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Social Media Guide line – साइबर क्राइम रोकने में मिलेगी मदद, पर प्राइवेसी को भी खतरा

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया के लिए सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया के लिए सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

केन्‍द्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया, ओटीटी और न्‍यूज पोर्टल के लिए जारी की गई गाइड लाइन से इन पर अंकुश लगेगा. लेकिन प्राइवेसी को खतरा भी हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 12:36 PM IST
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नई दिल्‍ली. केन्‍द्र सरकार (Central Government)  द्वारा सोशल मीडिया (Social Media), ओटीटी (OTT Platforms) और न्‍यूज पोर्टल  (News portal) के लिए जारी की गई गाइड लाइन से इन पर अंकुश लगेगा. साथ ही साइबर क्राइम रोकने में मदद मिलेगी, लेकिन इससे प्राइवेसी को खतरा हो भी सकता है, हालांकि कुछ जानकार मानते हैं कि इससे प्राइवेसी को खतरा नहीं होगा.

उत्‍तर प्रदेश के साइबर सेल प्रभारी के आईपीएस अधिकारी त्रिवेणी सिंह बताते हैं कि सरकार की नई गाइड लाइन कानून व्‍यवस्‍था और खासकर पुलिस के लिए बहुत मददगार होगी. पहले सोशल मीडिया के प्‍लेटफार्म महीनों तक जवाब नहीं देते थे, लेकिन नई  गाइड लाइन लागू होने के बाद 24 घंटे में जवाब देना होगा, इससे साइबर क्राइम रोकने में मदद मिलेगी. त्रिवेणी सिंह का मानना है कि अगर सोशल मीडिया के प्‍लेटफार्म अकाउंट बनाते समय व्‍यक्तिगत पहचानपत्र देने से प्राइवेसी को खतरा नहीं होगा. वे बताते हैं जब कोई व्‍यक्ति अपना पर्सनल डाटा किसी प्‍लेटफार्म को देता है और भविष्‍य में इस प्‍लेटफार्म की मदद से व्‍यक्तिगत डाटा का कोई और दुर्प्रयोग करता है तो संबंधित प्‍लेटफार्म पर आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकेगा. साइबर एक्‍सपर्ट अनुज अग्रवाल बताते हैं क‍ि फिलहाल अभी व्‍यक्तिगत पहचान पत्र अनिवार्य नहीं किया गया हो लेकिन भविष्‍य में किया जा सकता है. जैसे अभी कुछ सेवाओं के लिए आधार जरूरी है, उसी इन प्‍लेटफार्म में कुछ सेक्‍शन में अनिवार्य किया जा सकता है. इस तरह धीरे धीरे व्‍यक्तिगत जानकारी देनी अनिवार्य हो सकती है. साइबर एक्‍सपर्ट रितेश भाटिया बताते हैं कि अगर किसी ने कोई मैसेज अपने दोस्‍त तो व्‍यक्तिगत तौर भेजा है और उसने उस मैसेज को सार्वजनिक रूप में फरवर्ड कर दिया है, वह मैसेज सरकार गलत मानती है, इस तरह जिसने पहला मैसेज दोस्‍त को भेजा था, वो ही पकड़ा जा सकता है.

इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सलाहकार रक्षित टंडन बताते हैं क‍ि सरकार ने ओटीटी प्‍लेटफार्म के लिए गाइड लाइन जारी की है कि उन्‍हें स्‍वयं  इसे रेगुलेट करना होगा. यानी आपके प्‍लेटफार्म में जो कंटेंट उपलब्‍ध कराया जा रहा है, वो किस उम्र के लिए है. इसके साथ ही पलेटफार्म में अकाउंट खोलते समय उम्र आदि की  जानकारी देनी अनिवार्य होगी. इसी आधार पर पहचान होगी कि‍ किस उम्र वाला व्‍यक्ति किस उम्र के कंटेंट को अधिक देख रहा है.  इस तरह ओटीटी प्‍लेफार्म यह मोनीटर कर सकेगा कि कम उम्र के बच्‍चे या नाबालिक कौन सा कंटेंट अधिक देख रहे हैं.



रक्षित टंडन बताते हैं कि सोशल मीडिया के लिए गाइड लाइन इसलिए भी अनिवार्य है, जैसे पिछले दिनों कैपिटल हिल्‍स में हिंसा होने पर सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया गया था लेकिन लालकिले में हिंसा होने पर प्रतिबंध नहीं लगा . इसलिए जो कंटेंट देशहित, समाजहित में नहीं हो,उसे गलत मानकर प्रतिबंधत लगाया जा सकता है.
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