नेपाल ने भारत को कितनी गंभीर चुनौती दी है और कहां फेल हुई हमारी डिप्लोमेसी? पढ़ें पूरा मामला...

नेपाल ने भारत को कितनी गंभीर चुनौती दी है और कहां फेल हुई हमारी डिप्लोमेसी? पढ़ें पूरा मामला...
नेपाल ने भारत के तीन इलाके लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपने सीमा में दर्शा कर एक नया विवाद को जन्म दे दिया है.

सालों से भारत-नेपाल (India-Nepal Relations) भौगोलिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक रूप से एक दूसरे के काफी नजदीक रहे हैं. शनिवार को नेपाल के नक्शे में कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखा दिया गया है, जबकि तकरीबन 200 सालों से यह भारत का हिस्सा रहा है.

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नई दिल्ली. वर्षों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक रूप से जुड़े रहने वाले दो देश भारत-नेपाल (India-Nepal Relations) में नक्शे को लेकर तकरार शुरू हो गया है. नेपाल की प्रतिनिधि सभा (संसद) ने विवादित नक्शा से संबंधित संविधान संशोधन बिल पास कर दिया है. इस बिल के पास होने के बाद से अब भारत-नेपाल के संबंधों को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं. बता दें कि नेपाल ने भारत के तीन इलाके लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपने सीमा में दर्शा कर एक नया विवाद को जन्म दे दिया है. ऐसे में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का संबंध अब खत्म हो जाएगा? क्या नेपाल, चीन की गोद में जा कर बैठ गया है? बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती गावों में इसका क्या असर होगा? नेपाल ने आखिर क्यों पहली बार दोनों देशों के संबंध के उपर गोली चलाने का काम किया है? नेपाली की ये कार्रवाई का असर आगे और किन-किन मुद्दों पर देखा जाएगा?

भारत-नेपाल का संबंध कितना पुराना
सालों से भारत-नेपाल भौगोलिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक रूप से एक दूसरे के काफी नजदीक रहे हैं. शनिवार को नेपाल के नक्शे में कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखा दिया गया है, जबकि तकरीबन 200 सालों से यह भारत का हिस्सा रहा है. नेपाल के इस कदम के बाद जानकार आशंका जता रहे हैं कि भारत के खिलाफ चीन-पाकिस्तान-नेपाल का त्रिकोण बन सकता है.

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शनिवार को नेपाल के नक्शे में कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखा दिया गया है

क्या कहते हैं जानकार


वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय कहते हैं, 'भारत-नेपाल के रिश्ते में बड़ा बदलाव आ गया है. हमारा नेपाल से काफी पुराना संबंध रहा है. भारत-नेपाल का संबंध रोटी-बेटी का है. बिहार और यूपी के कई सीमावर्ती जिलों दोनों देशों शादी-व्याह का संबंध है. रही बात मौजूदा हालात की तो उसके पीछे चीन का हाथ साफ नजर आ रहा है. नेपाल पहले भी कुछ मौकों पर दबी जुबान में यह मुद्दा उठाता रहा है, लेकिन इस बार नेपाल ने भारत को खुली चुनौती दे दी है. इस घटना के पीछे सोची समझी रणनीति है. हमारी सरकार को यह माननी चाहिए कि इस समय नेपाल में भारतीय दूतावास का महत्व काफी घट गया है. भारतीय दूतावास की जगह अब चीनी दूतावास ने ले ली है. नेपाली नेताओं के बीच चीनी दूतावास दबदबा काफी बढ़ गया है, जबकि किसी जमाने में भारतीय दूतावास नेपाली नेताओं के आपसी विवाद को समझाने में अहम भूमिका निभाता था.'

पांडेय कहते हैं, 'भारतीय लीडरशीप और नौकरशाही को अभी तक यही लग रहा था कि नेपाल सिर्फ सप्लाई लाइन को लेकर ही नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भारत पर निर्भर है. इसलिए भारत के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले नेपाल सौ बार सोचेगा, लेकिन चीन ने नया दांव खेल फिलहाल तो बाजी पलट ही दी है.'

चीन कैसे नेपाल को साध रहा है?
पांडेय कहते हैं, 'इस घटनाक्रम में चीन का हाथ निश्चित तौर पर है. बीते कई सालों से नेपाल के अंदर चीनी घुसपैठ की योजना पर अमल शुरू हो गया था. हाल के दिनों में नेपाल के अंदर चीन ने आर्थिक निवेश जबरदस्त तरीके से किया है. आज नेपाल में चीन रेल लाइन से लेकर एयरपोर्ट डेवलप कर रहा है. चीन ने नेपाल को बेल्ट एंड रोड पहल में भी शामिल कर लिया है. चीन नेपाल में बिजली प्लांटों का भी निर्माण कार्य कर रहा है. चीन ने नेपाल को यह समझाने में काफी हद तक सफलता पा लिया कि उसकी हित चीन के साथ ही ज्यादा बेहतर और भविष्य के लिए अच्छा साबित होगा. हाल के दिनों में नेपाल के स्कूलों में चीनी भाषा मंदारिन की पढ़ाई शुरू हुई है. स्कूल में रखे गए शिक्षकों का खर्च भी चीन उठा रहा है. चीन नेपाल की सरकार को यह समझाने में कामयाब हो गया है कि चीनी भाषा सीखने के बाद नेपाली युवकों को रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे.'

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नेपाल 200 साल बाद 1816 की सुगौली की संधि के आधार पर इन इलाकों पर अपना दावा ठोक दिया है


भारत-नेपाल का संबंध अब और गिरेगा?
कुलमिलाकर भारत-नेपाल संबंध में गिरावट भारत के लिए चेतावनी है. लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी का मुद्दा बना कर नेपाल अब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत को बदनाम कर सकता है. नेपाल 200 साल बाद 1816 की सुगौली की संधि के आधार पर इन इलाकों पर अपना दावा ठोक दिया है, जबकि कालापानी इलाके में भारत का सैन्य पोस्ट पिछले कई दशकों से है.

जानकारों का मानना है कि नेपाल की संसद में नया नक्शा पास होने का यह कतई मतलब न निकाला जाए कि यह तीन इलाका नेपाल का हो जाएगा, लेकिन भारत की सरकार को अब विचार करना चाहिए कि आखिर चूक कहां हुई है? मनोवैज्ञानिक तौर पर नेपाल ने भारत को गंभीर चुनौती दी है. इससे यह भी साबित होता है कि चीन ने चुपके-चुपके भारत के उतरी इलाका में भी भारतीय दबदबे को चुनौती दे दी है. अगर समय रहते भारत ने इसे ठीक नहीं किया तो इसका गलत संदेश दूसरे पड़ोसी देशों के बीच भी जाएगा.

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