करीब 1100 रिहायशी स्कूलों-हॉस्टलों के बदले जाएंगे नाम, अब कहलाएंगे नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेजिडेंशियल स्कूल

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने ये फैसला किया है. (फाइल फोटो)

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने ये फैसला किया है. (फाइल फोटो)

शिक्षा मंत्रालय ने देश के 383 रिहायशी स्कूलों एवं 680 हॉस्टलों का नाम बदल कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेजिडेंशियल स्कूल (Netaji Subhas Chandra Bose residential schools) रखने का निर्णय लिया है. यह सभी विद्यालय शिक्षा मंत्रालय की समग्र शिक्षा योजना के तहत वित्तपोषित हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 5:01 PM IST
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अनूप गुप्ता

नई दिल्ली.
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (New Educational Policy) के तहत सभी को समावेशी एवं गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय ने देश के 383 रिहायशी स्कूलों एवं 680 हॉस्टलों का नाम बदल कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेजिडेंशियल स्कूल (Netaji Subhas Chandra Bose residential schools) रखने का निर्णय लिया है. यह सभी विद्यालय शिक्षा मंत्रालय की समग्र शिक्षा योजना के तहत वित्तपोषित हैं.

क्या बोले शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल 'निशंक'

मंत्रालय के इस निर्णय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने कहा, 'शिक्षा मंत्रालय ने कम आबादी वाले खासकर आदिवासी क्षेत्रों में जहां स्कूल खोलना मुश्किल है और उन शहरी बच्चों जिन्हें देखभाल की विशेष आवश्यकता है के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को आर्थिक सहायता प्रदान की है ताकि वो रिहायशी स्कूल एवं हॉस्टल खोल सकें. हमनें नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए यह निर्णय लिया है कि इन रिहायशी स्कूलों एवं हॉस्टलों का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेजिडेंशियल स्कूल रखा जाएगा.'
ये संस्थान कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए बनाए गए नियमों का पालन करेंगे

उन्होंने कहा कि देश भर में कुल 383 स्कूल एवं 680 हॉस्टलों का नाम बदला जाएगा. इसके अलावा यह सभी संस्थान कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए बनाए गए नियमों का पालन करेंगे और उनके जैसी गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए प्रयास करेंगे. डॉ निशंक ने कहा, 'नेताजी का नाम ना सिर्फ छात्रों बल्कि शिक्षकों, अन्य स्टाफ के सदस्यों को और स्कूलों के प्रशासन को गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगा.' इन सभी स्कूलों में नियमित करिकुलम के अलावा विशिष्ट कौशल प्रशिक्षण, सेल्फ-डिफेन्स, इत्यादि का प्रशिक्षण दिया जाएगा.
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