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कोरोना वायरस की भारत में विकसित ‘फेलूदा’ जांच तकनीक ले सकता है नीदरलैंड

कोरोना वायरस की भारत में विकसित ‘फेलूदा’ जांच तकनीक ले सकता है नीदरलैंड

दिल्ली में कोरोना की रोकथाम के लिए रणनीति तैयार करने मीटिंग आयोजित की गई थी. (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्ली में कोरोना की रोकथाम के लिए रणनीति तैयार करने मीटिंग आयोजित की गई थी. (सांकेतिक तस्वीर)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 28 सितंबर तक नीदरलैंड (Netherlands) में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) के 1,11,150 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और महामारी (Pandemic) से 6,365 लोगों की मौत हो चुकी है.

    नई दिल्ली. नीदरलैंड (Netherlands) ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा कोविड-19 की जांच (COVID-19 Testing) के लिए विकसित की गई ‘फेलूदा’ तकनीक (Feluda Technoloy) के प्रति रुचि दिखाई है. सीएसआईआर के महानिदेशक शेखर मांडे ने मंगलवार को यह जानकारी दी. मांडे ने कहा कि नीदरलैंड अपनी कोरोना वायरस जांच क्षमता (Coronavirus testing capacity) बढ़ाना चाहता है और इस संदर्भ में जानकारी के लिए सीएसआईआर से संपर्क किया गया है. मांडे ने कहा, “उन्होंने हमें पत्र (letter) लिखकर फेलूदा जांच के प्रति रुचि दिखाई है. हमने अपने वाणिज्यिक साझेदार टाटा समूह (Tata Group) को अनुरोध प्रेषित कर दिया है.”

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 28 सितंबर तक नीदरलैंड (Netherlands) में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) के 1,11,150 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और महामारी (Pandemic) से 6,365 लोगों की मौत हो चुकी है. मांडे ने कहा कि फेलूदा जांच तकनीक स्वदेशी (Indigenous) है और वैश्विक स्तर पर इसका प्रयोग किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि फेलूदा जांच आर टी पीसीआर तकनीक (RT-PCR Technology) से अधिक किफायती है.



    फिल्मकार सत्यजीत रे के जासूसी किरदार के नाम पर रखा गया 'फेलूदा टेस्ट' का नाम
    सप्ताह की शुरुआत में भारत के औषधि महानियंत्रक ने ‘फेलूदा’ के व्यावसायिक उपयोग को मंजूरी दे दी थी. इस तकनीक का नाम महान फिल्मकार सत्यजीत रे के जासूसी किरदार फेलूदा के नाम पर रखा गया है.

    यह भी पढ़ें: 12 राज्यों की 56 सीटों पर हुआ उपचुनाव का ऐलान, केरल और बंगाल पर फैसला नहीं

    कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए इसे सीएसआईआर के जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों देबज्योति चक्रवर्ती और सौविक मैती द्वारा विकसित किया गया है. विषाणु विज्ञान विशेषज्ञ उपासना रे ने कहा कि यह कोविड जांच आरटीपीसीआर की तुलना में सस्ती है. आरटीपीसीआर में 1600 रुपये से अधिक का खर्च आता है. रे ने कहा कि ‘रैपिड एंटीजन’ जांच की रिपोर्ट 30 मिनट में आ जाती है और ‘फेलूदा’ जांच में थोड़ा अधिक यानी 45 मिनट का समय लगता है लेकिन यह अधिक सटीक और विशिष्ट है.

    Tags: Corona Virus, Coronavirus, COVID-19 pandemic, Netherlands, WHO

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