कोरोना महामारी से जंग के बाद अब वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए भी NCC कैडेट्स तैयार

एनसीसी ने सरकार की मदद के लिए कमर कसी. (Image: PIB/PTI)

एनसीसी ने सरकार की मदद के लिए कमर कसी. (Image: PIB/PTI)

Vaccination Program: कोरोना के चलते इस बार गणतंत्र दिवस परेड में एनसीसी कैडेट्स की भागीदारी कम दिखेगी. राजपथ में पिछले साल के मुक़ाबले आधे कैडेट्स मार्च करते नजर आएंगे. वहीं, कोरोना की लड़ाई के बाद वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए भी एनसीसी कैडेट पूरी तरह से तैयार हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 9:17 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश में जब भी कोई आपदा आती है तो उस वक्‍त एनसीसी (NCC) एक बड़े रोल में दिखाई देती है. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus) से निपटने के लिए जहां पूरे देश की सरकारी मशीनरी जुटी हुई थी, वहीं एनसीसी ने भी आगे आकर एक ऑपरेशन शुरू किया, जिसे 'एक्‍सरसाइज योगदान' का नाम दिया गया था. इसके तहत 1 अप्रैल 2020 से शुरू हुए इस अभ्यास में एक लाख चालीस हजार एनसीसी कैडेट्स और 21000 स्टाफ ने कोरोना वॉरियर्स की तरह काम किया. साथ ही, ट्रैफिक मैनेजमेंट से लेकर खाना बांटने में मदद की. खास बात ये है कि इस पूरे कार्रवाई में एक भी कैडेट संक्रमित नहीं हुआ.

एनसीसी के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल तरुण कुमार आइच ने साफ किया कि उनके कैडेटों ने कोरोना को लेकर भरपूर सहयोग दिया और अब टीकाकरण में भी वो मदद के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से कोई मदद की पेशकश नहीं आई है.

इस बार गणतंत्र दिवस समारोह पर भी दिखेगा कोरोना का असर

कोरोना के मद्देनज़र इस साल होने वाले गणतंत्र दिवस का समारोह हर लिहाज से अलग होने वाला है. देश भर से सैकड़ों की संख्या में दिल्ली पहुंचे NCC कैडेटों को भी कोरोना की विशेष गाइडलाइन के साथ अपनी तैयारी करनी पड़ रही है. एनसीसी रिपब्लिक डे परेड कैंप में इस बार कैडेटों की संख्या पिछले सालों के मुक़ाबले बिल्कुल आधी है. हर साल 2000 से ज़्यादा कैडेट इस कैंप में आते हैं लेकिन इस बार सिर्फ 1000 कैडेट को ही मौक़ा मिला है. राजपथ पर भी इस साल एनसीसी के सिर्फ 250 कैडेट को ही जाने का मौक़ा मिलेगा और बॉयज कैडेट और गर्ल्स कैडेट एक साथ मिक्स्ड फ़ार्मेशन में राजपथ तक क़दमताल करते दिखेंगे.
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तरुण कुमार ने कहा कि एनसीसी कैंप में कोरोना को लेकर जारी सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है. एनसीसी के प्रसार के लिए प्रधानमंत्री ने साफ किया था कि ज़्यादा से ज्यादा सीमावर्ती जिलों और तटीय इलाकों के छात्रों को भी मौक़ा दिया जाए और स्कूल कॉलेजों को एनसीसी के साथ जोड़ा जाए. पिछले कुछ समय में ये बहस भी शुरू हुई थी कि क्यों ना एनसीसी को सभी कॉलेज और स्कूलों में कंपलसरी कर दिया जाए. इस पर एनसीसी के डीजी ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो यह बहुत अच्छा होगा, मैं इसके पक्ष में हूं. इससे युवाओं में अनुशासन आएगा और देश को अच्छे नागरिक मिलेंगे. हालांकि इसका आर्थिक असर भी देखना होगा.

1962 के युद्ध के बाद एक साल के लिए एनसीसी को अनिवार्य किया गया था लेकिन फिर आर्थिक संसाधनों को देखते हुए इसे स्वैच्छिक किया गया. अभी देश भर में 50 लाख से ज्यादा एनसीसी कैंडेट्स हैं. 17 हजार स्कूल-कॉलेजों में एनसीसी है जबकि 9000 स्कूल-कॉलेज वेटिंग लिस्ट में हैं.
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