Home /News /nation /

new medical bill homeopathy clinical trials ayurveda health ministry drugs medical devices and cosmetics bill 2022 rks

दवाओं, मेडिकल उपकरणों को रेगुलेट करने के लिए नए बिल का मसौदा, हो सकता है गेम चेंजर!

दवाओं, मेडिकल उपकरणों को रेगुलेट करने के लिए नए बिल का आया मसौदा (ANI)

दवाओं, मेडिकल उपकरणों को रेगुलेट करने के लिए नए बिल का आया मसौदा (ANI)

दवाओं, मेडिकल उपकरणों और ऑनलाइन फार्मेसियों को विनियमित करने के लिए सरकार ने एक नए विधेयक का मसौदा सार्वजनिक किया है. ये मसौदा विधेयक आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा या यूनानी चिकित्सा में नई दवाओं और उपकरणों को विकसित करने के लिए आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग को भी प्रोत्साहित कर सकता है.

अधिक पढ़ें ...

नई दिल्ली. दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के नए बिल पर सरकार ने जो नया मसौदा पेश किया है उसमें सोवा-रिग्पा (समग्र स्वास्थ्य देखभाल का प्राचीन रूप), होम्योपैथी और दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को नियंत्रित करने के साथ ही क्लिनिकल ट्रायल्स के दौरान मौतों पर सख्त दंड का प्रावधान करने की बात कही गई है.

News18.com ने भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल वीजी सोमानी के तहत दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों और चिकित्सा उपकरणों के लिए कानून बनाने के लिए एक पैनल बनाने के लिए सरकार के कदम के बारे में सितंबर में ही पहली बार एक रिपोर्ट दी थी. अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने 8 जुलाई को अपनी वेबसाइट पर एक मसौदा विधेयक अपलोड करके 45 दिनों के भीतर जनता और हितधारकों से सुझाव, टिप्पणियां और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कहा है.

अब तक देश में चिकित्सा उपकरणों को दवा के समान माना गया है और ऐसे उपकरणों की बिक्री, निर्माण, वितरण या क्लिनिकल ट्रयल्स को रेगुलेट करने के लिए कोई अलग नियम नहीं थे. “ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 केंद्रीय विधान सभा द्वारा आजादी के पहले का बनाया गया कानून है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सरकार ने अप्रचलित कानूनों की समीक्षा करने और उनको समय-समय पर निरस्त करने और कानूनों में संशोधन करने की जरूरत पर बल दिया है. जिसके लिए इस विधेयक को संसद के समक्ष लाया गया है. समिति की सिफारिशों के अनुसार स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने समय के हिसाब से बदलती जरूरतों,प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल रखने के लिए ‘न्यू ड्रग्स, मेडिकल डिवाइस एंड कॉस्मेटिक बिल, 2022’ (New Drugs, Medical Devices and Cosmetics Bill, 2022) के मसौदे को पेश किया है.

पहली बार इस मसौदा विधेयक में आयुष दवाओं के लिए एक अलग अध्याय शामिल है, जो सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी को विनियमित करने का प्रस्ताव करता है. जबकि मौजूदा कानून केवल आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों को नियंत्रित करता है. आम तौर पर आयुष उपचारों और दवाओं की वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी के कारण आलोचना की जाती है. अब विधेयक में आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी की नई दवाओं के विकास, उनकी सुरक्षा और प्रभावकारिता, उपकरण बनाने और अन्य संबंधित मामलों पर नियामक प्राधिकरण का समर्थन करने के लिए एक वैज्ञानिक अनुसंधान बोर्ड स्थापित करने का प्रस्ताव है.

दवाओं की ऑनलाइन बिक्री
ई-फार्मेसियों या दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर विनियमन का एक लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है, फिर भी मसौदा विधेयक में भारत में ई-फार्मेसियों पर कोई अलग अध्याय या विस्तृत नियम नहीं है. जबकि दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को नियंत्रित करने की चर्चा कम से कम छह साल से चल रही है. 83 पेज वाले इस ड्राफ्ट बिल में कई नई परिभाषाएं शामिल हैं. उदाहरण के लिए वर्तमान संदर्भ में आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले कई शब्दों जैसे-ओवर द काउंटर दवाएं, चिकित्सा उपकरण, चिकित्सा उपकरण अधिकारी आदि की परिभाषा इसमें दी गई है.

चिकित्सा उपकरण अब दवाओं के बराबर नहीं हैं
अब तक, चिकित्सा उपकरणों की कोई अलग, आधिकारिक परिभाषा नहीं थी. क्योंकि उनके साथ दवाओं के समान व्यवहार किया जाता था. नए बिल के मसौदे में चिकित्सा उपकरणों की व्यापक परिभाषा का प्रस्ताव किया गया है. मसौदा विधेयक में राज्यों और केंद्रीय स्तर पर दवा प्रयोगशालाओं की तर्ज पर चिकित्सा उपकरण परीक्षण केंद्रों का भी प्रस्ताव है.

क्लिनिकल ट्रायल्स पर सख्त कानून
क्लीनिकल ट्रायल में गड़बड़ी करने पर जुर्माने को बढ़ा दिया गया है. मसौदे में यह भी प्रस्ताव है कि यदि कोई व्यक्ति (प्रायोजक, नैदानिक अनुसंधान संगठन, कोई अन्य संगठन या अन्वेषक) आवश्यक चिकित्सा प्रबंधन या मुआवजा प्रदान करने में विफल रहता है तो उसे कारावास की सजा या जुर्माना हो सकता है. कारावास को एक साल तक बढ़ाया जा सकता है. जबकि जुर्माना की रकम मुआवजे की राशि के दोगुने से कम नहीं होगी. साथ ही क्लिनिकल ट्रायल के दौरान, शोध की जा रही दवा के कारण या इस तरह के परीक्षण में भागीदारी के कारण किसी हिस्सा लेने वाली की मृत्यु होने के मामले में कंपनी को प्रतिभागी के कानूनी उत्तराधिकारी को मुआवजा प्रदान करना चाहिए. मौजूदा कानून के तहत क्लिनिकल ट्रायल में परीक्षण प्रतिभागियों को मुआवजा प्रदान करने में विफलता के लिए कारावास जैसे कठोर दंड लगाने का कोई प्रावधान नहीं है.

Sunday Special: भारत ने अमेरिकी वैक्सीन निर्माताओं Pfizer और Moderna के दबाव को कैसे किया नाकाम? पढ़ें

नए सलाहकार बोर्ड का गठन
इस बिल में एक अलग ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) और मेडिकल डिवाइसेस टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (MDTAB) बनाने का प्रस्ताव है. जो इस एक्ट को लागू करने के लिए ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स से संबंधित तकनीकी मामलों और अन्य कार्य पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को सलाह देगा.

Tags: Union health ministry

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर