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सीमा पर तनाव के बीच DRDO ने बनाई नई लैब, चीन-पाकिस्तान सीमा पर रखेगी नजर

नई लैब का गठन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में बड़े पैमाने पर होने वाले सुधारों की दिशा में पहला कदम है. (PTI)
नई लैब का गठन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में बड़े पैमाने पर होने वाले सुधारों की दिशा में पहला कदम है. (PTI)

डीआरडीओ की नई लैब का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा समीक्षा बैठक करने के बाद लिया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 6:15 AM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में सीमा पर जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की दो लैबोरेट्रीज को मिलाकर एक नई लैबोरेट्रीज बना दी है. नई लैबोरेट्रीज चीन और पाकिस्तान की सीमा पर बर्फीले तूफान और भूभाग पर केंद्रित शोध पर अपना ध्यान लगाएगी. सरकारी सूत्रों के हवाले से ANI ने ये जानकारी दी है. सूत्रों के मुताबिक, 'डीआरडीओ (DRDO) ने डिफेंस जियो इंफॉर्मेटिक्स रिसर्च इंस्टैब्लिशमेंट नाम से एक नई लैबोरेट्री का गठन किया है. इसके लिए रक्षा संस्थान की मौजूदा दो लैबोरेट्रीज का विलय कर दिया गया है. नई लैब अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) से लद्दाख तक चीन से लगी सीमा पर बर्फीले तूफान और भूभाग से जुड़े रिसर्च पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी.'

नई लैब के गठन के लिए जिन दो पुरानी लैब का विलय किया गया है, उनमें मनाली स्थित बर्फ और हिमस्खलन अध्ययन संस्थान (Snow and Avalanche Studies Establishment) और दूसरा दिल्ली स्थित रक्षा भूभाग शोध प्रयोगशाला (Defence Terrain Research Laboratory) शामिल है.

बता दें कि SASE लंबे समय से बर्फ और हिमस्खलन के बारे में शोध को लेकर काम कर रहा है. संस्थान ने अब तक सड़कों किनारे 3,000 जगहों को चिन्हित करते हुए हिमस्खलन मानचित्र बनाया है. इस मानचित्र में देश के अलग-अलग हिस्सों को शामिल किया है, जहां सशस्त्र बलों की तैनाती है.



इन दोनों लैब का विलय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में बड़े पैमाने पर होने वाले सुधारों की दिशा में पहला कदम है. डीआरडीओ चीफ डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने कहा कि डीआरडीओ को और ज्यादा रिजल्ट ओरिएंटेड बनाया जाएगा. इसी तरह रक्षा भूभाग शोध प्रयोगशाला (DTRL) देश के अलग-अलग भूभागों पर शोध करती रही है, जहां सशस्त्र बलों की तैनाती है.
सूत्रों के मुताबिक नई लैब चीन सीमा पर अलग-अलग राज्यों में जैसे अरुणाचल प्रदेश में अपनी टीमें तैनात करेगी, जो सशस्त्र बलों के साथ मिलकर काम करेगी. डीआरडीओ की इन लैब्स का विलय तब हुआ है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीआरडीओ को लेकर एक गहन समीक्षा बैठक की. इस बैठक में केंद्रीय मंत्रियों के साथ, डीआरडीओ चेयरमैन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने भी शिरकत की.

केंद्र सरकार ने डीआरडीओ चीफ सतीश रेड्डी के कार्यकाल को बढ़ा दिया है और उन्हें डीआरडीओ में सुधार को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी दी गई है. डीआरडीओ चीफ ने हाल ही में आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर एक कमेटी का गठन किया है. कमेटी की अगुवाई पी. रामगोपाल राव करेंगे, जोकि आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर हैं. कमेटी भविष्य की जंग के लिए सशस्त्र बलों को तैनात करने खातिर अलग-अलग लैबोरेट्रीज के लिए ड्यूटी चार्टर की समीक्षा करेगी.

कमेटी डीआरडीओ के तहत आने वाले सभी लैब्स की कार्यप्रणाली समझने के बाद डीआरडीओ को रिपोर्ट सौंपेगी.
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