जानिए बाढ़ में कोरोना संक्रमण से बचकर कैसे NDRF करेगी लोगों की मदद

जानिए बाढ़ में कोरोना संक्रमण से बचकर कैसे NDRF करेगी लोगों की मदद
असम में बाढ़ में लोगों को बचा रही है एनडीआरएफ.

एनडीआरएफ (NDRF) के डीआईजी मनोज यादव के मुताबिक इसकी तैयारी पहले से चल रही थी और अलग-अलग एजेंसियों से विचार-विमर्श के बाद इन दिशानिर्देशों को तैयार किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 14, 2020, 10:41 AM IST
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नई दिल्‍ली. देश भर में बाढ़ (Flood) बचाव कार्य के दौरान कोरोना संक्रमण (Coronavirus) खतरे से बचने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) यानी नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स ने अपने जवानों के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं. इनका मकसद यही है कि इस दोहरे खतरे के बीच मुस्तैदी और सुरक्षित तरीके से मुसीबत में फंसी आम जनता को बचाया जा सके. बचाव के इस नए सुरक्षित तरीके की शुरुआत एनडीआरएफ ने असम बाढ़ में शुरू कर दी है.

असम में पिछले 1 हफ्ते से लगातार बारिश से बारपेटा, बागईगांव, बक्सा, कामरूप में बाढ़ के हालात उत्पन्न हो गए हैं. इन इलाकों में बाढ़ में फंसे आम लोगों को एनडीआरएफ के जवान पीपीई किट, प्रोटेक्टिव हेडगियर, मास्क और ग्लव्स पहनकर बचाते हुए दिखे. चारों ओर पानी से घिरे एक घर में सुरक्षा उपकरणों से लैंस एनडीआरएफ के जवान नाव से गए और पूरे परिवार को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला. बचाव की इस प्रक्रिया में कोरोना वायरस सेफ्टी प्रोटोकॉल का भी पालन किया गया जिसके तहत जब आम लोगों को नाव में बैठाया जा रहा था तो उस दौरान भी सोशल डिस्टेंसिंग और सुरक्षित तरीके से उन्हें छूने का खास ध्यान रखा गया. बचाव के इस तरीके को एनडीआरएफ अपने नए दिशानिर्देशों के मुताबिक ही कर रही है.

एनडीआरएफ के डीआईजी मनोज यादव के मुताबिक इसकी तैयारी पहले से चल रही थी और अलग-अलग एजेंसियों से विचार-विमर्श के बाद इन दिशानिर्देशों को तैयार किया गया है. संक्रमण किसी भी तरीके से आम जनता से फोर्स में न फैले और फोर्स से आम जनता में न फैले इस बात का खास ख्याल रखा जाएगा. कोरोनावायरस खतरे के बीच जब बाढ़ का भी खतरा हो तो संक्रमण का खतरा कहीं ज्यादा बढ़ जाता है ऐसे में आईसीएमआर की गाइडलाइंस के मुताबिक एसओपी यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर को तैयार किया गया है.



इन एसओपी के मुताबिक
- बचाव दल के हर एक सदस्य के पास कोविड किट होनी चाहिए जिसमें हैंड वाश साबुन , मास्क,ग्लव्स, हैंड सैनिटाइजर टिशु पेपर, दवा और पीपीई किट होना जरूरी होगा

- कोविड किट के अलावा बचाव दल के पास रेनकोट, फ्लड शू, टेंट का अतिरिक्त सामान और पर्याप्त मात्रा में प्लास्टिक शीट भी होगी.

- बचाव दल अपने साथ पर्याप्त संख्या में बोट ले जाएंगे ताकि एक ही बोट में ज्यादा भीड़ ना हो और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके

- अगर कोविड पेशेंट के लिए बचाव कार्य किया जा रहा है तो बचाव दल के पास शू कवर बायोलॉजिकल सूट फेस शील्ड आई प्रोटक्शन भी मौजूद रहेगा.

- बचाव कार्य करने वाली टीम के हर एक सदस्य की मेडिकल जांच होनी अनिवार्य होगी, उनकी उम्र 50 साल से कम होनी चाहिए.

- बचाव के लिए जाने से पहले एनडीआरएफ की टीम को उस इलाके की कोविड मैपिंग करना अनिवार्य होगा जिससे यह पता चल सके कि वहां कोरोना संक्रमण का घनत्व कितना है.

- बचाव कार्य शुरू करने से पहले कोविड नोडल आफिसर, स्थानीय मेडिकल सेंटर और अस्पतालों की सूची टीम के पास होना अनिवार्य होगा.

बचाव कार्य के अलावा बचाव से पहले भी जवानों को यात्रा के वक्त सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखना होगा, जहां वह ठहरे हैं वहां प्रशासनिक स्टाफ की भी मौजूदगी रहेगी जिससे उनका संपर्क बिल्कुल नहीं होगा. कैंप में इमरजेंसी के हालात से निपटने के लिए एक क्वॉरेंटाइन रूम भी जरूरी होगा. सारे जवानों को निर्देश दिए गए हैं कि बचाव के उपकरणों का नियमित सैनिटाइजेशन और समय-समय पर हाथ धोना भी अनिवार्य रहेगा. कोविड के लिए एनडीआरएफ ने यह अतिरिक्त आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं, जबकि उसके नियमित दिशा निर्देश नियम के मुताबिक लागू रहेंगे.
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