News18 Rising India Summit: 'भारत बन सकता है सुपर पावर, मगर चीन से बढ़ानी होगी दोस्ती'

भारत को महाशक्ति बनने के लिए ज़रूरी है कि आर्थिक विकास की गति को अच्छा रखा जाए व रक्षा के क्षेत्र में भी स्वदेशी तकनीक व आत्मनिर्भरता को हासिल किया जाए.

News18.com
Updated: March 14, 2018, 1:52 PM IST
News18 Rising India Summit: 'भारत बन सकता है सुपर पावर, मगर चीन से बढ़ानी होगी दोस्ती'
भारत को महाशक्ति बनने के लिए ज़रूरी है कि आर्थिक विकास की गति को अच्छा रखा जाए व रक्षा के क्षेत्र में भी स्वदेशी तकनीक व आत्मनिर्भरता को हासिल किया जाए.
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Updated: March 14, 2018, 1:52 PM IST
भारत में 2030 तक महाशक्ति बनने की अपार संभावनाएं छिपी हैं लेकिन यह तभी संभव है जब भारत चीन के साथ सामंजस्य बना के रखे. सीएनएन के राइज़िंग इंडिया समिट में शामिल होने वाले सभी लोगों का यही मानना था.

भूतपूर्व राजनयिक केसी सिंह, टीसीए राघवन व भूतपूर्व इंडियन आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक तीनों इस बात पर सहमत थे कि भारत को महाशक्ति बनने के लिए अपनी स्थिति को मज़बूत करना होगा और अपने पड़ोसियों खासकर चीन के साथ सारे मामलों का हल निकालना होगा.

श्री सिंह ने कहा कि "इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत एक उभरती हुई शक्ति है और इसमें भी कोई शक नहीं है कि यह जारी भी रहेगा, लेकिन भारत के उदय के बारे में डराने वाली बात यह है कि चीन भी उसी गति व ताकत के साथ उभर रहा है. 19वीं सदी के यूरोप का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब भी यूरोप में दो पड़ोसी उभरती हुई शक्तियों ने एक दूसरे को प्रतिस्थापित करने की कोशिश की तो काफी बड़ी समस्याएं खड़ी हो गईं.

आगे दूसरी समस्या उन्होंने बताई कि ग्लोबल गवर्नेंस की संस्थाएं जैसे संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक आदि की संरचना भारत व चीन की उभरती समस्याओं से निपटने के लिए सही नहीं है क्योंकि ये संस्थाएं दूसरे विश्व युद्ध के विजेताओं द्वारा बनाई गईं थीं. इस मामले में एक अनिश्चितता की स्थिति है कि क्या भारत और चीन साथ-साथ रह सकते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति के बारे में बात करते हुए श्री सिंह ने कहा कि देशों के बीच संबंध तभी सफल होते हैं जब निरंतरता बनी रहे, और इसमें समय लगता है. इसलिए जो लाभ आज दिख रहा है वह कई सालों की कोशिश है. दूसरे नेताओं के साथ पारस्परिक संबंध बनाने के मोदी की कोशिशों से मदद मिल सकती है लेकिन वास्तविक सवाल ये है कि क्या वे भविष्य में लंबे समय तक मदद कर पायेंगे. आगे उन्होंने मध्य पूर्व का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती.

राघवन के अनुसार ये ज़रूरी नहीं है कि भारत व चीन दोनों के बढ़ने से सिर्फ विरोध की स्थिति ही पैदा हो बल्कि सहयोग भी बढ़ सकता है.

हालांकि, उनके अनुसार बढ़ते भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दूसरी शक्तियों के सामने कैसे खड़ा रहे? उन्होंने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ी मूल चुनौती है कि भारत ज़मीनी स्तर पर दिखने वाली आर्थिक वृद्धि को बनाए कैसे रखे? उन्होंने कहा कि भारत को महाशक्ति बनने के लिए ज़रूरी है कि बाहरी व्यापार संतुलन, घरेलू बुनियादी ढांचा और रक्षा के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक व आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाए.

दूसरी ओर, मलिक के अनुसार भारत और चीन के बीच संघर्ष अनिवार्य नहीं है. उनका मानना है कि दोनों देशों में तनाव कि स्थिति अनसुलझे सीमाओं के कारण है. अगर सीमा विवाद को सुलझा लिया जाता है तो दोनों देश शांति से रह सकते हैं.

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