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क्या है नया IAS ट्रांसफर नियम और क्यों केंद्र के खिलाफ राज्यों ने खोला मोर्चा; 10 प्वॉइंट्स में जानें

क्या है नया IAS ट्रांसफर नियम और क्यों केंद्र के खिलाफ राज्यों ने खोला मोर्चा; 10 प्वॉइंट्स में जानें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (फाइल फोटो)

New IAS Rules of Transfer: केंद्र सरकार ने सेवा नियमों में अपने प्रस्तावित बदलावों का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि राज्य प्रतिनियुक्ति के लिए पर्याप्त संख्या में आईएएस अधिकारियों को नहीं भेज रहे हैं, जिससे केंद्र सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है. कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सूत्रों ने कहा कि केंद्र में संयुक्त सचिव स्तर तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों के घटते प्रतिनिधित्व का रुझान देखा गया है क्योंकि ज्यादातर राज्य अपने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व (सीडीआर) दायित्वों को पूरा नहीं कर रहे हैं और केंद्र में सेवा के लिए उनके द्वारा प्रायोजित अधिकारियों की संख्या बहुत कम है.

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नई दिल्ली. भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों को उनकी पोस्टिंग सौंपे जाने वाले नियमों में बदलाव का प्रस्ताव केंद्र और राज्यों के बीच एक बड़े संघर्ष में बदल गया है. दरअसल कार्मिक मंत्रालय ने मौजूदा सेवा नियमों में बदलाव का फैसला किया है ताकि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए पर्याप्त संख्या में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों की उपलब्धता रहे.

केंद्र को अधिक प्रतिनिधित्व देने वाला यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब मंत्रालय द्वारा अनेक बार इस विषय को उठाये जाने के बाद भी अनेक राज्य/संयुक्त कैडर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व के तहत पर्याप्त संख्या में आईएएस अधिकारियों को भेजते नहीं दिखे. हालांकि बंगाल, झारखंड और केरल जैसे राज्यों ने केंद्र के इस प्रस्ताव का विरोध किया है.

10 बिंदुओं में समझें क्या है केंद्र का प्रस्ताव और राज्य सरकारें क्यों कर रहे हैं इसका विरोध:

कार्मिक मंत्रालय ने आईएएस (कैडर) नियम, 1954 में बदलाव का प्रस्ताव 20 दिसंबर, 2021 को सभी राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को भेजा गया था और उन्हें 25 जनवरी, 2022 तक इस प्रस्ताव पर अपनी टिप्पणी देनी है. मंत्रालय ने प्रस्ताव में कहा, "इसके परिणामस्वरूप केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए उपलब्ध अधिकारियों की संख्या केंद्र में जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है." गत 12 जनवरी को सभी राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को भेजे गए डीओपीटी के प्रस्ताव के अनुसार विशिष्ट परिस्थितियों में जहां केंद्र सरकार द्वारा जनहित में कैडर अधिकारियों की सेवाओं की आवश्यकता होती है, केंद्र सरकार ऐसे अधिकारी की सेवाएं ले सकती है.
राज्यों को 12 जनवरी के पत्र में प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों को भेजने पर राज्यों की असहमति को खत्म करने के लिए केंद्र की शक्ति का उल्लेख है. डीओपीटी ने 20 दिसंबर, 2021 को सभी राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा था, जिसके बाद 27 दिसंबर, 2021, छह जनवरी और 12 जनवरी 2022 को स्मरण पत्र (रिमाइंडर) भेजे गए थे.
नियमों में बदलाव के लिए केंद्र ने प्रस्ताव दिया है कि प्रत्येक राज्य सरकार मौजूदा नियमों के तहत निर्धारित केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व की सीमा तक विभिन्न स्तरों के पात्र अधिकारियों को केंद्र सरकार को प्रतिनियुक्ति के लिए उपलब्ध कराएगी. नए नियम संबंधी प्रस्ताव के अनुसार केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति में भेजे जाने वाले अधिकारियों की वास्तविक संख्या केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकार के साथ परामर्श से तय करेगी.
इसमें कहा गया है कि किसी तरह की असहमति की स्थिति में निर्णय केंद्र सरकार करेगी और संबंधित राज्य सरकारें निश्चित समय में केंद्र सरकार के निर्णय को लागू करेंगी. मौजूदा नियमों में इस तरह की असहमतियों की स्थिति में फैसले के लिए कोई समयसीमा का उल्लेख नहीं है. केंद्र सरकार ने पिछले साल जून में उप सचिव, निदेशक और संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों की कमी का हवाला देते हुए राज्य सरकारों से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए और अधिक अधिकारियों को भेजने को कहा था.
पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, तमिलनाडु और केरल सहित कुछ राज्यों केंद्र के इस कदम पर कड़ा रुख अख्तियार किया है. राज्य सरकारों का कहना है कि केंद्र के इस प्रस्ताव के लागू होने से राज्यों में काम करने वाले अधिकारियों में डर पैदा होगा. वहीं, केंद्र सरकार ने सेवा नियमों में अपने प्रस्तावित बदलावों का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि राज्य प्रतिनियुक्ति के लिए पर्याप्त संख्या में आईएएस अधिकारियों को नहीं भेज रहे हैं, जिससे केंद्र सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है.
इस कदम की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी आलोचना की है जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे प्रस्ताव को वापस लेने का अनुरोध किया और दावा किया कि इससे राज्यों के प्रशासन पर असर पड़ेगा. रविवार को प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति जाहिर करते हुए उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर देश के संघीय ढांचे को तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे संशोधन पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए जिससे केंद्र, राज्य सरकार की आपत्ति को दरकिनार कर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति केंद्र में कर सके.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि वर्तमान प्रतिनियुक्ति नियमावली अपने आप में ही केंद्र के पक्ष में है तथा उसमें और सख्ती लाने से सहयोगपरक संघवाद की जड़ें कमजोर होंगी. उन्होंने पत्र में लिखा है, "अखिल भारतीय सेवा की प्रतिनियुक्ति नियमावली में प्रस्तावित संशोधनों से निश्चित ही अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के बीच उस राज्य सरकार की नीतियां लागू करने में डर एवं हिचक का भाव पैदा होगा जो केंद्र में सत्तारूढ़ दल की विरोधी पार्टी या पार्टियों द्वारा बनायी गयी है."
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी भारतीय प्राशासनिक सेवा संवर्ग (आईएएस कैडर) के नियमों में केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधनों को एकपक्षीय, कठोर और सहकारी संघवाद की भावना के विपरीत बताते हुए इन्हें तत्काल 'दफन' कर देने की प्रधानमंत्री से अपील की है. सोरेन ने शनिवार को कहा कि केंद्र के इस कदम से संविधान में इस मुद्दे पर विचार विमर्श और सहयोग के लिए की गयी व्यवस्था खत्म हो जायेगी और स्वच्छंदता को बढ़ावा मिलेगा.
मंत्रालय ने अपने इस प्रस्ताव के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि केंद्र में पर्याप्त संख्या में अधिकारियों की अनुपलब्धता केंद्र सरकार के कामकाज को प्रभावित कर रही है क्योंकि केंद्र को नीति निर्माण और कार्यक्रम कार्यान्वयन में नई सूचनाएं प्राप्त करने के लिए इन अधिकारियों की सेवाओं की जरूरत है. सूत्रों ने कहा कि ज्यादातर राज्य कैडर द्वारा निर्धारित सीडीआर के अनुसार अधिकारियों की संख्या को प्रायोजित नहीं करने की वजह से कैडर में अधिकारियों की कमी है.
डीओपीटी के सूत्रों के अनुसार, सीडीआर पर आईएएस अधिकारियों की संख्या 2011 में 309 से घटकर 223 हो गई है. उन्होंने कहा कि सीडीआर उपयोग का प्रतिशत 2011 में 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है. सूत्रों ने कहा कि आईएएस में उप सचिव/निदेशक स्तर पर आईएएस अधिकारियों की संख्या 2014 में 621 से बढ़कर 2021 में 1130 हो जाने के बावजूद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर ऐसे अधिकारियों की संख्या 117 से घटकर 114 हो गई है.

Tags: IAS, Mamata banerjee, Pinarayi Vijayan

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