प्रदूषण के मुद्दे पर NGT ने बढ़ाया दायरा, 18 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजकर मांगा जवाब

एनजीटी  ने 18 राज्यों के भेजा नोटिस(File)
एनजीटी ने 18 राज्यों के भेजा नोटिस(File)

एनजीटी (NGT) ने पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण के मामलों का दायरा विस्तार करते हुए 18 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 8:17 AM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने बुधवार को पटाखे जलाने से होने वाले प्रदूषण के मामलों की सुनवाई का दायरा एनसीआर से बढ़ाते हुए 18 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है. इन राज्यों मे वायु गुणवत्ता मानकों से कमतर है.

एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह पहले ही दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी कर चुकी है. वहीं, ओडिशा और राजस्थान की सरकारें पहले ही पटाखों की खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगाने को लेकर अधिसूचना जारी कर चुकी हैं.

इन राज्यों से मांगा जवाब
अधिकरण ने इस मामले पर आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नगालैंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से जवाब मांगा है.
पीठ ने कहा, 'सभी संबंधित राज्य जहां वायु गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है, वे ओडिशा और राजस्थान राज्यों की तरह कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं.' NGT द्वारा मांगी गई जानकारी में पूछा गया है कि कि इन राज्यों में वायु गुणवत्ता स्तर क्या और कैसा है? सुधार के लिए क्या कोशिश की जा रही है? दीवाली और उससे दस दिन आगे-पीछे के लिए उनके पास क्या योजनाएं बनाई गई हैं ताकि हवा खराब ना हो और वहां की जनता को प्रदूषण का सामना ना करना पड़े.



एनजीटी ने सात से 30 नवंबर तक पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के बारे में केंद्र को नोटिस जारी
इससे पहले एनजीटी ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और चार राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर पूछा कि क्या जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के हित में सात से 30 नवम्बर तक पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. अधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस ए के गोयल की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, दिल्ली के पुलिस आयुक्त और दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों से उनका जवाब मांगा.

अधिकरण ने वरिष्ठ अधिवक्ता राज पंजवानी और अधिवक्ता शिभानी घोष को इस मामले में न्याय मित्र के रूप में नियुक्त किया. अधिकरण ‘इंडियन सोशल रिस्पांसिबिलिटी नेटवर्क’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था. याचिका संतोष गुप्ता के जरिये दाखिल की गई थी. याचिका में एनसीआर में पटाखों का इस्तेमाल कर प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई किये जाने का अनुरोध किया गया है.

इसमें कहा गया है, ‘बढ़ता प्रदूषण संवेदनशील समूह के लोगों को प्रभावित कर सकता है और मृत्यु दर बढ़ने की आशंका है. दिल्ली में कोविड-19 के मामलों की संख्या 15 हजार प्रतिदिन होने की आशंका है और वर्तमान में मामलों की संख्या लगभग पांच हजार प्रतिदिन है.’ याचिका में कहा गया है, ‘हरित पटाखों के इस्तेमाल से स्थिति का समाधान नहीं होगा. धुआं फैल जाएगा और गैस चैंबर जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. इससे दृश्यता का स्तर खराब होगा और दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो जायेगी.’
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