तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं की कमी पर NGT ने अमरनाथ बोर्ड को लगाई फटकार

भाषा
Updated: November 15, 2017, 8:37 PM IST
तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं की कमी पर NGT ने अमरनाथ बोर्ड को लगाई फटकार
तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं की कमी पर NGT ने अमरनाथ बोर्ड को लगाई फटकार (Getty Images)
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Updated: November 15, 2017, 8:37 PM IST
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दक्षिण कश्मीर में हिमालय में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा तक जाने वाले तीर्थयात्रियों को उचित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के लिए बुधवार को अमरनाथ श्राइन बोर्ड को फटकार लगाई.

हरित अधिकरण ने उच्चतम न्यायालय के वर्ष 2012 में दिए गए निर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए बोर्ड से पूछा कि इन वर्षों में उसने इस बारे में क्या कदम उठाए हैं.

अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, 'मंदिर के नज़दीक आप ने दुकानें खोलने की इजाज़त दे रखी है. शौचालय की कोई उचित सुविधा नहीं है. क्या आप जानते हैं कि महिलाओं के लिए ये कितनी परेशानी की बात है. आपने तीर्थयात्रियों को उचित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध क्यों नहीं कराई. आप तीर्थयात्रियों के बजाए व्यावसायिक गतिविधियों को तवज्जो दे रहे हैं. ये गलत है. मंदिर की पवित्रता का ध्यान रखा जाना चाहिए लेकिन आप लोगों को समुचित दर्शन से वंचित नहीं कर सकते.' हरित अधिकरण ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया है जो तीर्थयात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने संबंधी कार्ययोजना पेश करेगी.

इस समिति में अन्य लोगों के साथ ही जम्मू-कश्मीर के पर्यावरण सचिव, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से वरिष्ठ वैज्ञानिक, जी बी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, अमरनाथ श्राइनबोर्ड के सीईओ, सेना का एक अधिकारी (जो ब्रिगेडियर रैंक से नीचे का न हो), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव भी शामिल होंगे.

पीठ ने कहा कि समिति को जांच के बाद उचित मार्ग, गुफा के इर्दगिर्द के स्थल को साइलेंट जोन घोषित करने और मंदिर के निकट स्वच्छता बनाए रखने जैसे पहलुओं पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया. समिति से इलाके में इको-फ्रेंडली शौचालय के निर्माण के बारे में विचार करने के लिए भी कहा गया है.

अधिकरण ने श्राइन बोर्ड से कहा कि शीर्ष अदालत के 2012 के निर्देशों के अनुपालन संबंधी स्थिति रिपोर्ट दिसंबर के पहले हफ्ते में पेश की जाए. अधिकरण ने ये निर्देश पर्यावरण कार्यकर्ता गौरी मौलेखी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए. इस मामले में अगली सुनवाई पांच दिसंबर को तय की गयी है.
First published: November 15, 2017
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