटोमान सम्राज्य से अपनी आजादी के 100 साल का उत्सव यहां मनाया गया था. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इस शहर की रक्षा के लिए भारतीय सैनिकों ने अपनी जान की बाजी लगाई थी.

साल 1918 में मित्र राष्ट्रों की सेना का हिस्सा रही दो बहादुर भारतीय घुड़सवार रेजीमेंटों ने शहर को मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई थी. इसे इतिहास में घुड़सवार सैनिकों के अंतिम महत्वपूर्ण सफल अभियान के तौर पर याद किया जाता है.

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक भारतीय नौसैनिक पोत (आईएनएस) तरंगिनी 27 सितंबर को हाइफा बंदरगाह पर पहुंचा था और 30 सितंबर तक वहां रहेगा. इसके बाद यह पोत कोच्चि में दक्षिणी नौसेना कमान स्थित बेस के लिये रवाना हो जाएगा.

एक अधिकारी ने कहा, ‘यह दोनों देशों के बीच सहयोग की दिशा में एक और कदम है जिससे हमें एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है. भारतीय पोत अक्सर हाइफा के बंदरगाह पर ठहरते रहे हैं जिससे दोनों नौसेनाओं को बातचीत का मौका मिलता है.’

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First published: September 29, 2018, 8:35 PM IST
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