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NEWS18 'बैठक' में ओवैसी ने कहा- BJP के लिए शाहबानो जैसा होगा SC/ST एक्ट

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Updated: August 7, 2018, 3:50 PM IST
NEWS18 'बैठक' में ओवैसी ने कहा- BJP के लिए शाहबानो जैसा होगा SC/ST एक्ट
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अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचारों की रोकथाम) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act, 1989) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाए गए विधेयक की तुलना असदुद्दीन ओवैसी ने शाह बानो प्रकरण से की.

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  • Last Updated: August 7, 2018, 3:50 PM IST
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NEWS18 इंडिया के बैठक कार्यक्रम में अनुसूचित जनजाति (अत्याचारों की रोकथाम) अधिनियम पर तीखी चर्चा हुई. सेशन के दौरान एक ओर असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र की ओर से लाए जा रहे बिल की तुलना शाहबानो प्रकरण से कर दी तो बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था.

दरअसल, इसी साल 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचारों की रोकथाम) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act, 1989) के तहत होने वाली गिरफ्तारियों पर रोक लगा दी गई थी. अदालत ने FIR के बाद गिरफ्तारी से पहले प्राथमिक जांच का प्रावधान कर दिया था. अदालत की ओर से यह भी कहा गया था कि अग्रिम जमानत पर कोई रोक नहीं होगी. इसके बाद केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति विधेयक, 2018 को मंजूरी दे दी है. इसके तहत 1989 के विधेयक में कुछ सुधार किये जाएंगे.

इसी मुद्दे पर बैठक में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी, असद्दुीन ओवैसी और सुब्रमण्यम स्वामी में ठन गई. इस मुद्दे पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'मोदी सरकार का SC/ST एक्ट लाना शाहबानो मामले जैसा है. सोमवार को जो लोकसभा में हुआ, वो आपके लिए शाहबानो मामले की तरह है.



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इसके बाद मनीष तिवारी ने स्वामी से सवाल किया कि वह SC/ST एक्ट के संशोधन के खिलाफ वोट देंगे या नहीं. इस पर स्वामी ने कहा, 'SC/ST एक्ट पर राज्यसभा में किसे वोट करूंगा ये सोच कर फैसला करूंगा, लेकिन दुश्मनों को ताकतवर नहीं होने दूंगा. उन्होंने कहा, 'भगवान राम ने भी अनैतिक तौर पर बाली को मारा था, मैं वो कोई काम नहीं करूंगा जिससे कांग्रेस या ओवैसी को फायदा पहुंचे.'

बता दें कि इंदौर की रहने वाली मुस्लिम महिला शाहबानो को उसके पति मोहम्मद खान ने 1978 में तलाक दे दिया था. पांच बच्चों की मां 62 वर्षीय शाहबानो ने गुजारा भत्ता पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी और पति के खिलाफ गुजारे भत्ते का केस जीत भी लिया. सुप्रीम कोर्ट में केस जीतने के बाद भी शाहबानो को पति से हर्जाना नहीं मिल सका. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पुरज़ोर विरोध किया.

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इस विरोध के बाद  1986 में राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 पारित किया.  इस अधिनियम के तहत शाहबानो को तलाक देने वाला पति मोहम्मद गुजारा भत्ता के दायित्व से मुक्त हो गया था.

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First published: August 7, 2018, 3:23 PM IST
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