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योग से धर्म को खतरा! योग दिवस के एक सप्ताह बाद शुरू हुआ नया विवाद

News18Hindi
Updated: June 27, 2019, 7:23 PM IST
योग से धर्म को खतरा! योग दिवस के एक सप्ताह बाद शुरू हुआ नया विवाद
योग दिवस के एक सप्ताह बाद शुरू हुआ नया विवाद

एक सप्ताह पहले सार्वजनिक किए गए दिशानिर्देश में कहा गया है, "अन्य धर्म की प्रार्थनाओं का जाप करना और योग के दौरान अन्य मतों के धार्मिक प्रभुओं के समक्ष ध्यान लगाना अवांछनीय और अस्वीकार्य है."

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(चंद्रकांत विश्वनाथ)

योग दिवस के लगभग एक सप्ताह बाद, केरल कैथोलिक बिशपस काउन्सिल (केसीबीसी) ने अपने अनुयायियों को जो दिशानिर्देश जारी किया है उससे एक नया विवाद जन्म लेता दिख रहा है. इस दिशानिर्देश ने इस बहस को एक बार फिर जिंदा कर दिया है कि क्या योग धार्मिक क्रिया है.

केसीबीसी के थीयोलोजी कमीशन (धर्म आयोग) द्वारा छह माह पहले तैयार दिशा-निर्देश के अनुसार, "यद्धपि यह कहा जा सकता है कि यह धर्मनिरपेक्ष है, पर ईसाइयों को इससे सतर्क रहना चाहिए कि कहीं वे ध्यान करते हुए एक और धर्म (हिंदू) तो कबूल नहीं कर रहे हैं," हालांकि, उसका यह कहना है कि सुकून और शांतिपूर्ण जीवन के लिए योग का अभ्यास किया जा सकता है.

27 पृष्ठ के दिशा-निर्देश में कहा गया है, "ऐसा धार्मिक अभ्यास जो इस बात को स्वीकार नहीं करता कि यीशु का अनुयायी बनकर मुक्ति पाई जा सकती है, तो वह इसाइयत को कबूल नहीं है. प्रभु यीशु, ईश्वर के पुत्र, जिन्होंने क्रॉस पर खुद को लटका दिया, मुक्ति के एकमात्र मार्ग हैं."

एक सप्ताह पहले सार्वजनिक किए गए दिशानिर्देश में कहा गया है, "अन्य धर्म की प्रार्थनाओं का जाप करना और योग के दौरान अन्य मतों के धार्मिक प्रभुओं के समक्ष ध्यान लगाना अवांछनीय और अस्वीकार्य है."

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योग से मैं ठीक हुई
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राज्य के स्वास्थ्य सेवा से अवकाश ग्रहण करने के बाद एर्नाकुलम जिले के मुवत्तुपुझा में निर्मला टीचर्ज ट्रेनिंग योग सेंटर की स्थापना करने वाली सिस्टर ने कहा, "मैंने उस समय योग करना शुरू किया जब मैं 34 साल की थी और पीठ के दर्द के कारण बहुत ही संकट से गुजर रही थी. 1985 में मैं एक योग गुरु से मिली जो उस संस्थान में आए थे जहां मैं पढ़ाई कर रही थी. मैंने उन्हें अपनी इस समस्या के बारे में बताया. उन्होंने मुझे योग करने को कहा और उन्होंने यह भी बताया कि इसे कैसे किया जाए. योग करने के बाद मैं बेहतर महसूस करने लगी और मुझे रोगों से मुक्ति मिल गई. इसके बाद मैंने योग को अपने जीवन का हिस्सा बना लेने का निर्णय किया. किसी ने भी मुझे योग करने की सलाह नहीं दी."



हर धर्म के लोग करते हैं योग 

इस नन के छात्रों की संख्या लगभग 5000 है और ये लोग जीवन के हर क्षेत्र से आते हैं. तमिलनाडु स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के तहत योग पर पांच कोर्स की पढ़ाई कराने वाले दो केंद्रों का प्रबंधन संभालने वाली सिस्टर ट्रेसा कहती हैं, "इनमें डॉक्टर हैं, प्रीस्ट हैं और नन भी हैं. बिशप के कहने के मुताबिक़ मैं सेमिनरी के छात्रों का क्लास लेती हूं. अगर आप इसको धर्म से जोड़कर देखेंगे तो इसमें हिंदू हैं, मुसलमान हैं और ईसाई भी शामिल हैं."

योग का धर्म से नहीं है संबंध

सिस्टर ट्रेसा, जो शायद योग सिखाने वाली अपने तरह की अकेली हैं, के अनुसार योग से किसी व्यक्ति के धर्म का कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा, "मैंने योग सीखने के लिए बेंगलुरु में एक महीना बिताया. वह एक हिंदू आश्रम था. पर इससे मेरे धार्मिक मान्यताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. अगर आपका विश्वास गहरा है तो कोई भी उसको छू नहीं सकता है."

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First published: June 27, 2019, 7:18 PM IST
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