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नेस्ले की मैगी के बाद अब पास्ता पर खतरा, जांच में लेड ज्यादा मिला

Rejected pieces of fusilli pasta pass along the production line inside Barilla Holding SpA's pasta factory in Parma, Italy, on Wednesday, Oct. 3, 2012. Barilla Holding SpA is the world's biggest pasta manufacturer. Photographer: Alessia Pierdomenico/Bloomberg via Getty Images

Rejected pieces of fusilli pasta pass along the production line inside Barilla Holding SpA's pasta factory in Parma, Italy, on Wednesday, Oct. 3, 2012. Barilla Holding SpA is the world's biggest pasta manufacturer. Photographer: Alessia Pierdomenico/Bloomberg via Getty Images

मैगी नूडल्स के बाद नेस्ले को उसके पास्ता को लेकर नया झटका लग सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार की खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में कम्पनी के ‘पास्ता’ उत्पाद के नमूनों में सीसे की मात्रा स्वीकार्य सीमा से अधिक पायी गयी।

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    मऊ। मैगी नूडल्स के बाद नेस्ले को उसके पास्ता को लेकर नया झटका लग सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार की खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में कम्पनी के ‘पास्ता’ उत्पाद के नमूनों में सीसे की मात्रा स्वीकार्य सीमा से अधिक पायी गयी।

    मउ के खाद्य एवं औषधि प्रशासन के विशेष अधिकारी अरविंद यादव ने बताया कि गत 10 जून को नेस्ले के एक स्थानीय उत्पाद वितरक श्रीजी ट्रेडर्स के यहां से पास्ता के नमूने लिये थे, जिन्हें जांच के लिये लखनउ स्थित राजकीय खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला में भेजा गया।

    अधिकारी के अनुसार रिपोर्ट में इन उत्पादों के नमूने जांच में असफल रहे। इनमें सीसे की मात्रा छह पीपीएम पायी गयी, जबकि स्वीकार्य मात्रा 2.5 पीपीएम है। हालांकि कंपनी ने कहा कि उसके उत्पाद खाने के लिये पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    नेस्ले इंडिया ने एक बयान में कहा कि कंपनी यथाशीघ्र मामले के समाधान के लिये अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेगी। यादव ने कहा कि मैगी के बाद मैक्रोनी पास्ता के नमूने को मऊ से लिया गया था और लखनउ स्थित राष्ट्रीय खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला भेजा गया। जांच में सीसे की मात्रा स्वीकार्य सीमा से अधिक पायी गयी। अधिकारी के अनुसार दो सितंबर को प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार नमूने परीक्षण में विफल रहे।

    अरविंद यादव ने बताया कि इस बाबत नेस्ले इंडिया लिमिटेड को मोदीनगर के पते पर एक पत्र भेजा गया था जो ‘बिना पावती’ के वापस आ गया। यादव ने इस पत्र को संवाददाताओं को भी दिखाया। उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने नेस्ले इण्डिया को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट के खिलाफ अपील के लिये एक महीने का समय दिया था लेकिन कम्पनी ने पत्र प्राप्त नहीं किया और यह वापस लौट आया। अधिकारी ने कहा कि इस रिपोर्ट के आधार पर यह खाद्य उत्पाद अब असुरक्षित खाद्य उत्पाद की श्रेणी में आ गया है।

    उन्होंने कहा इस सम्बन्ध में खाद्य सुरक्षा आयुक्त लखनउ को मुकदमे की सिफारिश के लिये रिपोर्ट भेजी गयी है। सिफारिश मिलने पर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी की अदालत में मुकदमा दायर किया जाएगा। एक सवाल पर अधिकारी ने कहा कि इससे नेस्ले पास्ता की बिक्री पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।

    उधर नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि मैगी पास्ता 100 प्रतिशत सुरक्षित है। तैयार उत्पाद तथा इसे बनाने में इस्तेमाल कच्चे माल का विनिर्माण प्रक्रिया के हर चरण के दौरान कड़ा परीक्षण किया जाता है। हमने कुछ मीडिया रिपोर्ट को देखा है जिसमें दावा किया गया है कि पास्ता में सीसे की मात्रा अधिक पायी गयी है। हम मामले की जांच कर रहे हैं। हमें इस प्रकार की रिपोर्ट से होने वाले भ्रम को लेकर अफसोस है। ये उत्पाद खाने के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    गौरतलब है कि इस साल मई-जून में नेस्ले के मशहूर उत्पाद ‘मैगी’ के मसाले में अनुमति योग्य मात्रा से ज्यादा सीसा तथा स्वास्थ्य के लिये अन्य हानिकारक तत्व पाये जाने पर उसकी बिक्री पर पाबंदी लगा दी गयी थी। इससे कम्पनी को हजारों करोड़ रपये का नुकसान हुआ था।

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